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‘यूपी-बिहार की ट्रेनें रोक देंगे’, मनसे की धमकी पर रेलवे का आया जवाब, कहा- कोंकण की 92 ट्रेन रोज चल रही

Dadar Ratnagiri Passenger Train: महाराष्ट्र में ट्रेनों को लेकर सियासत तेज हो गई है। राज ठाकरे की मनसे की ओर से यूपी-बिहार की ट्रेनों को रोकने की चेतावनी के बीच रेलवे ने कहा कि कोंकण क्षेत्र के लिए ट्रेन सेवाओं में कोई कमी नहीं की गई है, बल्कि बड़ी संख्या में ट्रेनें नियमित रूप से चलाई जा रही हैं।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Mar 26, 2026

राज ठाकरे की मनसे को रेलवे का जवाब (Photo: IANS)

Dadar Gorakhpur Express Row: राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने रेलवे को दादर-रत्नागिरी ट्रेन सेवा शुरू करने के लिए अल्टीमेटम दिया है। मनसे की ओर से चेतावनी दी गई है कि अगर 15 दिनों में उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा और उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों को रोक दिया जाएगा। इस मुद्दे पर मनसे के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को रेलवे अधिकारियों से मुलाकात की। दरअसल दादर-रत्नागिरी पैसेंजर ट्रेन को पड़ोसी ठाणे जिले के दिवा स्टेशन से चलाया जा रहा है। इसकी जगह दादर से गोरखपुर के लिए ट्रेन शुरू की जा रही है। मनसे का कहना है कि रेलवे उत्तर भारतीय यात्रियों को प्राथमिकता दे रही है, जबकि इस निर्णय से कोंकण के यात्रियों को बहुत परेशानी हो रही है। हालांकि इस मामले पर रेलवे ने भी अपना पक्ष रखा है।

मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) डॉ. स्वप्निल नीला ने स्पष्ट किया कि कोंकण क्षेत्र के लिए ट्रेनों की संख्या में कमी नहीं की गई है, बल्कि वर्तमान में अप-डाउन मिलाकर कुल 92 ट्रेनें रोजाना इस रूट पर चल रही हैं।

उन्होंने बताया कि मंगलवार को मनसे के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई, जिसमें रेलवे ने तथ्यों के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मुंबई से कोंकण क्षेत्र के लिए रोजाना बड़ी संख्या में ट्रेनें चलाई जा रही हैं। अकेले मुंबई से कोंकण के लिए 21 ट्रेनें रोज संचालित होती हैं, जबकि अन्य मार्गों से गुजरने वाली 25 ट्रेनें भी कोंकण जाती हैं। इस तरह कुल मिलाकर 46 अप और 46 डाउन यानी करीब 92 ट्रेनें प्रतिदिन कोंकण क्षेत्र को कवर कर रही हैं।

रेलवे के अनुसार, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) से मडगांव के लिए 6 ट्रेनें, लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) से 8 ट्रेनें, दादर से 1 ट्रेन, कल्याण से 4 ट्रेनें और दिवा से सावंतवाड़ी व रत्नागिरी के लिए एक-एक ट्रेनें प्रतिदिन चलाई जा रही हैं। इसके अलावा 25 ट्रेनें वसई रोड और पनवेल रूट से भी हर रोज कोंकण पहुंचती हैं।

दादर-रत्नागिरी ट्रेन का रूट बदलने का बताया कारण

मनसे द्वारा उठाए गए दादर-रत्नागिरी ट्रेन के मुद्दे पर रेलवे ने तथ्यात्मक स्पष्टीकरण दिया है। स्वप्निल नीला ने बताया कि यह ट्रेन 2021 में ही परिचालन कारणों से दादर से दिवा शिफ्ट कर दी गई थी। दरअसल जब यह ट्रेन दादर से चलती थी और दिवा स्टेशन पार करती है, तो इसे 5वीं और 6वीं लाइन का उपयोग करना पड़ता था। शाम के पीक ऑवर के दौरान इस प्रक्रिया में 11-12 मिनट का समय लगता था, जिससे मुंबई डिवीजन की लोकल ट्रेनों की पंक्चुअलिटी बुरी तरह प्रभावित होती थी। इसी कारण यह बदलाव किया गया। रेलवे के अनुसार, इस फैसले की वजह से अप-डाउन की लगभग 6 लोकल ट्रेनें प्रभावित नहीं होती।

दादर-गोरखपुर ट्रेन पर क्या कहा?

दादर-गोरखपुर ट्रेन के बारे में भी रेलवे ने स्थिति साफ की। पहले यह ट्रेन लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) से चलती थी, लेकिन वहां LHB कोचिंग डिपो बनने के बाद इसे दादर शिफ्ट किया गया। हालांकि, दादर स्टेशन की क्षमता को देखते हुए कोच की संख्या 22 से घटाकर 17 करनी पड़ी, लेकिन इसकी फ्रीक्वेंसी या स्टॉपेज में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सिर्फ इसे विशेष ट्रेन से नियमित (Regular) सेवा में बदला गया है।

ये 92 ट्रेनें रोज चल रही

स्वप्निल नीला ने कहा कि पिछले सप्ताह नियमित की गई 14 ट्रेनों में से 7 महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों के लिए हैं। जबकि पिछले 3-4 वर्षों में कोंकण क्षेत्र में किसी भी ट्रेन को बंद नहीं किया गया है। उल्टा सेवाओं में लगातार बढ़ोतरी की गई है। मुंबई से रोजाना 21 ट्रेनें कोंकण के लिए चलती हैं, जबकि वसई रोड और पनवेल के रास्ते अन्य 25 ट्रेनें इस मार्ग से गुजरती हैं। इस प्रकार रोजाना कुल 46 अप और 46 डाउन (कुल 92) ट्रेनें संचालित हो रही हैं। इसमें सीएसएमटी से मडगांव के लिए 6, एलटीटी से 8 और कल्याण से 4 ट्रेनें शामिल हैं। नई वंदे भारत ट्रेन भी चलाई जा रही है, एलटीटी-मडगांव ट्रेन की फ्रीक्वेंसी भी बढ़ाई गई।

उन्होंने आगे कहा, त्योहारों के दौरान भी रेलवे ने कोंकण के लिए विशेष व्यवस्था की। पिछले साल 302 गणपति स्पेशल ट्रेनें, 52 समर स्पेशल और 36 होली स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं, जिससे यात्रियों को राहत मिली।

रेलवे का कहना है कि सभी फैसले तकनीकी और परिचालन जरूरतों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं और यात्रियों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।