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मुक्तिधाम से निकलीं गोल्डन गर्ल्स: मजदूर और सब्जीवाले की बेटियों ने जीता गोल्ड, अब बिहार का बढ़ाएंगी मान

मुजफ्फरपुर की स्लम बस्ती में रहने वाली माहिरा और संध्या ने भागलपुर में आयोजित 16वीं राज्य स्तरीय वुशू चैंपियनशिप के सब-जूनियर अंडर-14 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दोनों अब राष्ट्रीय चैंपियनशिप में बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगी।

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muzaffarpur slum girls

माहिरा और संध्या

मुजफ्फरपुर की स्लम बस्ती में रहने वाली दो बेटियों ने राज्य स्तरीय वुशू चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर बड़ा कमाल किया है। अब माहिरा और संध्या राष्ट्रीय चैंपियनशिप में बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगी। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद दोनों ने अपनी मेहनत और लगन से यह उपलब्धि हासिल की। माहिरा के पिता मजदूरी करते हैं, जबकि संध्या के पिता सब्जी बेचते हैं।

भागलपुर के खेल भवन में आयोजित 16वीं राज्य स्तरीय वुशू चैंपियनशिप में इन दोनों लड़कियों ने सब जूनियर अंडर-14 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे मुजफ्फरपुर जिले का नाम भी रोशन किया है।

मुक्तिधाम से राष्ट्रीय मंच तक

दोनों बच्चियां अब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगी। सिकंदरपुर मुक्तिधाम परिसर में संचालित अप्पन पाठशाला में पढ़ने वाली माहिरा और संध्या ने पढ़ाई के साथ-साथ वुशू में भी कड़ी मेहनत की और अपने दम पर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सफर तय किया है। अपनी सफलता पर दोनों बच्चियों ने कहा कि यह उपलब्धि उनके प्रशिक्षक सुनील कुमार, अजीत कुमार सिंह और खेलो इंडिया के कोच करण कुमार के मार्गदर्शन का परिणाम है। उनका कहना है कि प्रशिक्षकों के सहयोग और सही दिशा-निर्देश के बिना स्वर्ण पदक जीतना संभव नहीं था।

गरीबी को हराकर बनीं चैंपियन

माहिरा पिछले पांच वर्षों से अप्पन पाठशाला में पढ़ाई कर रही है। वह करीब डेढ़ साल से वुशू का प्रशिक्षण ले रही है। माहिरा ने बताया कि वह प्रतिदिन लगभग दो घंटे अभ्यास करती है। स्वर्ण पदक जीतने के बाद उसने सबसे पहले अपने शिक्षक को फोन कर यह खुशखबरी दी।

माहिरा के पिता मजदूरी का काम करते हैं, जबकि उसकी मां घरों में चौका-बर्तन कर परिवार की आजीविका चलाती हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद माहिरा ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है।

सपनों को मिली नई उड़ान

संध्या भी पिछले पांच वर्षों से अप्पन पाठशाला की छात्रा है। यहां वह पढ़ाई के साथ-साथ वुशू का प्रशिक्षण भी ले रही है। संध्या का सपना देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना है। सातवीं कक्षा की छात्रा संध्या कहती है, "मेरा लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना है, लेकिन उससे पहले राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर बिहार के लिए स्वर्ण पदक लाना चाहती हूं।"

वहीं, अप्पन पाठशाला के संस्थापक सुमित कुमार ने कहा कि माहिरा और संध्या की यह सफलता उनके संघर्ष, अनुशासन, समर्पण और कड़ी मेहनत का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों बच्चियां राष्ट्रीय स्तर पर भी बेहतर प्रदर्शन कर बिहार का नाम रोशन करेंगी।

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