
पार्थ पवार के ममेरे भाई दिग्विजय पाटिल ने वापस ली जमानत की अर्जी (Photo: X/AIR)
पुणे के चर्चित मुंढवा जमीन घोटाला मामले में बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। इस मामले में आरोपी दिग्विजय पाटिल ने पुणे सत्र न्यायालय में दायर अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली है। उनके इस कदम के बाद अब पुणे पुलिस कार्रवाई को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। दिग्विजय पाटिल महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार के ममेरे भाई है।
जानकारी के मुताबिक, दिग्विजय पाटिल ने अपने खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। बताया जा रहा है कि पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद नए कानूनी मुद्दों के आधार पर दोबारा अर्जी देने के लिए पाटिल ने यह कदम उठाया।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह रणनीतिक कदम हो सकता है, जिससे नए तथ्यों के आधार पर कोर्ट से राहत मांगी जा सके। हालांकि, पहले आवेदन के वापस लेने के बाद पुलिस अब उन्हें गिरफ्तार भी कर सकती है।
इस मामले में राज्य के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार को पहले ही जांच समिति से क्लीन चिट मिलने की खबर है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा नियुक्त विकास खारगे समिति ने अपनी जांच में पाया कि जमीन खरीद से जुड़े दस्तावेजों पर पार्थ पवार के हस्ताक्षर नहीं थे। इसी आधार पर समिति ने माना कि उनका इस सौदे से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। इससे उन्हें बड़ी राहत मिलने की बात कही जा रही है।
यह मामला पुणे के मुंढवा इलाके में स्थित महार वतन की एक बेशकीमती जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि यह जमीन पार्थ पवार से जुड़ी अमेडिया कंपनी को बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर बेची गई। वर्तमान में इस जमीन की कीमत लगभग 1800 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसे कथित तौर पर मात्र 300 करोड़ रुपये में कंपनी को दे दिया गया था। इतना ही नहीं, इस सौदे में करीब 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी भी माफ किए जाने का आरोप है। विवाद बढ़ने के बाद तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस सौदे को रद्द करने की घोषणा की थी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी जांच के आदेश दिए थे।
Updated on:
24 Feb 2026 10:42 am
Published on:
24 Feb 2026 10:38 am
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