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नहीं पहुंचे करीबी तो मुस्लिम भाइयों ने राम-नाम-सत्य है… के उच्चारण के साथ दिया ब्राह्मण की अर्थी को कंधा

Highlights - मुजफ्फरनगर के कसेरवा गांव का मामला - मुस्लिम गांव के लोगों ने हिंदू-रीति-रिवाज के साथ अर्थी को कंधा देकर किया अंतिम संस्कार - हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बना कसेरवा गांव
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मुजफ्फरनगर

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lokesh verma

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Updated: 7 Jun 2020, 9:05 AM IST

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मुजफ्फरनगर. थाना शाहपुर क्षेत्र के गांव कसेरवा में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे (Hindu Muslim Unity) की एक अनोखी मिसाल उस समय देखने को मिली, जब एक 60 वर्षीय ब्राह्मण बृजभूषण पुत्र भुल्लन पंडित की 5 जून की शाम हृदय गति रुकने से मौत हो गई। ब्राह्मण परिवार 25 हजार की मुस्लिम आबादी में बीचो-बीच रहता है। जहां लॉकडाउन (Lockdown) में ब्राह्मण परिवार के यहां कोविड-19 (Covid 19) महामारी के चलते रिश्तेदार नहीं आ पाए, जिसके चलते मुस्लिम गांव के लोगों ने हिंदू-रीति-रिवाज के साथ अर्थी को कंधा देकर उनका अंतिम संस्कार (Funeral) किया। सोशल मीडिया (Social Media) पर मुस्लिम लोगों द्वारा ब्राह्मण की अर्थी को कंधा देने वाली वीडियो तेजी से वायरल हो रही है।

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बताया जा रहा है कि गांव कसेरवा में ब्राह्मण परिवार कई पीढ़ियों से रहता है। वहीं, मृतक ब्राह्मण बृजभूषण गांव के अंदर मुस्लिम मौलाना आजाद जूनियर स्कूल में कई सालों तक अध्यापक भी रहे हैं और हाल-फिलहाल में वह गांव में अपनी 4 बीघा जमीन पर खेती करते थे। मुजफ्फरनगर में 2013 के दंगों के बाद संप्रदायिक हिंदू-मुस्लिम तनाव इतना बढ़ गया था कि लोग एक-दूसरे के पास बैठना तो दूर देखना भी पसंद नहीं करते थे, लेकिन उसी समय से कसेरवा गांव में हिंदू मुस्लिम के बीच साम्प्रदायिकता जो खाई थी, वह अब गांव में कहीं नजर नहीं आती। यही वजह है कि मुस्लिम भाइयों ने हिंदू-रीति रिवाज के साथ बृजभूषण के शव को हिंदू रीति-रिवाज के साथ कंधा देकर श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया। हिंदू-मुस्लिम की यह मिसाल मुजफ्फरनगर में अब एक अच्छा उदाहरण साबित हो रही है। चारों तरफ इस मामले की प्रशंसा हो रही है।

लॉकडाउन शुरू होते ही बुलंदशहर में दिखा सांप्रदायिक एकता का नजारा

बता दें कि लॉकडाउन की शुरुआत में यूपी बुलंदशहर जिले में भी कुछ इसी तरह का नजारा देखने को मिला था। वहां भी मुस्लिम आबादी के बीच रहने वाले हिन्दू परिवार एक व्यक्ति का देहान्त हो गया था। मृतक के गरीब परिवार से ताल्लुक रखने के कारण उसके अंतिम संस्कार की बारी आई तो परिजन सोच में पड़ गए, लेकिन इसी बीच मोहल्ले के मुस्लिमों ने अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाते हुए न केवल आर्थिक मदद की, बल्कि अर्थी को कांधा देकर पूरे हिंदू रीति-रिवाज से मृतक को अंतिम विदाई भी दी। इसी तरह का दृश्य मेरठ में भी देखने को मिला था।

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