
अभिजीत दीपके और संजय राउत (Photo: IANS)
Sanjay Raut CJP Protest: नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर में जारी विरोध प्रदर्शन अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 23 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। जबकि अभिजीत दीपके की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में सोमवार को जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए मार्च के दौरान जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए। इस पर अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्य सभा सांसद और प्रवक्ता संजय राउत ने बड़ा बयान दिया है।
मंगलवार को मीडिया से बातचीत में संजय राउत से सवाल पूछा गया कि जंतर-मंतर और संसद परिसर में हुए प्रदर्शन के दौरान विपक्ष के नेता नजर नहीं आए। इस पर उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति की वजह से नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष के समर्थन से मजबूत हुआ।
राउत ने कहा, "आंदोलन में शामिल लोग किसी एक व्यक्ति के पीछे नहीं हैं। चाहे वह सोनम वांगचुक हों या अभिजीत दीपके। इस मुद्दे को राहुल गांधी और हम सभी ने उठाया। वहीं से यह लड़ाई शुरू हुई। इस लड़ाई को आगे बढ़ाने का काम देश के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के बयान ने किया। नीट पेपर लीक के मुद्दे पर हर राजनीतिक दल सड़क पर उतरा है।"
संजय राउत ने दावा किया कि विपक्ष के लगातार समर्थन की वजह से ही आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिली। उन्होंने कहा, "कोई अमेरिका से आ जाए, इसलिए आंदोलन सफल नहीं होता। हम सभी इस आंदोलन के साथ खड़े हैं, इसलिए यह सफल हुआ है। सोमवार को अरविंद केजरीवाल, समाजवादी पार्टी, भीम आर्मी और हमारे कार्यकर्ता भी आंदोलन में मौजूद थे। उद्धव ठाकरे ने भी इस मुद्दे पर कई बार चर्चा की है।"
संजय राउत ने प्रदर्शनकारियों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज की तुलना जालियांवाला बाग की घटना से करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "देश के युवाओं ने जिस तरह अपना गुस्सा जाहिर किया, उसे हम लोकतंत्र मानते हैं। लेकिन नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पुलिस ने जिस तरह छात्रों पर लाठियां बरसाईं, उससे जालियांवाला बाग की याद आ गई। कल का दिन भारतीय लोकतंत्र का काला दिन था। 20 जुलाई को अब 'डरपोक दिवस' के रूप में मनाया जाना चाहिए।"
उद्धव ठाकरे के करीबी संजय राउत ने कहा कि अब विपक्ष को इस आंदोलन की कमान संभालनी चाहिए और इसे राष्ट्रीय स्तर तक ले जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "जहां भी मौका मिलेगा, हम इस आंदोलन का समर्थन करेंगे। अब इस आंदोलन को पूरे देश में ले जाने की जरूरत है।"
इस बीच, जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने अब तक 5 एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस के अनुसार, संसद मार्ग और कनॉट प्लेस थानों में दंगा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पुलिसकर्मियों पर हमला, सरकारी काम में बाधा डालने और तोड़फोड़ जैसी धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसियां सीसीटीवी, ड्रोन, पुलिसवालों के बॉडी कैमरा और मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किए गए 250 से अधिक वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर रही हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि हिंसा पहले से सुनियोजित थी या नहीं और कहीं इससे बाहरी देशों के तो कनेक्शन नही है।
Updated on:
21 Jul 2026 02:45 pm
Published on:
21 Jul 2026 02:38 pm
