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Farmer Suicide: ‘हैप्पी बर्थडे मोदी साहब…’, महाराष्ट्र में किसान ने की आत्महत्या, प्रशासन पर उठे सवाल

Maharashtra Farmer Suicide: किसान ने सुसाइड नोट में लिखा “हम भीख नहीं मांगते। हम कई चुनौतियों का सामना करते हुए खेत में विभिन्न फसलें उगाते हैं, यह एक तरह का जुआ है। मैं इस तरह के जीवन से थक गया हूं।“

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Sep 19, 2022

Maharashtra Farmer Suicide PM Modi

पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई देते हुए पुणे के किसान ने की आत्महत्या

Pune Crime News: महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नार तालुका (Pune Junnar News) में एक किसान ने कर्ज के बोझ से तंग आकर आत्महत्या (Suicide) कर ली है। आत्महत्या करने से पहले किसान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बधाई (PM Narendra Modi Birthday) देते हुए एक सुसाइड नोट लिखा। मृतक किसान की पहचान दशरथ लक्ष्मण केदारी के तौर पर हुई है।

मृतक किसान ने आरोप लगाया है कि फसल पर उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। सुसाइड नोट में अन्नदाता ने कहा है कि प्याज और टमाटर की गिरती कीमतों, कोविड-19 और भारी बारिश का संकट और कर्ज चुकाने के लिए फाइनेंस कंपनियों और कर्जदाताओं की झिकझिक ने उन्हें तंग कर दिया है। इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है। यह भी पढ़े-महाराष्ट्र में लंपी रोग का प्रकोप! 126 मवेशियों की मौत, पुलिस कमिश्नर का आदेश- सार्वजानिक स्थानों पर न ले जाएं मवेशी

मृतक किसान दशरथ ने सुसाइड नोट में लिखा “हम भीख नहीं मांगते। हम कई चुनौतियों का सामना करते हुए खेत में विभिन्न फसलें उगाते हैं, यह एक तरह का जुआ है। मैं इस तरह के जीवन से थक गया हूं। इसलिए आज मैं सुसाइड कर रहा हूं।“ आत्महत्या करते हुए उन्होंने मोदी सरकार से मांग की कि हमें हमारे अधिकारों का बाजार मूल्य (उपज के लिए) दिया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जन्मदिन की बधाई दी।

दशरथ जुन्नार तालुका के वडगांव आनंद गांव के रहने वाले है। उनके पास एक एकड़ खेत और एक दोपहिया वाहन था। उन्होंने ढाई लाख का कर्ज लिया था। इससे मई के महीने में प्याज की फसल काटी गई थी। लेकिन तब रेट करीब 10 रुपये थे। इसलिए उन्होंने प्याज बेचने की जगह भंडारण किया, जिसके लिए भी उन्हें कुछ रकम चुकानी पड़ी। लेकिन रेट नहीं बढ़ा, इस बीच बारिश में आधा प्याज खराब हो गया। इस झटके के बाद वे नहीं टूटे। उन्होंने फिर से उसी खेत में टमाटर और सोयाबीन लगाए।

लेकिन पहली बारिश में टमाटर खराब हो गए, जबकि पिछले हफ्ते हुई बारिश में सोयाबीन की फसल भी हाथ से निकल गई। मुआवजे के लिए सोयाबीन की इन फसलों का पंचनामा कराने दशरथ 17 सितंबर को सरकारी कार्यालय गए थे। दो घंटे वहां बैठे रहने के बाद भी उनके फसल का पंचनामा नहीं हो पाया। जिसके बाद वह दोपहर के करीब पहले जहर खाया और फिर खेत के तालाब में कूदकर आत्महत्या कर ली।

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