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समय से पहले दुनिया में आ रहे बच्चे, चिंता का कारण बन रही अपरिपक्व पैदा होने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या

हर साल डेढ़ करोड़ बच्चे हो रहे समय पूर्व पैदा, इसके कारण होती है परेशानियां, कम उम्र में शादी व कमजोर मां के कारण समय से पूर्व जन्म ले रहे हैं बच्चे

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नागौर.अपरिक्व (प्रीमैच्योर) पैदा होने वाले बच्चों की संख्या वर्ष दर वर्ष बढ़ रही है। बच्चों का समय से पूर्व जन्म, शिशु मृत्यु की दूसरी सबसे बड़ी वजह मानी जाती है। यह आंकड़ा चौंकाने वाला इसलिए भी हैं, क्योंकि चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार अगर अपरिपक्व बच्चों के जन्म पर जल्दी रोक नहीं लगी तो कम उम्र में बच्चों की मौत को रोकना मुश्किल हो जाएगा।

हर साल 17 नवम्बर को दुनिया भर में समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों की याद दिलाने के लिए वल्र्ड प्रीमैच्योरिटी-डे (समय पूर्व जन्म दिवस) मनाया जाता है। एक अनुमान के अनुसार, 2024 में दुनिया भर में लगभग 15 मिलियन बच्चे समय से पहले पैदा होने की आशंका है, जिनमें से 3.5 मिलियन से अधिक बच्चे अकेले भारत में पैदा होंगे, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक संख्या में से एक है। दुनिया भर में लगभग 10 में से एक बच्चा समय से पहले पैदा होता है। हालांकि नागौर में ऐसी स्थिति नहीं है, लेकिन फिर भी प्रीमैच्योर मैदा होने वाले बच्चों की संख्या बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि 37 सप्ताह जो कि मानव बच्चों के जन्म का परिपक्व सप्ताह होता है, जिन बच्चों का जन्म जल्दी होता उनकी मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।

अपरिपक्वबच्चे पैदा होने के कारण

- मां से संबंधित कारण :

- मातृ एनीमिया, खराब पोषण, मां की उम्र कम होना।

- ज्यादा बच्चे होना, जैसे-जैसे बच्चों की संख्या बढ़ेगी, वैसे ही प्री-मैच्योयर बच्चे पैदा होने की संभावना बढ़ेगी।

- जुड़वा या तीन बच्चे होने पर।

- मां को लम्बी बीमारियां होना, जैसे - मधुमेह/ उच्च रक्तचाप/ कोई गुर्दे की बीमारी।

- मां को दीर्घकालिक संक्रमण, जैसे- टीबी, यूटीआई।

- निम्न सामाजिक-आर्थिक समूह वाली माताएं।

- ड्रग्स / धूम्रपान / शराब आदि का सेवन करने वाली महिलाएं।

- मां के गर्भाशय की असामान्य संरचना।

भ्रूण संबंधी कारक :

- एक साथ अधिक बच्चे होने पर, जैसे- जुड़वां या तीन बच्चे।

- कोई भी सिंड्रोमिक / असामान्य बच्चा हो।

- गुणसूत्र संबंधी असामान्यताएं।

- समय से पहले जन्म का पिछला इतिहास।

अपरिपक्व बच्चों की तीन श्रेणी

गर्भावस्था के 37 सप्ताह पूरे होने से पहले जन्म लेने जीवित शिशुओं को गर्भावधि उम्र के आधार पर समय से पहले जन्म की उप-श्रेणियों में बांटा गया है।

- अत्यंत समयपूर्व प्रसव (28 सप्ताह से कम)

- बहुत समय से पहले जन्म (28 से 32 सप्ताह से कम)

- मध्यम से विलंबित समयपूर्व प्रसव (32 से 37 सप्ताह)।

प्रीमैच्योर बच्चों की होती है ज्यादा मौत

प्रीमैच्योर बच्चों की संख्या वर्ष दर वर्ष बढ़ रही है। इसके पीछे कई कारण हैं। प्रीमैच्योर बच्चों की मृत्यु दर भी ज्यादा रहती है। हालांकि नागौर में ऐसे बच्चों को बचाने के लिए जेएलएन अस्पताल के एमसीएच यूनिट में काफी सुविधाएं विकसित की जा चुकी हैं। फिर भी इसके लिए मां-बाप का जागरूक रहना बहुत जरूरी है। इसमें संक्रमण जैसे जोखिम कारकों की पहचान और प्रबंधन के लिए गर्भावस्था के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सक के साथ कम से कम 8 बार संपर्क करना चाहिए।

- डॉ. विकास चौधरी, शिशु रोग विशेषज्ञ, एमसीएच विंग, नागौर