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कभी सर्जन डोगीवाल तो कभी महावर और बैरवा बनकर करता है लोगों की जान से खिलवाड़, ध्यान से देखिए यह चेहरा

अलवर के टपूकड़ा व बाड़मेर के सिणधरी में कर चुका है फर्जीवाड़ा - नागौर के सर्जन डॉ. रामकिशोर डोगीवाल के नाम से नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों से करता है धोखाधड़ी - प्रदेश के तीन थानों में दर्ज हो चुके हैं मामले, आखिर बाड़मेर पुलिस ने किया गिरफ्तार

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नए जमाने का नटवरलाल यानी रामकिशोर महावर

नए जमाने का नटवरलाल यानी रामकिशोर महावर

नागौर. ‘नए जमाने का नटवरलाल।’ जी हां, वर्षों की मेहनत और प्रेक्टिस के बाद नागौर के डॉक्टर रामकिशोर डोगीवाल ने जो डिग्रियां प्राप्त की, उन्हीं की फोटो कॉपी पर शातिराना तरीके से अपने फोटो लगाकर दौसा के ‘नटवरलाल’ (रामकिशोर महावर) ने कई लोगों की जान से खिलवाड़ किया है। नए जमाने के ‘नटवरलाल’ ने न केवल लोगों की जान से खिलवाड़ किया, बल्कि निजी अस्पताल संचालकों को भी लाखों रुपए का चूना लगाया है। एक महीने की मेहनत के बाद सिणधरी पुलिस ने आरोपी को जोधपुर से दस्तयाब कर गिरफ्तार किया है।

यह मामला तब उजागर हुआ, जब इस नटवरलाल यानी रामकिशोर महावर ने बाड़मेर के सिणधरी चारणान स्थित जे.के. हॉस्पिटल एण्ड डाइनोस्टिक सेंटर संचालक को ढाई लाख की चपत लगा दी। आरोपी महावर गत 29 अगस्त को हॉस्पिटल संचालक खंगारसिंह पुत्र धूड़ाराम जाट के पास गया और खुद को डॉ. रामकिशोर डोगीवाल पुत्र मांगीलाल डोगीवाल बताते हुए कहा कि वह जनरल सर्जन व गायनिक कार्य करता है तथा कूटरचित डिग्रियां व शैक्षिक दस्तावेज पेश किए। इस पर खंगारसिंह ने उस पर भरोसा करते हुए 50 हजार रुपए उसके खाते में जमा करवा दिए तथा दो लाख रुपए नकद दे दिए। कुछ दिन बाद खंगारसिंह को पता चला कि उसने जिस व्यक्ति को सर्जन समझकर रखा है, वह फर्जी है और जालसाजी कर दस्तावेज तैयार किए हैं। पोल खुलते ही आरोपी 13 सितम्बर को वहां से फरार हो गया। धोखाधड़ी व ठगी का अहसास होने पर खंगारसिंह ने गत 13 सितम्बर को सिणधरी थाने में मुकदमा दर्ज करवाया।

फोन आया तो लगा झटका
आरोपी रामकिशोर ने डॉ. रामकिशोर डोगीवाल के शैक्षणिक दस्तावेज व जोधपुर स्थित निवास का पता अस्पताल संचालक को दिया, इसलिए मुकदमा दर्ज होने के बाद सिणधरी पुलिस डॉ. डोगीवाल के जोधपुर स्थित निवास पर पहुंच गई। एकबारगी परिजनों को भी मामला समझ में नहीं आया। उन्होंने यहां डॉ. डोगीवाल को फोन कर मामले की जानकारी दी तो डोगीवाल तो झटका लगा। उन्होंने बताया कि वह पिछले छह वर्षों से नागौर में सेवाएं दे रहे हैं। 2 साल सरकारी अस्पताल में तथा तीन साल से स्वास्तिक हॉस्पिटल, नागौर में सेवा दे रहे हैं। पूरी जानकारी पुख्ता होने पर पुलिस ने असली आरोपी की तलाश शुरू की और 25 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया।

अलवर में भी कर चुका है बदमाशी
मूल रूप से दौसा के वार्ड 24 का निवासी आरोपी रामकिशोर महावर पुत्र जगदीशप्रसाद कोली सिणधरी से पहले अलवर के टपूकड़ा स्थित एक निजी अस्पताल में भी खुद को डॉ. डोगीवाल बताकर बदमाशी कर चुका है। आरोपी ने कुछ दस्तावेजों में खुद को राजकुमार बैरवा भी बता रखा है। इसकी जानकारी मिलने पर डॉ. डोगीवाल ने अलवर सीएमएचओ को पत्र लिखकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। सिणधरी में मुकदमा दर्ज होने के बाद डॉ. डोगीवाल ने नागौर के कोतवाली थाने में रिपोर्ट देकर उनकी प्रतिष्ठा धूमिल करने पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। डॉ. डोगीवाल ने इस अपराधिक षडय़ंत्र, फर्जी दस्तावेज तैयार करने व अपराधिक कृत्य को अंजाम देने में अन्य लोगों के शामिल होने की भी आशंका जताइ है। हालांकि कोतवाली ने मुकदमा दर्ज करने की बजाए परिवाद में रख लिया।

शातिर है बदमाश, नाम बदलना है फितरत
पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी ने कोविड-19 का कार्ड भी तैयार करवा लिया, जिसमें खुद को डॉ. रामकिशोर डोगीवाल बताते हुए मधुर हॉस्पिटल में कंसलटेंट डॉक्टर बता दिया। एक सर्टिफिकेट ऐसा भी हाथ लगा है जो ड्रग कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन राजस्थान द्वारा जारी किया गया है, जिसमें आरोपी का नाम राजकुमार बैरवा बताया है। आरोपी ने डॉ. रामकिशोर डोगीवाल को राजस्थान मेडिकल काउंसिल जयपुर द्वारा जारी सर्टिफिकेट में तकनीकी साधानों से छेड़छाड़ कर खुद का फोटो चस्पा कर लिया और प्रमाण पत्र में एडिशनल रजिस्ट्रेशन नम्बर बदल दिए।

आरोपी को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है
डॉक्टर के फर्जी दस्तावेज तैयार कर निजी अस्पताल संचालक से ढाई लाख रुपए ठगने के मामले में आरोपी दौसा निवासी रामकिशोर महावर को गिरफ्तार किया है। सोमवार को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। आरोपी ने सिणधरी के अलावा कहां-कहां बदमाशी की और इस षडय़ंत्र में उसके साथ और कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी भी पूछताछ की जा रही है।
- बलदेव, थानाधिकारी, सिणधरी (बाड़मेर)