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‘1600 करोड़ का कर्ज है, बेटे भी ज्यादा नहीं कमाते’, इथेनॉल विवाद पर नितिन गडकरी का बड़ा बयान

Nitin Gadkari on Ethanol blend petrol: पेट्रोल में E-20 इथेनॉल मिलाने पर छिड़े विवाद और व्यक्तिगत लाभ के आरोपों को केंद्रीय मंत्री ने खारिज किया। गडकरी ने कहा कि 'व्यवसाय पर 1600 करोड़ का कर्ज है और बेटों का मुनाफा ना के बराबर है।'
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मुंबई

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Imran Ansari

Jul 15, 2026

Nitin Gadkari on Ethanol blend petrol

इथेनॉल विवाद पर नितिन गडकरी का बड़ा बयान, फोटो सोर्स - IANS

E20 petrol engine damage controversy: भारत में पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने (E-20 Fuel) की नीति को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बड़ा विवाद छिड़ा हुआ है। आम जनता और वाहन चालकों का आरोप है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं और माइलेज कम हो रहा है। इसी बीच, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पर इस नीति का समर्थन करने को लेकर 'हितों के टकराव' और व्यक्तिगत लाभ कमाने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। अब इन सभी आरोपों पर खुद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सामने आकर बेहद बेबाकी से जवाब दिया है और सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

'व्यापार पर 1,600 करोड़ का कर्ज, राजनीतिक हैं आरोप'

'द टाइम्स ऑफ इंडिया' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में नितिन गडकरी ने अपने और अपने परिवार पर लग रहे व्यक्तिगत लाभ के आरोपों को 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' बताया। उन्होंने साफ किया कि इस पूरे उद्योग में उनके परिवार का कोई बड़ा व्यक्तिगत हित नहीं है। गडकरी ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो दावे किए जा रहे हैं, उनमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। वहां भारी मात्रा में गलत जानकारी फैलाई जा रही है। इस इथेनॉल व्यवसाय में मेरे बेटों की हिस्सेदारी बेहद कम है और कुल मुनाफे में उनका योगदान पूरी तरह नगण्य (ना के बराबर) है। हकीकत तो यह है कि इस व्यवसाय पर फिलहाल 1,600 करोड़ रुपए का भारी-भरकम कर्ज है। मेरा इस व्यवसाय या इसकी खरीद-बिक्री से सीधा कोई संबंध नहीं है।

वाजपेयी और यूपीए सरकार का दिया हवाला

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल मिश्रण की नीति कोई नई या उनकी बनाई हुई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की वकालत अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय से ही चल रही है और बाद में आई यूपीए सरकार ने भी इसका पूरा समर्थन किया था। तत्कालीन तेल मंत्री मणिशंकर अय्यर ने भी संसद में इसके पक्ष में बात रखी थी।

गडकरी ने कहा कि उन्होंने न केवल गन्ने से बने इथेनॉल का, बल्कि मक्का, फसल अवशेषों (पराली) और बांस से तैयार होने वाले इथेनॉल का भी हमेशा समर्थन किया है। इसके अलावा उन्होंने मेथनॉल, हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) जैसे सभी प्रकार के वैकल्पिक ईंधनों को लगातार बढ़ावा दिया है ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके।

इंजन खराब होने के दावों को नकारा

वाहन चालकों द्वारा माइलेज कम होने और इंजन को नुकसान पहुंचने के दावों पर बात करते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि राजमार्गों (Highways) पर गाड़ी चलाते समय ईंधन दक्षता (Fuel Efficiency) पर थोड़ा बहुत असर पड़ सकता है, लेकिन वाहनों के इंजन खराब होने का दावा पूरी तरह गलत है। उन्होंने तर्क दिया कि देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी 'मारुति' को भी अपनी गाड़ियों के इंजनों पर इसका कोई विपरीत प्रभाव नहीं दिखा है।

उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही इस मनगढ़ंत और गलत जानकारी का इस्तेमाल कुछ ताकतों द्वारा उनके और केंद्र सरकार के खिलाफ एक राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने देश के हित में प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता व भारी-भरकम खर्च को घटाने के लिए वैकल्पिक ईंधनों का समर्थन जारी रखने की बात दोहराई।