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Pune: किसान ने मंडी में बेचीं 17 बोरी फूलगोभी, हाथ में मिले सिर्फ 9.5 रुपए, गुस्से में उठाया यह कदम

Navi Mumbai APMC Market: पुणे के शिरूर के किसान किसन फराटे ने फूलगोभी (Cauliflower) की खेती बड़ी मेहनत के साथ की और जब उसे मार्केट में बेचा तो मात्र साढ़े नौ रूपये मिले। इस वाकिये ने किसान को तोड़कर रख दिया है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Aug 21, 2022

Cauliflower farmer

किसान को 17 बोरी फूलगोभी के बदले 9.5 रुपए मिले

Pune Farmer News: सरकार देश भर में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए अभियान चला रही है, इस बीच किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिलने से इस पूरी मुहिम पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। आपको बता दें कि ऐसा ही एक मामला महाराष्ट्र से सामने आया है, जहां किसान को उसकी अथक परिश्रम के बदले दस रुपये भी नसीब नहीं हुए।

मिली जानकारी के मुताबिक, पुणे के शिरूर के किसान किसन फराटे ने फूलगोभी (Cauliflower) की खेती बड़ी मेहनत के साथ की और जब उसे मार्केट में बेचा तो मात्र साढ़े नौ रूपये मिले। इस वाकिये ने किसान को तोड़कर रख दिया है। और उसने इन पैसों को वापस व्यापारी को लौटाने का निर्णय लिया है। यह भी पढ़े-Nashik: प्याज उगाने में खर्च हुए 1800 रुपये, बाजार में मिले 1100 रुपये... ऐसे कैसे डबल होगी किसानों की इनकम?

किसान किसन फराटे ने बताया कि उसने पुणे से नवी मुंबई (Navi Mumbai) में स्थित एपीएमसी के सब्जी बाजार में 17 बोरी फूलगोभी बेंची, जिसके बदले उसे 9.5 रुपये मिले. किसान ने बताया कि वह फूलगोभी को उगाने व काटकर भेजने में बेहिसाब मेहनत के साथ हजारों रूपये खर्च कर चुका है। लेकिन उसके बदले उसे महज 9.5 रुपये मिले। इसलिए वह एपीएमसी मार्केट के व्यापारी को 9.5 रुपये भी वापस लौटाएगा।

इसी महीने नासिक के किसानों ने प्याज के दाम (Onion Price) बढ़ने पर उसके निर्यात (Onion Export) पर प्रतिबंध लगाने की केंद्र सरकार की नीति के खिलाफ प्रदर्शन किया था। किसान संगठन का आरोप है कि इस नीति की वजह से प्याज उत्पादन की लागत लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल होने पर उन्हें औसतन 1,100 रुपये प्रति क्विंटल पर इसे बाजार में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

गौरतलब है कि देश में जब भी थोक प्याज की कीमतें (Wholesale Onion Price) बढ़ने लगती हैं, तो केंद्र डिमांड और सप्लाई को बैलेंस करने के लिए प्याज के निर्यात को बैन कर देती है। ऐसे में प्याज की थोक कीमतों में गिरावट से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

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