
मुजफ्फरनगर. मौत का मंजर ऐसा था कि सड़क पर मजदूरों की चप्पलें, बिस्किट केे पैकेट और खाने के पैकेट बिखरें पड़े थे। इससे पता चलता है कि हालात के मारे मजदूर किस तरह मुसीबतें झेलकर अपने घरों की तरफ जा रहे थे। लेकिन, उन्हें क्या पता था कि ये यात्रा उनकी अंतिम यात्रा है। अब वे लोग नहीं, बल्कि उनके घर उनके शव पहुंचेंगे। जैसे ही वे मुजफ्फरनगर पहुंचे तो एक अनियंत्रित रोडवेज बस ने पलभर में पंजाब से पैदल ही घर के लिए निकले आधा दर्जन मजदूरों को मौत की नींद सुला दिया। वहीं, चार मजदूर अब अस्पताल में जिंदगी के लिए मौत से जंग लड़ रहे हैं।
दरअसल, यह दर्दनाक सड़क हादसा मुजफ्फरनगर में स्टेटे हाइवे पर हुआ है। बताया जा रहा है कि पंजाब में लॉकडाउन के कारण बिहार के दस मजदूर फंस गए थे। पैसा खत्म होने के कारण ये लोग सरकार द्वारा चलाई गई ट्रेन से भी घर नहीं जा पा रहे थे। मजदूरों को लग रहा था कि अगर वह ज्यादा दिन यहां रहे तो भूखे मर जाएंगे और किसी तरह अपने गांव पहुंच जाएंगे तो रूखी-सूखी खाकर परिवार के साथ गुजर-बसर कर लेंगे। इसलिए इन्होंने फैसला किया कि अब ये लोग पैदल ही घर जाएंगे और इस तरह दस मजदूरों का जत्था पंजाब से गाेपालगंज बिहार के लिए पैदल ही निकल पड़ा।
ये लोग पंजाब से सहारनपुर-मुजफ्फरनगर स्टेट हाइवे से पैदल आगे बढ़ रहे थे। इसी बीच रोहाना टोल प्लाजा पर काल बनकर आई एक रोडवेज की बस ने सभी को कुचल दिया। हादसे के बाद मौके पर मजदूरों चीख-पुकार मच गई। इस हादसे में आधा दर्जन मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई है। जबकि चार मजदूर अभी भी अस्पताल में मौत से जूझ रहे हैं।
हादसे के बाद का मंजर ऐसा था कि इसे देख लोगों की रूह कांप जाए। मौके पर मजदूरों की चप्पलें इधर-उधर बिखरी पड़ी थीं। भूखे प्यासे चल रहे मजदूरों को रास्ते में किसी ने खाने के पैकेट दिए होंगे, जो उन्होंने आगे के सफर के लिए बचाकर रखे थे, वह भी घटनास्थल पर बिखरे पड़े थे। इसके साथ ही कुछ बिस्किट पैकेट भी सड़क में पड़े मिले।
Published on:
14 May 2020 10:09 am
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