
29 साल के व्यक्ति के पेट से निकाला गया गर्भाशय
मुंबई. सरकार संचालित जेजे हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल ऑपरेशन किया है। 29 साल के व्यक्ति के पेट में गर्भाशय था, जिसे सर्जरी के माध्यम से डॉक्टरों ने निकाल दिया। हालांकि यह व्यक्ति दूसरी तरह की समस्या का उपचार करवा रहा था। अस्पताल में जांच कराई गई तो डॉक्टरों को पता चला कि उसके पेट में गर्भाशय है। इसके बाद माइक्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए उस व्यक्ति के पेट से गर्भाशय काट कर बाहर निकाला गया।
जेजे हॉस्पिटल के यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. डॉ. व्यकंट गीते और उनकी टीम ने यह जटिल ऑपरेशन किया। डॉक्टर गीते ने बताया कि सोनोग्राफी में पता चला कि उसके पेट में महिलाओं जैसा ही गर्भाशय है। ऐसे मामलों में अंडाशय में कैंसर होने की 20 प्रतिशत संभावना होती है। इसलिए इस व्यक्ति के पेट से गर्भाशय को हटाया गया। इसके बाद उसका दूसरा ऑपरेशन किया गया। ने सोनोग्राफी, एमआरआई से कुछ दिन पहले अपने गर्भाशय को हटा दिया। फिर 26 जून को उस व्यक्ति का एक और ऑपरेशन किया गया, जिसमें इसके अंडाशय को अंडकोष में स्थ?
?नांतरित कर दिया गया है। यह जानकारी जेजे अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. डॉ. व्यकंट गिते ने दी।
...लेकिन नहीं मिले शुक्राणु
विदित हो कि जिस व्यक्ति के पेट में अंडाशय था जबकि वह अंडकोष तक नहीं बढ़ा वही व्यक्ति का ***** भी स्थित था, लेकिन वीर्य की जांच में शुक्राणु नहीं मिले। वहीं इस सर्जरी के दौरान महिलाओं में पाए जाने वाले गर्भाशय के अंगों को इस व्यक्ति के अंडाशय के साथ पाया गया। इसलिए इस व्यक्ति के हार्मोनल, सेस्कॉन, एमआरआई और बायोप्सी की जांच की गई। इन परीक्षणों में गर्भाशय अंगों के साथ 6 सेमी से अधिक ब??
? पाया गया।
बहुत मुश्किल होती है सर्जरी...
उल्लेखनीय है कि पुरुषों में गर्भाशय को 'प्राइमरी मुल्येरीयन डक्ट सिंड्रोम-फिमेल कहा जाता है। इसके बाद रोगी के अंडाशय को अंडकोश में ले जाया गया। इस तरह की सर्जरी को बहुत मुश्किल माना जाता है। दुनिया में इस तरह के केवल 200 मामले हैं। ऐसे रोगियों को कैंसर होने की संभावना रहती है। इसलिए ऐसे मरीजों की काउंसलिंग और सर्जरी से जीवन मे आने वाले खतरे से मुक्त किया जा सकता है। ऐसे रोगियों को एक अभिसरण सर्जरी से गुजरना पड़ सकता है, लेकिन यह भी कहा जाता है कि गर्भाशय प्रत्यारोपण और पेट की गर्भावस्था के लिए यह मुश्किल भी है। इस तरह से ऑपरेशन से अब तक केवल दो रोगियों मे ये परिक्षण सफल साबित किया जा सका है।
Published on:
08 Jul 2019 02:08 pm
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