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नागौर. सरकार के मंत्री व विधायक समय-समय पर जरुरतममंद लोगों को विभिन्न ऋण योजनाओं का लाभ देने का ढिंढोरा पिट रहे हो लेकिन हकीकत इसके उलट है। सरकार की मुद्रा योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, भामाशाह रोजगार ? सृजन योजना समेत अन्य योजनाओं में सैकड़ों आवेदन बैंकों में धूल फंाक रहे हैं। विभिन्न स्तरों पर प्रभावी मॉनीटरिंग का दावा किए जाने के बावजूद आलम यह है कि जिले में राष्ट्रीयकृत बैंक सरकार की योजनाओं की हवा निकालने में लगे हुए हैं। वित्त वर्ष में अलग-अलग बैंक अपने लक्ष्य को पूरा करना तो दूर आधे आवेदकों को भी लाभ नहीं देते। चैक मिल भी जाता है तो उसमें मिलने वाली सब्सिडी भाड़े-किराये में ही खर्च हो जाती है।
बात बढी तो दिया चैक
मकराना तहसील के जूसरिया ग्राम पंचायत के मोडाराम सैन ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत आवेदन किया लेकिन बैंक ने दस्तावेज संलग्न नहीं करने की बात कहकर ऋण नहीं दिया। मामला जिला स्तरीय सतर्कता समिति मेंं दर्ज हुआ। बात बढने पर बैंक प्रबंधन ने 50 हजार रुपए का चैक जारी किया। इससे पहले आवेदक से जबरन यह लिखवाया गया कि आवेदन करते समय उसने सभी दस्तावेज नहीं दिए इसलिए उसको ऋण नहीं मिला। समिति की बैठक में प्रार्थी ने कलक्टर को भी इस बात से अवगत कराया। यह तो महज एक बानगी है। जिले में ऐसे सैकड़ों मामले में जिसमें आवेदकों को अधिकारियों सामने मिन्नतें करनी पड़ती है।
लम्बित हैं 318 आवेदन
जिले में कार्यरत बैंकों को गत वर्ष मुद्रा व भामाशाह रोजगार सृजन योजना के तहत 405 आवेदकों को ऋण देने का लक्ष्य देकर 403 आवेदन भेजे गए, जिनमें बैंकों ने 23 मार्च तक मुद्रा में 300 व भामाशाह रोजगार सृजन योजना में 8 आवेदकों को ऋण दिया गया। विभिन्न कारणों से बैंकों ने 75 आवेदन निरस्त कर दिए वहीं 318 आवेदन लम्बित हैं। यूको बैंक ने 48 के लक्ष्य के विरुद्ध मिले 90 आवेदकों को 37.6 लाख का ऋण दिया जबकि राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक ने 128 के लक्ष्य के विरुद्ध मिले 75 आवेदन स्वीकृत कर 47.6 लाख का ऋण दिया।
एसबीआई की रिपोर्ट खराब
उद्योग विभाग की सूची में जिले भर में 26 बैंकों में शामिल एसबीआई को 106 के लक्ष्य के विरुद्ध 141 आवेदन भेजे गए। मजे की बात यह है कि बैंक ने एक आवेदन स्वीकृत कर एक व्यक्ति को महज 4.3 लाख का ऋण दिया। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 16 के लक्ष्य के विरुद्ध 43 आवेदकों को 70.68 लाख की ऋण राशि दी। एसबीआई की ओर से ऋण देने में आनाकानी के चलते कलक्टर कुमारपाल गौतम को जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक में यह कहना पड़ा कि एसबीआई की रिपोर्ट सबसे खराब है और विभागों की ओर से इसे ब्लेक लिस्ट कर खाते दूसरी बैंकों में खुलवाने चाहिए।
Published on:
13 Apr 2018 12:30 pm
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