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मतदान के बीच चुनाव आयोग पहुंची RSS, मुंबई के दो प्रत्याशियों की उम्मीदवारी पर मंडराया संकट

RSS Election: मुंबई में दो उम्मीदवारों की उम्मीदवारी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वार्ड नंबर 118 और 122 से चुनाव लड़ रहे वैशाली जी और प्रशांत जी की उम्मीदवारी रद्द करने की मांग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने की है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jan 15, 2026

Mohan Bhagwat casts vote in Nagpur

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में वोट डाला (Photo: IANS)

महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में आज (15 जनवरी) मतदान हो रहा है। चुनाव प्रचार के आखिरी दिन राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन इस बीच मुंबई से आई एक बड़ी खबर ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है। आरोप है कि इन दोनों उम्मीदवारों ने खुद को संघ द्वारा समर्थित उम्मीदवार बताया था।

RSS ने की दो उम्मीदवारों की शिकायत

मुंबई में बीएमसी चुनाव (BMC Election) के प्रचार के अंतिम क्षणों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। संघ ने मुंबई के वार्ड नंबर 118 और 122 के दो उम्मीदवारों वैशाली जी और प्रशांत जी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और उनकी उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

आरएसएस का दावा है कि ये दोनों उम्मीदवार 'देश जनहित पार्टी' की ओर से चुनाव लड़ रहे हैं। आरोप है कि इन्होंने अपने चुनाव प्रचार के दौरान खुद को 'आरएसएस द्वारा प्रायोजित' उम्मीदवार बताया था। संघ ने इस पर सख्त आपत्ति जताते हुए कहा कि यह मतदाताओं को गुमराह करने और भ्रमित करने की साजिश है।

RSS ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक सांस्कृतिक संगठन है और यह किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्तिगत उम्मीदवार को प्रायोजित नहीं करता है। इस तरह का दुष्प्रचार मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए किया जा रहा है, जिस पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

आज मतदान, 16 जनवरी को नतीजे

मुंबई, ठाणे, पुणे, नागपुर, नासिक और जलगांव सहित राज्य की सभी महत्वपूर्ण महानगरपालिकाओं में सुबह साढ़े 7 बजे से वोटिंग चल रही है। मतदाता शाम 5:30 बजे तक अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते है। जबकि मतगणना 16 जनवरी को सुबह 10 बजे से होगी।

बता दें कि चुनाव प्रचार के आखिरी घंटों में ठाणे, पुणे, डोंबिवली, छत्रपति संभाजीनगर आदि शहरों में राजनीतिक संघर्ष चरम पर देखा गया। कई जगहों पर हिंसक झड़पों और पैसे बांटने के आरोपों ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह चुनाव सिर्फ नगर निकायों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के लिए सीधी प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। इस चुनाव के नतीजे यह तय करेंगे कि आने वाले समय में दोनों ठाकरे भाइयों की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी और उनकी सियासी पकड़ कितनी मजबूत रह पाएगी। खासकर मुंबई की जनता का फैसला उनके सियासी भविष्य के साथ-साथ उनके राजनीतिक कद पर गहरा असर डालेगा।