
नासिक में किसान आक्रामक, आज से 14 बाजार समितियों में प्याज की नीलामी बंद
Onion Export Duty: महाराष्ट्र के नासिक जिले में प्याज व्यापारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से किसानों का बड़ा नुकसान हो रहा है। आज भी नासिक की सभी 17 कृषि उपज बाजार समितियों में प्याज की नीलामी ठप (Onion Auction) रही। जिस वजह से लासालगांव स्थित एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी भी सन्नाटा पसरा रहा। उधर, अब इस हड़ताल से खुदरा बाजारों में प्याज की कमी होने और दाम बढ़ने की आशंका है। हालाँकि राज्य सरकार ने हड़ताल पर गए प्याज व्यापारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है और कार्रवाई की चेतावनी दी है। लेकिन इसका कुछ खासा असर पड़ता नहीं दिख रहा है।
जानकारी के मुताबिक, हड़ताल का समाधान निकालने के लिए पालकमंत्री दादा भुसे (Dada Bhuse) ने आज नासिक कलेक्टर कार्यालय में व्यापारियों और विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। हालाँकि, ये बैठक बेनतीजा रही है। व्यापारी मांग न माने जाने तक प्याज की नीलामी रोकने पर अड़े हुए हैं। शुक्रवार दोपहर में व्यापारियों की फिर बैठक होगी. इसमें आगे का निर्णय लिया जायेगा। यह भी पढ़े-निर्यात शुल्क के चक्कर में सड़ गया 800 टन प्याज! महाराष्ट्र के व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान
इस बैठक में नासिक के कलेक्टर एवं रजिस्ट्रार भी उपस्थित थे। इस दौरान मंत्री दादा भुसे ने नाफेड और एनसीसीएफ (NCCF) के अधिकारियों को मंडी में होने वाली उनकी दैनिक खरीद की जानकारी और किसानों से ख़रीदे गए प्याज का विवरण कलेक्टर कार्यालय को देने का निर्देश दिया है। भुसे ने कहा कि गणेशोत्सव के दौरान प्याज की नीलामी बंद नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि इससे किसानों को नुकसान होता है।
नासिक जिला प्याज व्यापारी संघ (एनडीओटीए) का कहना है कि प्याज पर निर्यात शुल्क बढ़ाने के विरोध में हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। जिले के सभी एपीएमसी में प्याज की नीलामी अनिश्चित काल के लिए बंद कर दी गयी है। हालांकि प्रशासन ने प्याज नहीं खरीदने वाले व्यापारियों पर तत्काल कार्रवाई करने और उनका लाइसेंस निलंबित या रद्द करने के निर्देश दिये हैं।
प्याज के निर्यात पर 40 फीसदी शुल्क लगाने के विरोध में अगस्त महीने में भी किसानों और व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किया था। तब भी भारत के सबसे बड़े थोक प्याज बाजार लासलगांव सहित नासिक जिले के अधिकांश एपीएमसी में प्याज की नीलामी रोक दी गयी थी। बाद में सरकार के हस्तक्षेप के बाद विरोध वापस लिया गया था।
मालूम हो की अगस्त के पहले हफ्ते में आई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि प्याज की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी होगी। जिसके बाद केंद्र ने प्याज पर 40 फीसदी निर्यात शुल्क लगाने का फैसला किया। सरकार ने घरेलू प्याज आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण के लिए यह कदम उठाया। लेकिन निर्यात शुल्क बढ़ाने के फैसले से किसान-व्यापारी नाराज हो गए। जिसके बाद केंद्र सरकार ने ऐलान किया कि वह 2,410 रुपये क्विंटल के भाव पर 2 लाख मीट्रिक टन प्याज खरीदेगी। हालाँकि किसानों का आरोप है कि उनसे प्याज 2,410 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर नहीं ख़रीदा जा रहा है।
Published on:
21 Sept 2023 07:41 pm
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