
After father, Harendra Mirdha will now face son Narayan
After father, Harendra Mirdha will now face son Narayan नागौर. नागौर जिले के बड़े राजनीति घराने मिर्धा परिवार के वरिष्ठ नेता हरेन्द्र मिर्धा और बरणगांव का बेनीवाल परिवार 34 साल बाद एक बार फिर आमने-सामने होंगे। 1980 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले हरेन्द्र मिर्धा ने मूण्डवा विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लडकऱ रामदेव चौधरी को हराते हुए पहली बार विधायक बने थे, लेकिन रामदेव चौधरी ने मिर्धा को अगले ही चुनाव (1985 का विधानसभा चुनाव) में पटखनी दे दी।
इसके बाद हरेन्द्र मिर्धा ने मूण्डवा सीट छोड़ दी और 1993 में हुए मध्यावधि चुनाव में नागौर सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद दोनों परिवारों को चुनाव में आमना-सामना नहीं हुआ।
हालांकि वर्ष 2018 में हरेन्द्र मिर्धा ने खींवसर से चुनाव लडऩे की तैयारी की थी, लेकिन ऐनवक्त पर टिकट सेवानिवृत्त डीआईजी सवाईसिंह चौधरी को दे दिया। सवाई सिंह चौधरी ने खींवसर में कांग्रेस को जीवित करने का काम किया और पहली बार कांग्रेस को दूसरे स्थान पर रखा। लोकसभा चुनाव में हनुमान बेनीवाल के सांसद बनने के बाद अब हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस ने सवाईसिंह की बजाय हरेन्द्र मिर्धा पर दांव खेला है, जबकि आरएलपी व भाजपा ने रामदेव चौधरी के पुत्र व हनुमान बेनीवाल के छोटे भाई नारायण बेनीवाल को मैदान में उतारा है।
सोमवार यानी 30 सितम्बर को दोनों पार्टियों के प्रत्याशी नामांकन दाखिल कर जनसभा के माध्यम से अपना-अपना शक्ति प्रदर्शन करेंगे। हरेन्द्र मिर्धा की सभा में जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित कांग्रेस के अन्य दिग्गज पहुंच रहे हैं, वहीं नारायण बेनीवाल की सभा में उनके बड़े भाई हनुमान बेनीवाल सहित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत, राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया तथा उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ भाग लेंगे। सांसद बेनीवाल खींवसर में नामांकन से पूर्व मंडावा से भाजपा प्रत्याशी की नामांकन सभा में भाग लेंगे, उसके बाद हेलीकॉप्टर से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व अन्य नेताओं के साथ खींवसर आएंगे।
सीट वही, नाम बदला
39 साल पहले हरेन्द्र मिर्धा व रामदेव चौधरी का मुकाबला मूण्डवा सीट पर हुआ था, जिस दोनों ने एक-दूसरे को एक-बार हराया। अब खींवसर सीट से मिर्धा का मुकाबला नारायण बेनीवाल से हो रहा है। हालांकि विधानसभा सीट का नाम बदल गया है, लेकिन क्षेत्र लगभग वही है। मूण्डवा कस्बे सहित कुछ गांवों को नागौर विधानसभा में शामिल किया गया है, लेकिन कुचेरा कस्बा आजा भी खींवसर विधानसभा में है। यही कारण है कि खींवसर सीट मतदाताओं के हिसाब से नागौर जिले की दूसरी सबसे बड़ी सीट है, जहां करीब ढाई लाख मतदाता हैं।
आमने-सामने
हरेन्द्र मिर्धा
उम्र - 69 वर्ष
शिक्षा - एमबीए
पार्टी - कांग्रेस
मजबूत पक्ष - पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामनिवास मिर्धा के पुत्र, 40 साल की राजनीति का अनुभव।
कमजोर पक्ष - वर्ष 2003, 2008 व 2013 के विधानसभा चुनाव लगातार हारे। क्षेत्र में सक्रिय नहीं रहे।
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नारायण बेनीवाल
उम्र - 46
शिक्षा - बीएससी
पार्टी - आरएलपी व भाजपा
मजबूत पक्ष - रालोपा संयोजक हनुमान बेनीवाल के छोटे भाई, विधानसभा क्षेत्र में अच्छी पकड़।
कमजोर पक्ष - विधायक का चुनाव पहली बार लड़ रहे, राजनीति अनुभव कम।
Updated on:
30 Sept 2019 10:56 am
Published on:
30 Sept 2019 10:51 am
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