
संसद भवन में बेटे पार्थ पवार के साथ जाते हुए सुनेत्रा पवार (Photo: IANS/File)
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर पुणे का मुंधवा जमीन सौदा चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस मामले की जांच कर रही विकास खरगे समिति ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट बुधवार को महाराष्ट्र विधानसभा में पेश कर दी है। इस रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुणे के मुंधवा क्षेत्र में स्थित करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को पार्थ पवार की सह-स्वामित्व वाली कंपनी अमाडिया एंटरप्राइजेस (Amadia Enterprises LLP) को बेचने के लिए हुआ लेन-देन नियमों के खिलाफ था। इसमें सरकारी अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया है कि सरकारी जमीन के लिए एनसीपी सांसद पार्थ पवार के पक्ष में किया गया पावर ऑफ अटॉर्नी अवैध, गलत और आपराधिक प्रकृति का था। हालांकि, समिति ने उनके खिलाफ सीधे कार्रवाई की सिफारिश नहीं की है और कहा है कि उनकी भूमिका की जांच पुलिस जांच का हिस्सा है।
रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है, सरकारी जमीन के संबंध में पावर ऑफ अटॉर्नी बनाना अवैध और गलत है। यह मामला आपराधिक प्रकृति का है। साथ ही यह भी जोड़ा गया है कि यह पावर ऑफ अटॉर्नी पहले से दर्ज एफआईआर के साथ-साथ चल रही पुलिस जांच का हिस्सा है।
बता दें कि पार्थ पवार एनसीपी के दिग्गज नेता और महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे हैं। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ हाल ही में राज्यसभा सांसद बने हैं।
मुंधवा क्षेत्र में करीब 40 एकड़ सरकारी जमीन, जो राज्य सरकार के स्वामित्व में थी, उसे निजी कंपनी अमाडिया एंटरप्राइजेस को बेच दिया गया। खास बात यह है कि इस कंपनी में पार्थ पवार की बड़ी हिस्सेदारी बताई जाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह जमीन पहले भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआई) को पट्टे पर दी गई थी, बावजूद इसके इसे निजी कंपनी को बेचना गंभीर अनियमितता की ओर इशारा कर रहा है।
इस पूरे मामले की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव खरगे की अध्यक्षता में समिति बनाई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि यह सौदा पूरी तरह से नियमों के खिलाफ था। राजस्व, स्टाम्प और पंजीकरण विभाग के अधिकारियों ने इस लेन-देन को आसान बनाया। इसमें स्पष्ट रूप से गंभीर चूक और मिलीभगत के संकेत हैं।
समिति की रिपोर्ट में खास तौर पर पार्थ पवार की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि शीतल तेजवानी, जो मुंढवा भूमि की पावर ऑफ अटॉर्नी धारक के रूप में कार्य कर रही थीं, ने इसी विवादित जमीन के लिए पार्थ पवार के पक्ष में एक नोटरीकृत पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार किया था। समिति के अनुसार, यह कदम अपने आप में ही अवैध था।
समिति ने अमाडिया एंटरप्राइजेस के पार्टनर दिग्विजय पाटिल को भी जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उन्हें विवादित जमीन की जानकारी होने के बावजूद खरीदारी नहीं करनी चाहिए थी। समिति ने यह भी माना कि इस मामले में आपराधिक प्रकृति के अपराध शामिल हो सकते हैं। अब पुणे पुलिस इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
बुधवार को जब यह रिपोर्ट महाराष्ट्र विधानसभा के पटल पर रखी गई, तो राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर सबकी नजरें राज्य सरकार और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। अगर आपराधिक जांच आगे बढ़ती है, तो यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
Updated on:
26 Mar 2026 09:07 am
Published on:
26 Mar 2026 09:04 am
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