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मराठी बोलने को लेकर शिंदे गुट में फूट, संजय निरुपम ने अपनी ही सरकार के फैसले को बताया ‘ज्यादती’

Auto Taxi Driver Marathi Rule: महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी अनिवार्य। संजय निरुपम ने किया विरोध, अमित ठाकरे ने दी चेतावनी। 4 मई से चक्का जाम की धमकी।
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मुंबई

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Imran Ansari

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Updated: 24 Apr 2026, 3:32 PM IST

Auto Taxi Driver Marathi Rule

संजय निरुपम ने अपनी ही सरकार के फैसले को बताया 'ज्यादती'

Maharashtra Marathi Language Mandatory: महाराष्ट्र की राजनीति में 'मराठी कार्ड' एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। एकनाथ शिंदे सरकार ने राज्य में ऑटो, टैक्सी और कैब (Ola-Uber) चालकों के लिए मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान अनिवार्य कर दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद 1 मई से सख्ती शुरू होने वाली है, लेकिन इससे पहले ही बयानों के तीखे तीर चलने लगे हैं।

क्या है नया नियम और 1 मई की डेडलाइन?

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले के तहत, महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 में बदलाव किया गया है। अब 1 मई से आरटीओ (RTO) अधिकारी सड़कों पर उतरकर ड्राइवरों की मराठी जांचेंगे। सरकार का तर्क है कि ड्राइवरों को कम से कम इतनी मराठी आनी चाहिए कि वे यात्रियों से संवाद कर सकें। जो ड्राइवर बेसिक मराठी नहीं बोल पाएंगे, उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

'जबरदस्ती थोपना गलत'

हैरानी की बात यह है कि सरकार के इस फैसले के खिलाफ सबसे मुखर आवाज सत्ता पक्ष के करीबी नेता संजय निरुपम ने उठाई है। उन्होंने इसे 'ज्यादती' करार देते हुए कहा, 'मराठी का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन ड्राइवरों पर इसे थोपना और उनमें डर पैदा करना अन्याय है।' निरुपम ने चेतावनी दी है कि अगर यह आदेश वापस नहीं लिया गया, तो वे ड्राइवरों के समर्थन में सड़क पर उतरेंगे।

'सड़क पर पीटेंगे'

विवाद उस समय और गहरा गया जब राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे ने बेहद सख्त बयान दिया। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि यदि आंदोलन के दौरान मराठी मानुस को कोई परेशानी हुई, तो वे 'सड़क पर पीटेंगे'। इस बयान के बाद सियासत गरमा गई है और विपक्ष ने इसे कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बताया है।

4 मई से हड़ताल की आहट

ड्राइवर यूनियनों ने इस फैसले को उनकी रोजी-रोटी पर हमला बताया है। यूनियनों का कहना है कि मुंबई और आसपास के इलाकों में हजारों ड्राइवर दूसरे राज्यों से हैं, जो तुरंत मराठी नहीं सीख सकते। इसके विरोध में यूनियनों ने 4 मई से बेमियादी हड़ताल पर जाने की धमकी दी है।

28 अप्रैल को निर्णायक बैठक

बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकार ने 28 अप्रैल को एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। इसमें ट्रांसपोर्ट यूनियनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है ताकि बीच का रास्ता निकाला जा सके। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।