
पंढरपुर एसिड अटैक मामले में चौंकाने वाला खुलासा (प्रतीकात्मक फोटो)
महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने एक 35 वर्षीय व्यक्ति को नाबालिग लड़की का बार-बार यौन उत्पीड़न करने का दोषी पाया है। कल्याण स्थित अदालत के विशेष न्यायाधीश वी. ए. पत्रावले ने दोषी धोंडीराम तुकाराम बांसोडे को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बच्चों के खिलाफ होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती।
सजा सुनाते समय न्यायाधीश पत्रावले ने एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यौन अपराधों के मामलों में पीड़िता की गवाही का विशेष महत्व होता है। यदि पीड़िता का बयान विश्वसनीय है, तो सहायक साक्ष्यों के अभाव में भी केवल उसकी गवाही के आधार पर दोषी को सजा दी जा सकती है। कोर्ट ने माना कि इस मामले में बच्ची का बयान पूरी तरह विश्वास पैदा करने वाला था। हालांकि दोषी के खिलाफ आरोप सिद्ध करने के लिए कोर्ट में 12 गवाहों को पेश किया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला साल 2016 का है। दोषी धोंडीराम बांसोडे पीड़िता का पड़ोसी था। उसने पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली मासूम छात्रा को अपनी हवस का शिकार बनाया और लंबे समय तक उसका यौन उत्पीड़न करता रहा। जब 2016 में बच्ची के परिवार वालों को इस घिनौनी करतूत का पता चला, तब पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कोर्ट में तर्क दिया कि यह मामला दो परिवारों के बीच विवाद के कारण दर्ज कराया गया है और एफआईआर में 3 दिन की देरी हुई है। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की इस बात को स्वीकार किया कि सामाजिक डर और लोक-लाज के कारण माता-पिता ने शिकायत करने में थोड़ा समय लिया।
जेल की सजा के साथ ही दोषी पर 12,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। साथ ही, न्यायाधीश ने आदेश दिया कि पीड़िता सरकारी मुआवजा योजना के तहत आर्थिक मदद की हकदार है।
Updated on:
11 Feb 2026 05:14 pm
Published on:
11 Feb 2026 05:14 pm
