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mumbai में राजस्थान की संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रही महिलाएं

18 से 80 साल तक की महिलाएं सभी वर्ग की महिलाओं को बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरणा दे रही हैं   महिलाओं केे हुनर को निखारने के लिए नृत्य प्रतिस्पर्धा, गायन,वादन, पाक, खेलकूद, आमेट गॉट टैलेंट, व्यापार कौशल योजना जैसे कई स्पर्धाओं का आयोजन किया जाता है

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मुंबई

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Binod Pandey

Jun 27, 2019

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mumbai में राजस्थान की संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रही महिलाएं

अविनाश पाण्डेय
मुंबई. कहते हैं मानवता ही मानव का सबसे बड़ा धर्म है। इस कथन को महानगर में राजस्थान के जिला राजसमंद,आमेट क्षेत्र की महिलाएं यथार्थ सत्य कर रही हैं, जो कि आमेट महिला मंडल मुंबई के बैनर तले शांति संस्कृति और आध्यात्म के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। आज हम आपको ऐसी ही आमेट महिलाओं से सरोकार कराने जा रहे हैं, जो विभिन्न जैन समाज के होने के बावजूद कि न सिर्फ अपने समाज और आध्यात्म के लिए सराहनीय कार्य कर रहे हंै। अपितु बच्चों अभिवावकों व नवविवाहित जोड़ों को राजस्थानी संस्कृति को जीवंत रखने के गुर सीखा रही हैं। महानगर में सन 1994 में ललिता उत्तम लोढा की अध्यक्षता में पहली बार आमेट महिला मंडल की स्थापना हुई थी। पिछले 25 वर्ष से मंडल अपने संस्कारी और शांतप्रिय संदेश को विश्व पटल पर पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। जिनके माध्यम से महिलाएं बच्चों को एकता, त्याग, सुसंस्कृत, सद्भावना के भाव और समानता व नशामुक्ति का पाठ पढ़ा भविष्य उज्ज्वल कर रही है।

800 महिलाएं समाज को बना रही संस्कारी
मण्डल में लगभग 800 महिलाओं ने सहभागिता लेकर 18 से 80 साल तक की महिलाएं सभी वर्ग की महिलाओं को बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरणा दे रही हैं। मंडल की 100 कार्यकारिणी महिला सदस्य इन सभी प्रेरणास्रोत आयोजनों को अपने देख रेख में कर रही हैं।


महिलाओं के हुनर को निखारने के लिए कई कार्यक्रम
आमेट मंडल महिलाओं केे हुनर को निखारने के लिए नृत्य प्रतिस्पर्धा, गायन,वादन,पाक,खेलकूद, आमेट गॉट टैलेंट,व्यापार कौशल योजना जैसे कई स्पर्धाओं का आयोजन कर बेहतरीन परफॉर्मेंस वाले महिलाओं को सम्मानित करती हैं। पूरे वर्ष में सभी महिलाओं को एकसूत्र में बांधने के उद्देश्य से नववधू सम्मेलन,पंचतीर्थ यात्रा,प्रतिभा आनन्द मेला आदि कार्यक्रमों का आयोजन काफी बृहद स्तर पर किया जाता है।

इनकी है अहम भूमिका
मंडल को बुलंदियों के शिखर पर पहुंचाने के लिए सैकड़ों महिलाओं ने बखूबी अपनी जिम्मेदारी को निभाई, लेकिन अब तक मंडल की बागडोर संभालने में सुधा तनसुख
छाजेङ ,लाडदेवी सम्पत डांगी ,कंचन पुखराज बम्ब, भगवती रतनलाल हिरण, निर्मला सुरेश छाजेङ ,विमला अर्जुन चौधरी ,लक्ष्मी विनोद कच्छारा ,नयना सज्जन बम्ब ,पुष्पा सुरेश गेलङा ,किरण सलिल लोढा,लीला रमेश चोरडिया , मोनिका संजय लोढा ,अंजूु राकेश चौधरी की देखरेख में मण्डल की महिलाओं को समाज में एक नई नई ऊंचाई देने के लिए निष्ठा से कार्य समाज को आध्यत्मिक ज्ञान और विकास की दिशा में ले जा रही है।

संस्कारों को जीवंत रखने का प्रयास
महिलाओं को संस्कारी बनाना,अपने संस्कारों को जीवंत रखने के साथ साथ उनके खान-पान,रहन-सहन,आध्यात्मिक ज्ञान को बढ़ाने के लिए हम सतत प्रयास कर रहें है। हम अलग अलग प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन कर उनके हुनर को समाज तक पहुंचाने व निखारने का सतत प्रयास कर रहें हैं।

निर्मला देवेन्द्रजी चण्डालिया,अध्यक्ष, आमेट महिला मंडल मुंबई।

अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाने का प्रयास
महानगर सबसे पुरानी महिला मंडल की मंत्री होने पर हमें गर्व है । आज के परिवेश में लोग एक दूसरे से टूटते जा रहें हैं लेकिन हम सबको आपस जोड़ते हुए राजस्थानी
संस्कृति को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहें हैं।

विमला मनसुख हिरण, मंत्री, आमेट महिला मंडल मुंबई