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मुंबई की 2 मांओं का कमाल: कचरे के नींबू के छिलकों से खड़ा कर दिया Urthy ब्रांड, अब बिना केमिकल चमका रही हैं लोगों के घर!

Urthy bioenzyme Mumbai: कहानी मुंबई की दो मांओं- सोनिया और फरहीन की है, जिन्होंने अपने घर की छत से बायोएंजाइम बनाना शुरू किया था।

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मुंबई

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Pooja Gite

May 28, 2026

Urthy bioenzyme Mumbai

photo (instagram urthy)

Sonia and Farheen Urthy:मुंबई की एक सोसायटी में रहने वाली दो मांओ और सहेलियां सोनिया और फरहीन, जिन्होंने अपने घर की छत का इस्तेमाल बहुत ही बेहतरीन तरीके से किया है। छत पर दो बड़े-बड़े प्लास्टिक के ड्रम रखे हुए हैं। जिनमें नींबू के छिलके, गुड़ के साथ पानी भरकर रखा हुआ है। पास ही में बच्चे भी मस्ती कर रहे हैं और दोनों सहेलियां सोनिया वर्मा और फरहीन अली हंसते-मुस्कुराते हुए इस मिक्चर को परख रही हैं। खास बात ये है कि यह कोई साधारण-सा मिक्चर नहीं है। यह एक खास जादुई नेचुरल लिक्विड है, जिसे बायोएंजाइम कहते हैं। जिसमें किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल नहीं हैं, सिर्फ फरमेंट करके इस लिक्विड को घर पर ही तैयार किया जाता है। जो घर के जिद्दी से भी जिद्दी दाग, गंदगी, चिकनाई को आसानी से साफ कर देता है।

2 मांओं की एक जैसी चिंता से हुई शुरुआत

सोनिया और फरहीन ने सबसे पहले जूस की दुकानों पर जाकर इस्तेमाल हो चुके नींबू के छिलकों को इकट्ठा किया और फिर यहां से शुरू हुई इनके घरेलू एक्सपेरिमेंट वाले जादुई लिक्विड बनाने की शुरुआत, जो कि आज Urthy नाम का एक बेहतरीन इको-फ्रेंडली ब्रांड बन चुका है। चौंकाने वाली बात ये है कि Urthy की शुरुआत किसी भी चमचमाती लैब या बड़े बिजनेस विचार से नहीं हुई है बल्कि दो मांओ की मामूली सी बातचीत और प्लानिंग के जरिए शुरू किया गया। फरहीन जिन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और अपने बच्चे के जन्म के बाद सेे ही अपनी लाइफस्टाइल को प्राकृतिक तरीके से जीना शुरू कर दिया था। वहीं दूसरी तरफ सोनिया, जो पहले अपने घर के व्यापार में पूरी तरह व्यस्त रहती थीं, लेकिन मां बनने के बाद उनका भी सोचने का तरीका बदला और कुछ नया करने का विचार जागा। इन दोनों सहेलियों की मुलाकात मुंबई में होमस्कूलिंग कम्युनिटी में हुई। जब दोनों को पता चला कि वे सालों से अपने-अपने घरों में अकेले ही यह नेचुरल क्लीनर बना रही हैं, तो उन्होंने इसे दुनिया तक पहुंचाने का फैसला किया।

छत के ड्रमों से फैक्ट्री तक की पूरी कहानी

सोनिया बताती हैं कि पहले हमारे पास कोई जगह नहीं थी, फिर एक दिन फरहीन ने अपने घर की छत से काम शुरू करने का आईडिया दिया और छत पर ड्रम रखने की जगह दी। बस फिर पहले सिर्फ 50-50 लीटर के दो ड्रमों को छत पर रखा। कुछ समय बीत जाने के बाद लोगों को इनका काम पसंद आने लगा। आज के समय में सोनिया की फैक्ट्री वाले स्पेस में 40 से भी ज्यादा बड़े ड्रमों में यह लिक्विड क्लीनर बनाया जा रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए नींबू के छिलके सड़क किनारे जूस बेचने वालों से मुफ्त या सस्ते में मिल जाते हैं, जिससे कचरा भी कम होता है।

आखिर ये काम होता कैसे है?

