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Rajasthan: युवाओं के लिए मिसाल बने आशुसिंह राठौड़, गांव से निकलकर बने बीआरओ के सबसे बड़े अधिकारी

आशुसिंह राठौड़ को 2017 में गणतंत्र दिवसर पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया, वहीं 2019 में थल सेनाध्यक्ष ने सम्मानित किया।

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नागौर

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Kirti Verma

Aug 28, 2023

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नागौर/लाडनूं. तहसील के गांव लाछड़ी की एक ऐसी शख्सियत है, जिन्होंने देशसेवा करते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाकर सम्पूर्ण क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। यह शख्सियत है आशुसिंह राठौड़। वे वर्तमान में बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन में उप महानिदेशक पद पर सेवारत हैं। लाछड़ी गांव में 15 जनवरी 1964 को हुआ।

स्कूल तीन किमी पैदल चलकर जाते
जसवंतसिंह-छगन कंवर के घर इनका जन्म हुआ। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा लाछड़ी में पूरी की। इसके बाद ग्राम पंचायत मीठड़ी के राजकीय विद्यालय में पढ़ने लगे। स्कूल तीन किमी पैदल चलकर जाते थे तथा गांव में बिजली नहीं होने से लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करते थे। मीठड़ी विद्यालय में केवल कला संकाय था, इसलिए विज्ञान संकाय (गणित) से पढ़ाई करने के लिए इन्होंने मौलासर के सोमानी स्कूल में दाखिला लिया। यहां से डिस्टेक्शन से परीक्षा उत्तीर्ण की। आशुसिंह प्राथमिक स्तर से ही मेधावी छात्र रहे। 1988 में पॉलिटेक्निकल कॉलेज अजमेर से इंजीनियरिंग की । इसमे टॉपर रहे। इसके बाद यूपीएससी परीक्षा प्रथम प्रयास में उत्तीर्ण की। 1990 में बीआरओ में नियुक्ति मिली तो देशसेवा की भावना से बेहिचक शामिल हो गए।


इन पुरस्कारों से हो चुके सम्मानित
आशुसिंह राठौड़ को 2017 में गणतंत्र दिवसर पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया, वहीं 2019 में थल सेनाध्यक्ष ने सम्मानित किया। 2020 में गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अतिविशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया । इसके अलावा उन्हें इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियरिंग, उत्तराखण्ड सरकार, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा सहित कई सभा-संस्थाओं की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। हाल ही में उन्हें ह्युमन प्राइड ग्रुप की ओर से ग्लोबल प्राइड अवार्ड से नवाजा गया है। सेना में उन्हें तीन बार जम्मू-कश्मीर पदक, 10, 20 व 30 साल का सर्विस मेडल, उत्तर पूर्व पदक, ऑपरेशन पराक्रम पदक, विदेश सेवा पदक आदि भी मिले।

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गांव के पहले इंजीनियर
अपने गांव के पहले इंजीनियर बनने वाले आशुसिंह युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत हैं। उनकी पुत्री महक राठौड़ चिकित्सक हैं तथा गोल्ड मेडलिस्ट हैं।आशुसिंह ने 2021 में उत्तराखण्ड में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान निस्वार्थ सेवाएं देकर लोगों की मदद की। इसके अलावा कैलाश मानसरोवर के लिए सड़क तथा लद्दाख में 18 हजार फीट पर दौलत बेग ओल्डी सड़क निर्माण राठौड़ के नेतृत्व में पूर्ण हुआ।

राजस्थान की गर्मी में रहने वाले आशुसिंह को बीआरओ में उत्तर-पूर्वी राज्यों के पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्रों में कार्य करने की चुनौती मिली, लेकिन उन्होंने अपने हौंसलें से हर कठिनाई को पार किया। लद्दाख की 12 हजार फीट ऊंचाई तथा उत्तराखण्ड की बर्फिली चोटियों पर लैंड लाइन सीमा पर सेवाएं दी। इन्हें पड़ौसी देश भूटान में रहकर सेवाएं देने का भी अवसर मिला। राठौड़ 5 साल तक लगातार दो सड़क निर्माण कम्पनियों की कमान संभालने वाले एकमात्र अधिकारी हैं। उप महानिदेशक के उनके दो कार्यकाल में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर एक कीर्तिमान स्थापित किया गया। अपनी अदम्य कार्यक्षमता और मृदुल व्यवहार के लिए सेना में उनकी अलग पहचान है। आशुसिंह अब तक दो बार राष्ट्रपति से सम्मानित हो चुके हैं। देशसेवा के साथ वे अपने गांव से भी पूरा लगाव रखते हैं तथा क्षेत्र के विकास में सहभागिता निभा रहे हैं।

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