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चुनाव आते ही संघ-भाजपा को याद आता है मंदिर और राम-राकांपा

नवाब मालिक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामले पर किसी को कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए...

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nawab malik

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(मुंबई): पिछले तीन दिनों आए मुंबई में चल रही आरएसएस की बैठक और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर एक बार फिर से एनसीपी ने भाजपा-शिवसेना सरकार पर वार किया है। इसे लेकर पार्टी प्रवक्ता नवाब मालिक ने शुक्रवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामले पर किसी को कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए और भारतवासियों को कोर्ट के निर्णय का सम्मान करना चाहिए। आरएसएस और भाजपा अयोध्या में राम रामदिर निर्माण को लेकर राजनीति कर रही है और उसके शिवसेना भी कूद रही है। जब जब चुनाव आते हैं, कसम राम की खाते हैं और मंदिर वहीं बनाते हैं। अपनी कार्यशैली को लेकर मोदी सरकार को अब भय सताने लगा है और वहीं आरएसएस उसी को लेकर देश की जनता की धार्मिक भावनाओं को लेकर खेलना चाहता है।

राजस्थान की जनता ने भी नकार दिया था...

6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराई गई और कल्याण सिंह की सरकार बर्खास्त की गई। फिर 1993 में हुए चुनाव में भाजपा को सपा और बसपा ने मिलकर पूरी तरह से परास्त कर दिया था। वहीं उस दौरान राजस्थान की जनता ने भी भाजपा को नकार दिया था। देश की अधिकांश जनता धार्मिक भावनाओं से खेलने वाली पार्टियों की मंशा अब जान चुकी है। अब भाजपा मंदिर-मस्जिद, भावनाओं का चाहे जितना भी माहौल बना ले, लेकिन आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की विदाई तय है।

जनता अब भाजपा सरकार की सुनने वाली नहीं...

वहीं राम मंदिर को लेकर मालिक आगे कहते हैं कि भाजपा सरकार को हार की छटपटाहट सताने लगी है। अब आरएसएस को देश की उच्चतम न्यायालय पर भी भरोसा नहीं रह गया है, जिसके चलते अब वह भाजपा सरकार पर राम मंदिर निर्माण को लेकर नए कानून बनाने की पेशकश करने में जुटी है। इसके चलते अगर कोई प्राइवेट बिल आता है तो जरूरी नहीं कि सभी लोग उससे सहमत हों और उस पर किसी को आपत्ति न हो। हालांकि हर किसी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है, फिर क्या अब देश में भाजपा और आरएसएस के बोलने से राजनीति को जाएगी, अब ये बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अब चाहे संघ का मंथन हो, शिवसेना की धमकी हो, अब देश की आवाम समझ चुकी है और अब जनता भाजपा सरकार के किसी भी जुमले को सुनने वाली नहीं है।