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Maharashtra: नहीं छिनेगा उद्धव ठाकरे गुट का ‘मशाल’ चुनाव चिन्ह, समता पार्टी की याचिका हुई खारिज

Uddhav Thackeray Shiv Sena News: दिल्ली हाईकोर्ट ने समता पार्टी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है। यानी अब आगामी अंधेरी पूर्व उपचुनाव में उद्धव ठाकरे की पार्टी (शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे) का चुनाव चिन्ह निर्वाचन आयोग द्वारा आवंटित की गई जलती मशाल ही रहेगी।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Oct 19, 2022

shiv sena Uddhav Thackeray News name

उद्धव गुट ने नए चुनाव चिन्ह और नाम के साथ पोस्टर जारी किया

केंद्रीय चुनाव आयोग ने मुंबई की अंधेरी पूर्व विधानसभा सीट उपचुनाव को लेकर शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट को नया नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। हालांकि उद्धव गुट को मिले चुनाव चिन्ह ‘मशाल’ पर जॉर्ज फर्नांडिस की समता पार्टी (Samata Party) ने सवाल खड़े किये और इसकी शिकायत भी की। साथ ही समता पार्टी ने चुनाव आयोग के ‘मशाल’ चिन्ह देने के फैसले को रद्द करवाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। लेकिन अब समता पार्टी को झटका लगा है।

मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट ने समता पार्टी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है। यानी अब आगामी अंधेरी पूर्व उपचुनाव में उद्धव ठाकरे की पार्टी (शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे) का चुनाव चिन्ह निर्वाचन आयोग द्वारा आवंटित की गई जलती मशाल ही रहेगी। यह भी पढ़े-Maharashtra: उद्धव ठाकरे की संपत्ति की जांच करें ईडी और सीबीआई, बॉम्बे हाईकोर्ट में PIL दाखिल, आज होगा फैसला

समता पार्टी की याचिका पर सुनवाई करते जस्टिस संजीव नरूला (Sanjeev Narula) ने देखा कि समता पार्टी ‘मशाल’ चिन्ह पर अपने किसी भी अधिकार साबित करने में विफल रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि 2004 में समता पार्टी की मान्यता समाप्त कर दी गई थी। समता पार्टी की स्थापना 1994 में जॉर्ज फर्नांडीस (George Fernandes) और नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने की थी।

गौरतलब है कि केंद्रीय चुनाव आयोग ने 3 नवंबर को अंधेरी उपचुनाव को देखते हुए शिवसेना के दोनों गुटों (उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे) को नया नाम और निशान आवंटित किया। उद्धव ठाकरे गुट को शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे और मशाल निशान मिला, वहीं एकनाथ शिंदे गुट को बालासाहेबांची शिवसेना और ढाल-तलवार निशान आवंटित किया गया। चुनाव आयोग के इस निर्णय के बाद ‘मशाल’ चुनाव चिन्ह पर समता पार्टी ने अपना दावा ठोका था। और सवाल उठाया कि जब उनकी पार्टी का ‘मशाल’ पहले से ही चुनाव चिन्ह है तो इसे उद्धव ठाकरे गुट को कैसे दिया जा सकता है। इससे एक नया विवाद पैदा हो गया था।