
पिता शिंदे के साथ, बेटी उद्धव के साथ! संजय दिना पाटिल की बेटी राजुल पहुंचीं मातोश्री (Photo: X/@RajoolP/File)
Rajool Patil meets Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे कथित 'ऑपरेशन टाइगर' के बीच एक दिलचस्प और अहम राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बागी सांसद संजय दिना पाटिल की बेटी और पार्षद राजुल पाटिल ने रविवार को ‘मातोश्री’ आवास पहुंचकर उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे से मुलाकात की। मुलाकात के बाद राजुल पाटिल ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी और उनके पिता की राजनीतिक राहें अब अलग-अलग हैं और वह उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़ी हैं।
राजुल पाटिल का यह बयान ऐसे समय आया है जब उनके पिता संजय दिना पाटिल उन छह सांसदों में शामिल बताए जा रहे हैं, जिन्होंने हाल ही में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन देने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
शिवसेना (यूबीटी) के मुंबई उत्तर-पूर्व से लोक सभा सांसद संजय दिना पाटिल शनिवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले की शादी में भी नजर आये थे। शरद पवार की पोती रेवती सुले की शादी कारोबारी व बीजेपी विधायक (MLC) अरुण लखानी के बेटे सारंग लखानी से मुंबई में हुई।
मातोश्री में मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए राजुल पाटिल ने कहा कि उन्होंने अपनी राजनीतिक भूमिका उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के सामने स्पष्ट कर दी है।
उन्होंने कहा, "मैं उद्धव जी और आदित्य जी से मिलने आई थी। उनके सामने मैंने अपना पक्ष रखा है। मैं शिवसेना (यूबीटी) में हूं और आगे भी पार्टी के साथ रहूंगी। मैं पूरी निष्ठा और ईमानदारी से पार्टी का काम करती रहूंगी।"
राजुल ने आगे कहा, "हमारे परिवार में हर व्यक्ति को अपना निर्णय लेने की स्वतंत्रता है। मेरे पिता अपना फैसला लेंगे, लेकिन मैं अपना निर्णय सार्वजनिक रूप से बता रही हूं कि मैं उद्धव ठाकरे के साथ हूं।"
मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की शिवसेना (यूबीटी) नगरसेविका (पार्षद) राजुल पाटिल ने सिर्फ समर्थन का ऐलान ही नहीं किया, बल्कि यह भी बताया कि रविवार को उनके पिता के निर्वाचन क्षेत्र में होने वाले उद्धव ठाकरे के दौरे के दौरान उनके स्वागत की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई है।
उन्होंने कहा कि मुलाकात के दौरान उन्होंने अपनी बात रखी, जिससे उद्धव ठाकरे संतुष्ट हैं। अब वह क्षेत्र में पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से काम करेंगी।
बता दें कि शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसदों के शिंदे गुट में जाने की खबरों के बाद उद्धव ठाकरे ने खुद मैदान में उतरने का फैसला किया है। पार्टी नेतृत्व को आशंका है कि यदि जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी पाला बदलते है तो स्थानीय स्तर पर संगठन बिखर जाएगा। इसी रणनीति के तहत उद्धव ठाकरे ने संबंधित लोकसभा क्षेत्रों का दौरा शुरू करने का निर्णय लिया है। उनका फोकस उन क्षेत्रों पर है जहां पार्टी को झटका लगा है, ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखा जा सके और संगठन को दोबारा मजबूत किया जा सके।
पिछले हफ्ते बगावत का बिगुल फूंकने वाले उद्धव गुट के 6 सांसदों में संजय दिना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व), ओमराजे निंबालकर (धाराशिव), संजय जाधव (परभणी), संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम), नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी) शामिल है।
जानकारी के अनुसार, दो दिन पहले ये सभी सांसद दिल्ली में एकनाथ शिंदे के साथ लोक सभा स्पीकर ओम बिरला से भी मिले थे। तब इन सांसदों ने अलग संसदीय समूह बनाने और शिंदे की शिवसेना को समर्थन देने संबंधी पत्र स्पीकर को सौंपा था। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) ने व्हिप के बावजूद 18 जून को हुई बैठक में नहीं आने वाले इन छह सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
Published on:
21 Jun 2026 05:59 pm
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