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शिर्डी के साईंबाबा मंदिर को 175 करोड़ के टैक्स भुगतान से क्यों मिली छूट? जानें नियम

Shirdi Sai Baba: शिरडी के श्री साईंबाबा मंदिर ट्रस्ट को पिछले तीन साल में लगाए गए 175 करोड़ रुपये के आयकर भुगतान से छूट दी गई है। अधिकारिक बयान के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह छूट दी गई है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Nov 26, 2022

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नए साल के स्वागत के लिए साईं नगरी शिरडी तैयार

शिरडी (Shirdi News) के साईं बाबा (Sai Baba) ट्रस्ट ने बड़ी क़ानूनी लड़ाई जीती है। शिरडी के श्री साईंबाबा मंदिर ट्रस्ट को पिछले तीन साल में लगाए गए 175 करोड़ रुपये के आयकर भुगतान से छूट दी गई है। अधिकारिक बयान के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह छूट दी गई है।

एक विज्ञप्ति के अनुसार, “वर्ष 2015-16 के कर का आकलन करते हुए इनकम टैक्स विभाग को पता चला कि श्री साईंबाबा संस्थान धार्मिक ट्रस्ट नहीं बल्कि एक धर्मार्थ ट्रस्ट है। इस आधार पर दान पेटी में प्राप्त दान पर 30 प्रतिशत इनकम टैक्स लगाते हुए 183 करोड़ रुपये का कर भुगतान नोटिस जारी किया गया।” यह भी पढ़े-पाकिस्तानी आतंकियों से लोहा लेने वाले वीरों को नमन! इजराइल बोला ‘हम भारत के साथ हैं’

इसके बाद ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की, जिसके बाद कोर्ट ने इस टैक्स के निर्धारण तक देय टैक्स पर रोक लगाने का आदेश पारित किया। इनकम टैक्स विभाग ने आखिरकार श्री साईंबाबा संस्थान को एक धार्मिक व धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में स्वीकार करते हुए दान पेटी में दान पर लगने वाले टैक्स से छूट देने का निर्णय लिया।

इनकम टैक्स विभाग के फैसले के तहत श्री साईंबाबा संस्थान को पिछले तीन वर्ष में लगाए गए 175 करोड़ रुपये के इनकम टैक्स से राहत मिल गई है।

जानें क्या कहता है इनकम टैक्स नियम?

धर्मार्थ तथा धार्मिक ट्रस्ट की इनकम कुछ शर्तों के अनुसार कर से छूट प्राप्त है। जो इस प्रकार है-

1) धारा 11- उस सीमा तक जहां ऐसी इनकम भारत में धर्मार्थ अथवा धार्मिक उद्देश्य के लिए लागू होती है, पूर्णता धर्मार्थ अथवा धार्मिक उद्देश्य के लिए ट्रस्ट के अंतर्गत धारित संपत्ति से व्युत्पन्न आय के लिए छूट उपलब्ध कराती है। हालांकि, यह छूट कुछ शर्तों के अनुसार दी जाएगी।

2) धारा 12- पूर्णता धर्मार्थ अथवा धार्मिक उद्देश्यों के लिए बनाए गए ट्रस्ट द्वारा अथवा पूर्णता ऐसे उद्देश्यों के लिए संस्थापित संस्थान द्वारा प्राप्त स्वैच्छिक अंशदान के रूप में इनकम टैक्स से भी छूट प्राप्त होगी, लेकिन कुछ शर्तों के अनुसार।

3) चुनिंदा ट्रस्ट द्वारा प्राप्त कोई स्वैच्छिक अंशदान उसकी कुल आय में शामिल नहीं होगी, लेकिन कुछ शर्तों के अनुसार।