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Mumbai Sakinaka Manhole Incident: मैनहोल हादसे के बाद सियासत तेज, रोहित पवार ने BMC को घेरा; परिवार ने मांगी सरकारी नौकरी

Rohit Pawar BMC Budget: मुंबई के साकीनाका मैनहोल हादसे पर NCP (SP) विधायक रोहित पवार का बीएमसी (BMC) पर तीखा हमला। 81,000 करोड़ के बजट पर उठाए सवाल; पीड़ित परिवार ने की मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग।
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मुंबई

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Imran Ansari

Jul 03, 2026

Rohit Pawar BMC Budget

रोहित पवार ने BMC को घेरा, परिवार ने मांगी सरकारी नौकरी

Mumbai Sakinaka Manhole Incident: मुंबई के साकीनाका इलाके में भारी बारिश के दौरान एक खुले मैनहोल (गटर) में गिरने से हुई 60 साल के असलम इसाक शेख की मौत के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) यानी NCP (SP) के विधायक रोहित पवार ने शुक्रवार को पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों पर "रखरखाव की भारी कमी" का आरोप लगाते हुए कहा कि मुंबई में हर साल मानसून के दौरान ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोहराई जाती हैं, जो बेहद शर्मनाक है।

81,000 करोड़ के बजट वाली बीएमसी पर उठे सवाल

पीड़ित परिवार से मिलने के बाद मीडिया से बात करते हुए विधायक रोहित पवार ने बीएमसी (BMC) के भारी-भरकम बजट और तैयारियों पर तीखे सवाल उठाए। पवार ने कहा, "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि उचित रख-रखाव न होने के कारण लोग मैनहोल में गिरकर अपनी जान गंवा रहे हैं। यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि हर साल की कहानी बन चुकी है। मुंबई महानगरपालिका (BMC) का बजट करीब 81,000 करोड़ रुपए है। इसमें से लगभग 250 करोड़ रुपये मानसून से पहले मैनहोल, नालों और पेड़ों की छंटाई जैसे कामों पर खर्च किए जाते हैं। फिर भी नतीजा सिफर है।'

'सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर गाज क्यों, बड़े अफसरों पर कार्रवाई कब?'

रोहित पवार ने बताया कि हादसे का शिकार हुए असलम भाई का परिवार इस समय गहरे सदमे और गुस्से में है। परिवार का अब नेताओं और व्यवस्था से भरोसा उठ चुका है। परिजनों का सवाल है कि जब भी ऐसी कोई लापरवाही होती है, तो हमेशा निचले स्तर के छोटे अधिकारियों या कर्मचारियों पर ही कार्रवाई की जाती है, जबकि असली जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों और ठेकेदारों को छूआ तक नहीं जाता।

मृतक की पत्नी की भावुक अपील

हादसे में अपने पति को खोने वाली असलम शेख की पत्नी ने इस पूरी घटना के लिए सीधे तौर पर बीएमसी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने रोते हुए कहा कि कहीं भी मैनहोल खुले मत छोड़ो। अगर मैनहोल खुला है, तो यह बीएमसी की सरासर गलती है। थोड़ा आम लोगों का भी ख्याल रखो। कुछ ऐसा इंतजाम करो कि आगे कोई और इस तरह गटर में न गिरे। ये खुले मैनहोल लोगों की जान ले रहे हैं।'

नेताओं के घर का कोई मरता, तभी समझ आता? - परिजन

मृतक की साली ने ठेकेदारों और प्रशासन की बार-बार होने वाली लापरवाहियों पर बेहद कड़े सवाल दागे। उन्होंने कहा, "हर मानसून में ठेकेदार एक ही जैसी गलतियां क्यों दोहराते हैं? ये गलतियां कब सुधारी जाएंगी? क्या वे छोटे बच्चे हैं जिन्हें हर बार सिखाना पड़ेगा? सरकार कब जागेगी? क्या वे तब समझेंगे जब किसी बड़े राजनेता के घर का कोई व्यक्ति अपनी जान गंवाएगा? जनता की देखभाल करना सरकार का कर्तव्य है, लेकिन वे क्या कर रहे हैं?'

मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग

पीड़ित परिवार ने लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे और मृतक की पत्नी को जीवनयापन के लिए सरकारी नौकरी देने की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों को सुरक्षा उपकरणों के साथ काम करना चाहिए और किसी की जिंदगी के साथ इस तरह का खिलवाड़ बंद होना चाहिए।