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Maha NMIMS: जल ही जीवन है, वातावरण का रखें ध्यान : पोपटराव पवार

एनएमआईएमएस ( NMIMS ) स्कूल आफ बिजनेस मैनेजमेंट ( Business Management ) में कार्यशाला का आयोजन, ग्राउंड वॉटर रिचार्ज ( Ground Water Recharge ) काफी लाभदायक

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Maha NMIMS: जल ही जीवन है, वातावरण का रखें ध्यान : पोपटराव पवार

Maha NMIMS: जल ही जीवन है, वातावरण का रखें ध्यान : पोपटराव पवार

मुंबई. पद्मश्री विजेता पोपटराव पवार खबर ने कहा कि जल ही जीवन है, जबकि आज के समय में पानी की बेहताशा बर्बादी हो रही है। समय रहते अगर हम अपने जीवन को ही सुरक्षित नहीं कर सकते तो शिक्षित होने की क्या जरूरत। वातावरण पर जोर देते हुए वे अपने गांव की याद करते हुए आगे कहते हैं कि गांव में पहले बारिश बहुत कम होती थी और हर तरफ सूखा पड़ा होता था। साल के अंत तक आते-आते गांव में पानी बिल्कुल खत्म हो जाता था, जबकि इसके लिए ग्राउंड वॉटर रिचार्ज काफी लाभदायक साबित होता है। ये उद्गार पद्मश्री विजेता ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में व्यक्त किए।

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एक प्रयास 2020 पर परिचर्चा...
मुंबई के विले पार्ले पश्चिम स्थित एनएमआईएमएस स्कूल आफ बिजनेस मैनेजमेंट ने सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फोरम और वातावरण के सहयोग से मुकेश पटेल आडिटोरियम में एक प्रयास 2020 के अंतर्गत एक परिचर्चा रविवार को आयोजित की गई। इस परिचर्चा में पद्मश्री विजेता पोपटराव पवार, माधवी गोखले, राजन सक्सेना समेत स्वायत्त यूनिवर्सिटी के डीन प्रो. डॉ. रमेश भट्ट और प्रो. डॉ. प्रदीप पई मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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पानी की हो रही बर्बादी...
इस मौके पर पद्मश्री विजेता पोपटराव पवार खबर ने कहा कि जल ही जीवन है, जबकि आज के समय में पानी की बेहताशा बर्बादी हो रही है। समय रहते अगर हम अपने जीवन को ही सुरक्षित नहीं कर सकते तो शिक्षित होने की क्या जरूरत। वातावरण पर जोर देते हुए वे अपने गांव की याद करते हुए आगे कहते हैं कि गांव में पहले बारिश बहुत कम होती थी और हर तरफ सूखा पड़ा होता था। साल के अंत तक आते-आते गांव में पानी बिल्कुल खत्म हो जाता था, जबकि इसके लिए ग्राउंड वॉटर रिचार्ज काफी लाभदायक साबित होता है।

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बगैर एजुकेशन के डेवलपमेंट नहीं...
महाराष्ट्र के अहमदनगर के हिवरे बाजार के पूर्व सरपंच पोपटराव ने बताया कि बगैर एजुकेशन के डेवलपमेंट के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता, जबकि शिक्षा की सही दिशा से विकास स्वत: होता चला जाता है। उनका कहना है कि वे महात्मा गांधी की सोच 'चलो गांव की ओर' से काफी प्रेरित होकर पर्यावरण के काम में बिजी हो गए।

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एक किग्रा. चावल में खर्च होता है 3400 लीटर पानी...
वहीं एनएमआईएमएस स्वायत्त यूनिवर्सिटी के डीन प्रो. डॉ. रमेश भट्ट ने बताया कि छात्रों के बीच इस तरह की परिचर्चाओं से फायदा होता है, जबकि यह आयोजन समाज और अर्थ व्यवस्था के संयोजन में भी काफी मायने रखता है। भविष्य में छात्र जब नौकरियों के लिए जाएंगे तो उन्हें बेहतर मौका मिलेगा। भविष्य में आने वाली पानी की समस्या पर हम आज से ही चर्चा शुरू कर रहे हैं। उन्होंने पानी के महत्व को समझाते हुए कहा कि एक कप कॉफी के लिए चार गैलेन पानी खर्च होता है, जबकि एक किग्रा. चावल के लिए शुरू से आखिर तक तीन हजार 400 लीटर पानी खर्च हो जाता है।

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