
उद्धव ठाकरे ने CJI चंद्रचूड़ की टिप्पणी पर खुशी जताई
Uddhav Thackeray on CJI Chandrachud: महाराष्ट्र सत्ता संघर्ष मामले की बुधवार को प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एम आर शाह, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की संविधान पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। इस दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी द्वारा अपनाये गए रुख पर कटाक्ष किया।
सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, जब मानसून सत्र सिर पर था तो बहुमत परीक्षण के लिए सत्र आयोजित करने का मतलब सरकार को गिराने में हिस्सा लेना और वास्तव में पार्टी को तोड़ने में मदद करना था। सीजेआई ने कहा कि राज्यपाल को ऐसी हरकतों से दूर रहना चाहिए बल्कि राज्यपाल को अपनी सीमा में रहना चाहिए। सीजेआई की इस सख्त टिप्पणी पर खुशी जताते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें न्याय के भगवान पर भरोसा है। अब सुप्रीम कोर्ट ही उम्मीद की आखिरी किरण बची है। यह भी पढ़े-उद्धव ठाकरे को 24 घंटे के अंदर दूसरा बड़ा झटका, शिंदे गुट में शामिल हुए पूर्व मंत्री दीपक सावंत
महाविकास अघाड़ी (MVA) की बैठक के बाद उद्धव ठाकरे ने एमवीए नेताओं-कार्यकर्ताओं-पदाधिकारियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बीजेपी और शिंदे के साथ गए विधायकों पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “मैंने जो घर बैठे किया है, वह सूरत-गुवाहाटी-दिल्ली जाकर भी नहीं कर सकते है।” ठाकरे ने कहा कि आज उनकी स्थिति या तो जेल जाने की है या फिर बीजेपी में शामिल होने की है।
उद्धव ठाकरे ने कहा, “...कहा जाता है कि महाराष्ट्र देश को दिशा दिखाता है। वह समय आज आ गया है। यह लड़ाई केवल शिवसेना की नहीं है, यह हम सबकी लड़ाई है। मुझे न्याय देवता पर विश्वास है। न्याय के देवता लोकतंत्र का वस्त्र हरण नहीं होने देंगे। अभी सुप्रीम कोर्ट ही उम्मीद का एकमात्र किरण है। क्योंकि लोकतंत्र के तीन स्तंभों का क्या हाल है। यह हम सब देख रहे हैं।
ठाकरे ने कहा कि पत्रकारों के हाथ में ‘कलम’ होना चाहिए, अब उनके हाथ में ‘कमल’ है। बीजेपी अब मोदी को देश के रूप में परिभाषित करने की कोशिश कर रही है। फिर भारत माता की जय क्यों कहते हो? मोदी जिंदाबाद कहो न....”
एकनाथ शिंदे पर बोला हमला
उद्धव ठाकरे ने कटाक्ष करते हुए कहा, "दरवाजा खुला है, जो सोचते हैं कि उन्हें रहना चाहिए वह रहे और बाकी गेट आऊट हो जाएं... मुझे बिके हुए लोग नहीं चाहिए। मैं लड़ने वाले लोग चाहता हूँ। इस आदमी (एकनाथ शिंदे) ने नाटक किया था। भाजपा के अन्याय को मैं खुली आंखों से नहीं देख सकता हूँ। यह कहकर उसने कल्याण की सभा में त्यागपत्र देने की बात कही थी। तो अब क्या हुआ? उस अन्याय को खुली आंखों से नहीं देख सका इसलिए आंखें बंद करके भाजपा में चले गया क्या?"
Published on:
15 Mar 2023 08:02 pm
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