
उद्धव ठाकरे (Photo: IANS/File)
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (UBT) सांसदों की बगावत के बाद शुरू हुआ घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऑपरेशन टाइगर के तहत उद्धव गुट के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के बाद से शिवसेना (यूबीटी) कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। इसी कड़ी में नांदेड़ पहुंचे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के काफिले को उद्धव गुट के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को काले झंडे दिखाए, जिस पर उद्धव ठाकरे ने अपने शिवसैनिकों की पीठ थपथपाई। इस वजह से महाराष्ट्र का सियासी पारा और चढ़ गया है। दरअसल श्रीकांत शिंदे पाला बलदने वाले नांदेड़ से सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर के निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे थे। विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने कई शिवसैनिकों (उद्धव गुट) को हिरासत में ले लिया।
काले झंडे दिखाए जाने और पुलिस कार्रवाई की खबर मिलते ही शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे तुरंत एक्शन में आए। उन्होंने नांदेड़ के ग्रामीण जिला प्रमुख ज्योतिबा खराटे को सीधे फोन लगाया। उन्होंने हिरासत में लिए गए शिवसैनिकों की जानकारी ली और उनके साहस की सराहना की। ठाकरे ने कहा, "जब तक आप जैसे शिवसैनिक हमारे साथ हैं, तब तक शिवसेना को कोई खतरा नहीं है। किसी भी तरह की परेशानी होने पर मुझे जरूर बताइये।" उनके इस फोन कॉल से कार्यकर्ताओं में नया उत्साह देखने को मिला। शिवसैनिकों ने भी आजीवन उनके साथ रहने का भरोसा जताया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, बातचीत के दौरान उद्धव ठाकरे ने यह भी कहा कि वह अगली बार किनवट दौरे पर आएंगे।
नांदेड़ दौरे के दौरान सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि "जो भी एकनाथ शिंदे साहब के साथ जुड़ा, वह आगे बढ़ा। 40 विधायक बढ़कर 60 हुए और 6 सांसद बढ़कर 13 हो गए। उन्होंने आगे कहा कि "शिंदे सरकार ने किसानों और लाडकी बहिन योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं पर काम किया, जबकि उद्धव ठाकरे ढाई साल तक घर में बैठे रहे। लोगों को कुछ नहीं मिला, इसलिए वह उन्हें छोड़कर जा रहे हैं। उन्हें आत्मचिंतन करना चाहिए। हम घर बैठकर सिर्फ दावे नहीं करते, बल्कि जनता के बीच जाकर काम करते हैं।"
हाल ही में उद्धव ठाकरे के 9 में से छह लोक सभा सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मची हुई है। एक ओर उद्धव ठाकरे पार्टी छोड़ने वाले नेताओं के निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर उन पर हमलावर हैं, तो दूसरी ओर शिंदे अपने खेमे में आये सांसदों के समर्थन में लगातार दौरे कर रहा है। ऐसे में नांदेड़ का यह विरोध प्रदर्शन दोनों गुटों के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव का नया अध्याय माना जा रहा है।
Updated on:
02 Jul 2026 08:57 am
Published on:
02 Jul 2026 08:57 am