लिक्विड को बनाने के लिए नींबू के छिलके, गुड़ और पानी को एक एयरटाइट हवाबंद डिब्बे में बंद करके तीन महीने के लिए छोड़ दिया जाता है। जब तीन महीने पूरे हो जाते हैं तो इस लिक्विड को छानकर बाहर निकालते हैं, तैयार नेचुरल क्लिनर में बहुत सारे अच्छे बैक्टीरिया और एंजाइम्स पनप चुके होते हैं। ये एंजाइम्स घर के फर्श, बर्तनों और कपड़ों की गंदगी को एक दम चकाचक तरीके से साफ कर लेते हैं। यह लिक्विड इतना असरदार है कि 1 लीटर के गाढ़े लिक्विड घोल में पानी मिलाकर आप आसानी से 10 लीटर लिक्विड क्लीनर तैयार कर सकते हैं। वैज्ञानिकों और फाउंडर्स के मुताबिक, यह लिक्विड क्लीनर पानी के प्रदूषण को रोकने के साथ ही मिट्टी को भी उपजाऊ बनाने में मदद करता है। साथ ही मिट्टी की शक्ति को 30% तक बढ़ा देता है।

तालाब और नदियां भी साफ रहती हैं

बाजार में मिलने वाले केमिकल मिक्स फिनाइल, बाथरूम साफ करने वाले क्लीनर जब बहकर नाली, नदियों और तालाब में मिलते हैं तो ये साफ पानी को भी खराब और जहरीला बना देते हैं। लेकिन Urthy के बायोएंजाइम का असर बिल्कुल उल्टा है। जब पोंछा लगाने या कपड़े धोने के बाद इसका पानी नाली में जाता है, तो यह नाली की गंदगी और तेल को भी साफ करता रहता है। यानी यह आपके घर के साथ-साथ हमारे वाटर सिस्टम को भी साफ करता है।

200 से ज्यादा परिवार की पसंद बना Urthy

पिछले 4 सालों में इन दोनों मांओ ने एक साथ कदम बढ़ाकर 1500 किलोग्राम से भी ज्यादा नींबू के कचरे को सड़ने-गलने से बचाकर सही इस्तेमाल करके नेचुरल क्लिनर में बदल दिया। आज ये 200 से भी ज्यादा परिवार को जोड़ चुके हैं जो पूरी तरह से केमिकल-फ्री सफाई चाहते हैं। भुवनेश्वर की रहने वाली रुचि बताती हैं, पहले मुझे डर लगता था कि कपड़ों का केमिकल वाला पानी जमीन में जाकर मिट्टी खराब कर रहा है, लेकिन अब मेरे दिमाग को काफी सुकून है। वहीं पुणे की आशिता कहती हैं, घर पर बच्चे पूरे दिन फर्श पर खेलते रहते हैं। केमिकल वाले क्लीनर को लेकर डर बना रहता था, लेकिन अब मैं बिल्कुल परेशान नहीं होती।

छोटी आदत, बड़ा बदलाव

Urthy में आज फ्लोर क्लीनर, डिशवॉश, टॉयलेट क्लीनर और कपड़ों के लिक्विड समेत 15 से ज्यादा प्रोडक्ट्स बनने लगे हैं। अब इन्होंने होटलों के साथ ही कई बड़ी-बड़ी जगहों पर सप्लाई शुरू कर दिया है। सोनिया और फरहीन का कहना कि पर्यावरण बहुत बड़ा है, इसको अकेले सही करना मुमकिन नहीं है, लेकिन सब मिलकर अपने घर के केमिकल वाले क्लीनर को बदल दें और इसकी बजाय नेचुरल क्लीनर को अपना ले, तो धरती अपने आप सुरक्षित हो जाएगी।