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बारह साल बाद भी विधि शिक्षा ‘बेपटरी’

नागौर विधि महाविद्यालय में एक व्याख्याता के भरोसे 130 विद्यार्थियों का भविष्य

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 after twelve years, law education situation worsened

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देवेन्द्र प्रताप सिंह/नागौर. प्रदेश सहित नागौर जिले में विधि शिक्षा की सांस फूलने लगी हैं। प्रदेश के 15 विधि महाविद्यालयों में विधि शिक्षा के महज 35 से 40 व्याख्याता कार्यरत हैं। इनमें से भी करीब 5-6 व्याख्याता रसूखात के चलते विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेज शिक्षा निदेशालय में पदस्थापित हैंं। नागौर जिला सहित प्रदेश में कई कॉलेज ऐसे हैं जहां एक ही व्याख्याता विद्यार्थी को पढ़ा रहा है। इसके बावजूद बदहाल विधि शिक्षा को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया और ना ही राज्य सरकार गंभीर नजर आ रही है। हर साल प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को प्रवेश देने के लिए बार कॉसिंल ऑफ इण्डिया (बीसीआई) से स्वीकृति की मिन्नतें करनी पड़ती हैं।

2005 में शुरू किए गए 15 विधि महाविद्यालय
प्रदेश में वर्ष 2005 में 15 विधि महाविद्यालय खोले गए। इनमें अजमेर , भीलवाड़ा, सीकर, सिरोही, बूंदी, कोटा , झालावाड़ व नागौर सहित अन्य जिले शामिल हैं। शुरुआत में विधि महाविद्यालय में विधि शिक्षकों की स्थिति ठीक रही लेकिन लगातार सेवानिवृत्ति के कारण बीते छह-सात साल में हालात इस कदर बिगड़े कि कई महाविद्यालय तो आज एक व्याख्याता के भरोसे हैं। इधर, विधि महाविद्यालय के लिए ८६ विधि शिक्षकों की नई भर्ती राजस्थान लोक सेवा आयोग में अटकी हुई है। आयोग इनकी लिखित परीक्षा करा चुका है, लेकिन साक्षात्कार की तिथि अब तक तय नहीं हुई है। विधि महाविद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण इन्हें बीसीआई से स्थाई सम्बद्धता नहीं मिल पाई है। इससे हर साल प्रथम वर्ष के प्रवेश में विलम्ब हो रहा है।

एक व्याख्याता के भरोसे 130 विद्यार्थियों को भविष्य
नागौर में वर्ष 2005 में सरकार ने विधि महाविद्यालय खोला था, लेकिन कानून की पढ़ाई के लिए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त व्याख्याताओं का इंतजाम 12 साल बाद भी नहीं हो पाया है। वर्ष 2005 से 2010 तक कॉलेज ठीक चला। वर्ष 2001 में प्रथम वर्ष में प्रवेश की स्वीकृति नहीं मिल पाई। वर्ष 2014 में शैक्षिक सत्र पूर्णत: बंद रहा। बाद में विद्यार्थियों व केन्द्रीय मंत्री सीआर चौधरी के प्रयासों से कॉलेज में पुन: प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुई। वर्ष 2017 में प्राचार्य पद पर मधुसूदन राजपुरोहित को लगाया गया। हाल ही में राजपुरोहित को प्रतिनियुक्ति पर जोधपुर स्थित कार्यालय क्षेत्रिय निदेशक कॉलेज शिक्षा में लगाया गया है। इससे नागौर लॉ कॉलेज के हालात और बिगड़ गए हैं। विधि महाविद्यालय के 130 विद्यार्थियों का भविष्य अब एक मात्र व्याख्याता दर्शन सिंह के भरोसे है। व्याख्याता सिंह पर पढ़ाने के अलावा ऑफिस कार्य का भार भी आ गया है। वीसी या मिटिंग में जाने पर विद्यार्थियों को पहले ही कॉलेज नहीं आने की सूचना दे दी जाती है। सोमवार को भी व्याख्याता दर्शन सिंह के वीसी में जाने के कारण विद्यार्थियों की छुट्टी कर दी गई।

करनी पड़ती है छुट्टी
कॉलेज में विद्यार्थियों को पढ़ाने के अलावा ऑफिस का कार्य भी मुझे ही करना पड़ता है। किसी कार्य से बाहर रहने पर कॉलेज में विद्यार्थियों की छुट्टी करनी पड़ती है।
दर्शन सिंह, व्याख्याता, विधि महाविद्यालय, नागौर