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कवाल कांड: पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ एक सितंबर को तय होंगे आरोप

पूर्व सांसद सईदुज्जमा समेत सात आरोपी मुजफ्फरनगर एमपी-एमएलए कोर्ट में हुए पेश, पूर्व सांसद कादिर राणा समेत तीन के पेश नहीं होने के चलते चार्ज फ्रेम की तिथि टली।

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मुजफ्फरनगर. आठ साल पूर्व यानी 2013 में हुए कवाल कांड (Kaval Kand) में तिहरे हत्याकांड को लेकर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र खालापार के शहीद चौक पर 30 अगस्त 2013 को हुई एक जनसभा में भड़काऊ भाषण देने के मामले में बसपा के पूर्व सांसद कादिर राणा और कांग्रेस के पूर्व सांसद सईदुज्जमां समेत 10 आरोपीयों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। मामला एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में चल रहा है। इस मामले में मंगलवार को 7 आरोपी कोर्ट में पेश हुए, जबकि पूर्व सांसद कादिर राणा व उनके भाई पूर्व विधायक नूर सलीम राणा समेत तीन आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुए। इस वजह से अदालत ने आरोपियों का चार्ज फ्रेम करने के लिए एक सितंबर की तारीख दी है। साथ ही सभी 10 आरोपियों को अदालत में पेश होने के आदेश भी दिए हैं।

दरअसल, मुजफ्फरनगर में थाना जानसठ क्षेत्र के गांव कवाल में 27 अगस्त 2013 को युवती से छेड़छाड़ के चलते पीड़िता के दो भाइयों सचिन और गौरव ने आरोपी शाहनवाज की पिटाई कर दी थी। जिसके विरोध में मौके पर इकट्ठा हुई समुदाय विशेष की भीड़ ने दोनों भाइयों सचिन और गौरव को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। वहीं इलाज के दौरान छेड़छाड़ के आरोपी शाहनवाज की भी मौत हो गई थी। इसके बाद जिले में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों में कड़वाहट पैदा हो गई।

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शुरू हुआ पंचायतों का दौर

इसके बाद पंचायतों का दौर शुरू हो गया। इसी बीच मुस्लिम समुदाय के लोगों ने थाना नगर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला खालापार के प्रसिद्ध शहीद चौक पर 30 अगस्त 2013 को एक पंचायत बुलाई। पंचायत में भारी जन सैलाब उमड़ा था। आरोप है कि तत्कालीन बसपा सांसद कादिर राणा व उनके भाई तत्कालीन बसपा विधायक नूर सलीम राणा, कांग्रेस के पूर्व सांसद सईदुल जमा और उनके बेटे समेत कुल 10 लोगों ने भड़काऊ भाषण दिया था। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। ज्ञात हो कि इस पंचायत में भीड़ को देखते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा, तत्कालीन एसएसपी सुभाष चंद दुबे को ज्ञापन लेने के लिए भीड़ में ही जाना पड़ा था। खबर मीडिया में आई तो दूसरे समुदाय के लोगों में भी रोष व्याप्त हुआ। इसके बाद जिले में पंचायतों का दौर शुरू हो गया। यही मुजफ्फरनगर में 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगों का कारण बना था।

अदालत ने दिए हैं व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश

30 अगस्त 2013 को तत्कालीन बसपा सांसद कादिर राणा, तत्कालीन चरथावल विधायक नूरसलीम राणा, मीरापुर से तत्कालीन विधायक मौलाना जमील अहमद कासमी, पूर्व कांग्रेस सांसद व पूर्व गृहराज्यमंत्री सईदुज्जमां, उनके पुत्र सलमान सईद, एडवोकेट असद जमां, सुल्तान मुशीर, अहसान कुरैशी, नौशाद कुरैशी और मुशर्रफ के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने समेत अन्य आरोपों में यह मामला दर्ज हुआ था। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे-4 की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही है। मुकदमे में मंगलवार को आरोपियों पर चार्ज फ्रेम होना था। मामले के आरोपी व एडवोकेट असद जमा ने बताया कि कोर्ट में सात आरोपी पूर्व सांसद सईदुज्जमां, पूर्व विधायक मौलाना जमील, असद जमा, सुल्तान मुशीर, मुशर्रफ़ कुरैशी, एहसान कुरैशी व नौशाद कुरैशी कोर्ट में पेश हुए।

पूर्व सांसद कादिर राना, पूर्व विधायक नूरसलीम राना और सलमान सईद कोर्ट में नहीं आए। तीनों की ओर से हाजिरीमाफी कोर्ट में दी गई। इसी कारण चार्ज नहीं बन सकी। विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र शर्मा के अनुसार इस मामले में सभी आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश देते हुए आरोप तय करने के लिए एक सितंबर की तारीख नियत की गई है।

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