
22 साल से घर का इंतजार कर रहे हनुमान नगर के लोग
मुंबई
केंद्र सरकार ने 2022 तक देश के सभी बेघरों को घर देने का लक्ष्य रखा है। महाराष्ट्र सरकार मुंबई को झोपड़ा मुक्त बनाने की योजना पर काम कर रही है। बावजूद इसके जमीन हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश करती है।
महानगर में झोपड़पट्टियों के पुनवर्सन का काम इतना सुस्त है कि लोगों को अपना घर पाने के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ रहा है। विक्रोली पश्चिम स्थित हनुमान नगर झोपड़पट्टी की 15 सोसायटियों पर इसके लिए गौर किया जा सकता है। हनुमान नगर के लोगों को 22 साल पहले झोपड़े की जगह फ्लैट का सपना दिखाया गया था। सरकारें आती-जाती रहीं मगर यहां के लोगों को अभी तक घर नहीं मिला है। यहां रहनेवाले 2,300 परिवारों के लोग चाहते हैं कि सरकार बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। साथ ही झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना के तहत हनुमान नगर सोसायटी को नया डेवलपर नियुक्त करने का अधिकार मिले।
उल्लेखनीय है कि झोपड़पट्टियों के विकास का काम एसआरए देखती है। एसआरए से पहले एसआरडी यह काम देखती थी। हकीकत यह है कि एसआरए स्कीम के तहत सोसायटी वालों को अब तक गोल-गोल ही घुमाया जाता रहा है। हकीकत में यह जगह म्हाडा की है, जिसके लिए बिल्डर ने एनओसी नहीं ली है। सवाल यह है कि बिना म्हाडा की एनओसी लिए हनुमान नगर को एसआरए स्कीम में शामिल कैसे किया गया? इसका जवाब न तो बिल्डर के पास है और न ही एसआरए ही कुछ कहने को तैयार है।
80 साल पुरानी बस्ती
ह नुमान नगर झोपड़पट्टी करीब 18 एकड़ जमीन पर फैली है, जिसमें 60 प्रतिशत के लगभग हिस्सा पहाड़ी है। 80 साल पुरानी बस्ती को 1989 के दौरान स्लम अपग्रेडेशन प्रोग्राम (एसयूपी) के दायरे में लाया गया। बड़े-बड़े वादे किए गए। क्षेत्र के विकास के सपने दिखाए गए। लेकिन झोपड़पट्टी का पुनर्विकास नहीं हुआ।
नहीं मिल रहा किराया
योजना के तहत ओमकार बिल्डर ने हनुमान नगर के कुछ रहिवासियों के घर तोड़ कर उन्हें अन्य जगहों पर शिफ्ट कर दिया है। इसके चलते कई परिवार किराया लेकर बदलापुर, अमरनाथ, वांगनी, कसारा तक रहने चले गए हैं। लेकिन अब उन्हें बिल्डर की ओर से किराया नहीं मिल रहा है। घंटों सफर कर आने वाले हनुमान नगर के रहवासियों को अब बिल्डर की ऑफिस के बाहर धरना देने को भी मजबूर होना पड़ रहा है।
Published on:
26 Nov 2018 06:33 pm
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