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सेन समाज : कुलदेवी नारायणीधाम के नाम पर एकजुट हो शुरू किया सेवायज्ञ

मेवाड़ से मुंबई तक सफर सेन समाज को अपेक्षित सम्मान दिलाना प्राथमिकता

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मुंबई

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Binod Pandey

Jul 05, 2019

patrika

सेन समाज : कुलदेवी नारायणीधाम के नाम पर एकजुट हो शुरू किया सेवायज्ञ

मुंबई. आज हम आपको ऐसे शख्स से मिलवाने जा रहे हैं, जो मुंबई में सेन समाज सेवा मंडल के 25 साल तक संस्थापक अध्यक्ष रहे हैं। वर्तमान में मंडल के संरक्षक है। जिनका नाम है रोशनलाल भैरूलाल सेन। इन्होंने समाज को काशीमीरा में जमीन खरीद कर समाज भवन बनाने के लिए दी। आज भी समाज के लोग इन्हें जमीनदाता कहते हैं। मंडल की ओर से हर साल आयोजित वार्षिक स्नेह सम्मेलन में सेन समाज के हुनर को समाज तक पहुंचाने व निखारने का सतत प्रयास किया जाता है। साथ ही संस्थाओं की ओर से सामूहिक विवाह, शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को भी सेन समाज सम्मानित करता है। सेन समाज को अपेक्षित सम्मान दिलाना ही हमारी प्राथमिकता है। चाहे वह राजनीतिक क्षेत्र हो या अन्य क्षेत्र, ताकि नाई सेन समाज की हिस्सेदारी हर क्षेत्रों में बढ़ सके इसके लिए हमारी मुहिम जारी है।


मेधावी छात्रों को सम्मानित कर शिक्षा पर जोर
रोशनलाल वर्मा ने बताया कि मुंबई में सेन समाज को शिखर पर पहुंचाने के लिए सेन समाज सेवा मंडल बखूबी जिम्मेदारी के साथ काम कर रहा है। समाज को जोडऩे के लिए सेन समाज मुंबई में विविध आयोजन करता है। सेन समाज को जोडऩे के लिए रोशनलाल सेन हमेशा तत्तर रहते हैं। सेन समाज का उद्देश्य है समाज व राष्ट्र के प्रति नैतिक जिम्मेदारी का बोध करवाना है, जिससे वे जागरूक एवं उत्तरदायी नागरिक बन सके। उन्होंने कहा कि जीवन में शिक्षा का महत्व है। शिक्षा के बिना सपने साकार नहीं हो सकते। इसके लिए सेन समाज के मेधावी बच्चों को हर साल सम्मानित किया जाता है, ताकि उनके हौसले में उड़ान आए।


अखिल भारतीय नारायणी धाम के राजसमंद जिले के अध्यक्ष हैं रोशनलाल
ग्राम सेमल नाथुद्वारा नारायणी माता मंदिर पर हुई सामाजिक बैठक में ग्राम मोलेला के रोशन लाल पुत्र भैरू लाल सेन को अखिल भारतीय नारायणी धाम का राजस्थान के राजसमंद जिले के अध्यक्ष हैं। 1980 की यह पुरानी संस्था है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सेन सरना ने अपनी कार्यकारिणी की सहमति से रोशनलाल सेन के अलावा भगवती प्रसाद सेन निवासी लोसिंग को महामंत्री, प्रभुलाल सेन कदमाल को कोषाध्यक्ष व जसवंत सेन थूर को जिला उपाध्यक्ष, व कमान सेमुल कागुड़ा को संरक्षक, महासभा के राष्ट्रीय महासचिव भगवान सहाय मीणा वाला, मीडिया प्रभारी शीशराम खासपुरिया की उपस्थिति में बनाया। भंवरलाल सेन, अध्यक्ष सेन समाज सेमल चोखला,कमल सैन सेमल उमेश सेन, पन्ना लाल, शंकर मदार, शंकरलाल मोलेला, चुन्नीलाल सेन समेत कैलाश, इंदर, चूनीलाल, भगवतीलाल, शंकरलाल, प्रेमचंद, किसनलाल, भवानीशंकर, भैरूलाल, दिनेश, मनीष, लक्ष्मी, विनोद, पन्नालाल, गणेश,शांतिलाल, राजेंद्र, रुपेश, हरीश, कमलेश आदि समाज से जुड़े हैं।


नारायणी धाम वार्षिक मेले में भक्तों का लगता है तांता
मान्यता है कि सेन समाज की कुलदेवी माता नारायणी का विवाह हुआ। पति के साथ वे अपने ससुराल जा रही थीं। जंगल में जब वे विश्राम कर रही थी, तभी अचानक एक सांप ने आकर उनके पति को डंस लिया और वे वहीं मर गये। नारायणी माता बिलख-बिलख कर रोने लगीं। शाम के समय कुछ ग्वाल अपनी गायों को लेकर वहां से गुजरे तो नारायणी माता ने उनसे उनके पति के दाह संस्कार के लिए चिता बनाने को कहा। मान्यता है कि उस समय सती प्रथा थी। इसीलिए अपने पति को साथ लेकर नारायणी माता भी उनके साथ चिता पर बैठ गईं। अचानक चिता में आग प्रज्वलित हो गई, जिसे ग्वालों ने चमत्कार मान नारायणी माता से प्रार्थना की कि- "हे माता! हम आपको देवी रूप मानकर आपसे कुछ मांगना चाहते हैं।" चिता से आवाज़ आई कि "जो मांगना है मांग लो।" उस समय अकाल पड़ा हुआ था। ग्वालों ने कहा कि- "हे माता! हमारे इस स्थान पर पानी की कमी है, जिससे हमारे जानवर मर रहे हैं। कृपा कर हम पर दया करें।" चिता से आवाज आई कि- "तुम में से एक व्यक्ति इस चिता से लकड़ी उठा कर भागो और पीछे मुड़कर मत देखना। जहां भी तुम पीछे मुड़कर देखोगे, पानी की धारा वहीं रुक जायेगी।" एक ग्वाला लकड़ी उठाकर भागा और भागते-भागते वह दो कोस के करीब पहुंच गया। उसके मन में शंका हुई कि कहीं देखूँ पानी आ रहा है या नहीं और जैसे ही उसने पीछे मुड़कर देखा पानी वहीं रुक गया। आज उसी चिता वाले स्थान पर कुण्ड बना दिया गया है और उस कुंड से धारा के रूप में पानी दो कोस दूर जाकर समाप्त हो जाता है, जो एक चमत्कार है। यहां हर वर्ष भाद्रपद सुदी 14 को रात्रि जागरण एवं पूर्णिमा को मेला लगता है एवं भण्डारा होता है। जिसमें बड़ी संख्या में दूर-दूर से भक्त आते हैं।