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mass transportation : नवी मुंबई परिवहन सेवा लडख़ड़ाने के कगार पर

बेस्ट बस के किराए में कटौती के बाद लग सकता है झटका

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मुंबई

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Binod Pandey

Jul 03, 2019

patrika mum

mass transportation : नवी मुंबई परिवहन सेवा लडख़ड़ाने के कगार पर

रमाकांत पांडेय
नवी मुंबई. नवी मुंबई महानगर पालिका के अनुदान पर चल रही नवी मुंबई परिवहन सेवा अब और भी लडख़ड़ाने की कगार पर है, चूंकि पहले से ही घाटे में चल रही परिवहन विभाग की एनएमएमटी बस को अब और भी आर्थिक संकट से जूझना पड़ सकता है। क्योंकि बीएमसी की बेस्ट बस के किराए में कटौती किए जाने के प्रस्ताव को समिति ने मंजूरी दे दी है। इसलिए नवी मुंबई परिवहन विभाग को भारी वित्तीय नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। मुंबई व नवी मुंबई की सड़कों पर दौडऩे वाली बेस्ट एवं एनएमएमटी बस के टिकट दरों के बीच भारी विसंगति होगी। ऐसे में एनएमएमटी की बसों को छोड़कर यात्री बेस्ट बस की तरफ अपना रुख कर सकते हैं। फिलहाल बेस्ट का यह प्रस्ताव अमल में आने तक अभी वक्त लगेगा, लेकिन बेस्ट की तरफ से जिस दिन यह नियम लागू हो जाएगा उसके बाद नवी मुंबई परिवहन विभाग भी इस पर विचार करेगा। वैसे भी नवी मुंबई परिवहन उपक्रम के पास 82 वातानुकूलित बसें हैं और इन बसों पर इसका कोई इफेक्ट नही पडऩे वाला है। क्योंकि बेस्ट के पास वातानुकूलित बस नही है। बेस्ट बस की सेवाओं से जब यात्री विमुख होने लगे, तो इसका खामियाजा मुंबई परिवहन विभाग को तो सहना ही पड़ेगा।
पहले 40 लाख और अब मात्र 21 लाख यात्री करते हैं सफर
प्रतिदिन बेस्ट बस में 40 लाख यात्री सफर करते थे, लेकिन वर्तमान में यात्रियों की संख्या घटकर 21 लाख तक पहुंच गई है। इसलिए यात्रियों को आकर्षित करने एवं उत्पन्न बढ़ाने के उद्देश्य से बेस्ट परिवहन सेवा किराए में कटौती करने का प्रस्ताव तैयार किया और इस प्रस्ताव को बेस्ट समिति की तरफ से मंजूरी भी दे दी गई है। साधारण बस का किराया कम से कम पांच रुपए और अधिकतम 20 रुपए तक करने का निर्णय लिया गया है, वहीं वातानुकूलित बस का किराया 6 रुपए से लेकर अधिकतम किराया 25 रुपए तक होगा। जबकि इससे पहले साधारण बस का किराया आठ रुपए और अधिकतम 50 रुपए था। वहीं वातानुकूलित बस की न्यूनतम किराया 15 रुपए से लेकर अधिकतम 130 रुपए तक था। हालांकि बेस्ट की इस योजना से नवी मुंबई परिवहन विभाग के लिए यह एक बड़ा वित्तीय झटका साबित होगा। वर्तमान में बेस्ट बस की नवी मुंबई में 18 मार्ग है, और बेस्ट की बसें नवी मुंबई महानगर पालिका क्षेत्र के अलावा कलंबोली तक सेवा दे रही है।
प्रतिदिन 11 लाख का फायदा
मुंबई में बोरिवली, मंत्रालय, बांद्रा, अंधेरी, मुलुंड व ताड़देव मार्ग से एनएमएमटी को प्रतिदिन 11 लाख रुपए का फायदा हो रहा है। जिसमें वातानुकूलित बस को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है और प्रतिदिन लगभग 8 लाख रुपए तक की कमाई हो रही है। एनएमएमटी की बसों से प्रतिदिन तकरीबन 20 हजार यात्री सफर कर रहे हैं। जबकि बेस्ट का मार्ग अधिक होने के बावजूद भी यात्रियों के लाले पड़ गए हैं। जब यात्रियों की संख्या घट गई है तो बेस्ट की आय भी घटकर लगभग 14 लाख रुपए के आसपास तक पहुंच गई है। एनएमएमटी की वातानुकूलित बस को अच्छी प्रतिक्रिया इसलिए मिल रही है। क्योंकि बेस्ट के एसी बसों को बंद कर दिया गया है, लेकिन बेस्ट बस के किराए में कटौती किए जाने के बाद एनएमएमटी और बेस्ट बस के किराए में एक बड़ा अंतर देखने को मिलेगा और ऐसा होने पर सबसे ज्यादा असर एनएमएमटी की साधारण बस सेवा के यात्रियों की संख्या पर पडऩे की संभावना है। बेस्ट की वातानुकूलित बस का किराया अधिकतम 25 रुपए व एनएमएमटी बस का किराया 115 रुपए होगा। हालांकि बेस्ट की वातानुकूलित सेवा बंद है जिसे बेस्ट प्रशासन ने आने वाले दिनों में इन बसों को किराए पर लेने का फैसला लिया है, और अगर ऐसा हुआ तो इसका विपरीत परिणाम एनएमएमटी पर साफ दिखाई दे रहा है। एनएमएमटी को सबसे अधिक उत्पन्न देने वाला मार्ग क्रमांक-9 घनसोली से वाशी रेलवे स्टेशन है, इस रूट पर 13 रुपए किराया है, जबकि बेस्ट इस मार्ग पर सिर्फ दस रुपए किराया लेगा। यही स्थिति लगभग नवी मुंबई के अन्य मार्गों पर होने वाली है।
बेस्ट और एनएमएमटी बस के किराए में अंतर
एनएमएमटी बस का न्यूनतम किराया 7 रुपए बेस्ट बस का किराया 5 रुपए होगा
एनएमएमटी का अधिकतम किराया 42 रुपए होगा, जबकि बेस्ट का किराया सिर्फ 20 रुपए होगा।
वातानुकूलित बसों में बेस्ट का किराया 25 रुपए तो एनएमएमटी का किराया 115 रुपए होगा।
एनएमएमटी की वर्तमान स्थिति कुछ इस प्रकार है
एनएमएमटी के पास कुल 476 बसें हैं, जिसमें 394 साधारण बस एवं 82 वॉल्वो की वातानुकूलित बसें शामिल हैं। इसमे से 130 बसें सीएनजी से चलाई जाती है तो बाकी के बस डीजल से चलती हैं। डीजल की कीमत 78 से 79 रुपए पहुंचने पर ईंधन के रूप में एनएमएमटी का खर्च 42 करोड़ रुपए हो गई है। इसलिए 13 करोड़ रुपए का बजट ब?ने के कारण परिवहन विभाग आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है।