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प्रत्याशियों के अपने-अपने जीत के दावे, जनता आपसी चर्चा से निकाल रही परिणाम

जिले की दस सीटों को लेकर लगाए जा रहे कयास, 3 दिसम्बर को होगी मतगणनानागौर में भाजपा-कांग्रेस के एक-एक बागी तो छह सीटों पर आरएलपी के उम्मीदवारों ने मुकाबला बनाया त्रिकोणीय

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चुनाव को लेकर चर्चा करते शहरवासी

चुनाव को लेकर चर्चा करते शहरवासी

राजस्थान में विधानसभा चुनाव का मतदान हो चुका है। अब सभी को चुनाव नतीजों का इंतजार है। छह दिन बाद 3 दिसम्बर को मतों की गणना होनी है। मतगणना से पहले कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियां पूर्ण बहुमत का दावा कर रही हैं, लेकिन हकीकत में दोनों ही दल डरे हुए हैं। इसकी वजह हैं बागी और अन्य दलों के उम्मीदवार। नागौर व डीडवाना-कुचामन जिले की दस सीटों पर नजर डालें तो यहां सात सीटों पर आरएलपी ने अपने प्रत्याशी उतारे, जिनमें पांच पर तो मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया। एक सीट पर भाजका के बागी हैं तो एक पर कांग्रेस के बागी ने भाजपा और कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ी की है। नागौर में भाजपा का कहना है कि कांग्रेस के बागी हबीबुर्रहमान जितने अधिक वोट लेंगे, उसका फायदा उनको मिलेगा। वहीं डीडवाना में भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर बागी हुए युनूस खान भी कांग्रेस के वोट ज्यादा लेते दिख रहे हैं, ऐसे में भाजपा को ही फायदा दिख रहा है। वहीं जिले में पिछली बार की तुलना में इस बार मतदान प्रतिशत गिरना भी कई सवाल पैदा कर रहा है।

आरएलपी ने भी नहीं रखी कोई कमी
भाजपा और कांग्रेस के अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने जिले में ताबड़तोड़ रैलियां की और पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में जमकर प्रचार किया। कई चुनावी सभा में भीड़ भी अच्छी जुटी। इस भीड़ ने भाजपा और कांग्रेस की जीत के समीकरण बिगाड़ कर रख दिए हैं। आरएलपी ने जिले की सात सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे, जिनमें छह की स्थिति काफी मजबूत रही। खींवसर व मेड़ता में सीधी टक्कर में रही तो जायल, परबतसर व डेगाना में मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया। मकराना में भी काफी वोट लेने की सूचना है।

इन सीटों पर बढ़ी हुई हैं कांग्रेस-भाजपा की धडकऩें
यूं तो भाजपा जिले की सभी सीटों पर अपनी जीत बता रही है तो कांग्रेस आठ सीटों पर अपनी जीत मान रही है, लेकिन स्थिति कुछ और है। जिले की लाडनूं, डीडवाना, जायल, नागौर, खींवसर, मेड़ता व डेगाना सीट पर भाजपा को डर लग रहा है तो नावां, लाडनूं, डीडवाना, जायल, नागौर, डेगाना, मकराना व परबतसर को लेकर कांग्रेस भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। वहीं आरएलपी भी खींवसर, जायल, मेड़ता व परबतसर में जीत की उम्मीद लगा रही है।

बड़ा सवाल - क्या राज्य सरकार की योजनाएं असरकारी रही
इस बार के चुनाव में एंटी इनकमबेंसी का मुद्दा दिखाई नहीं दिया। राज्य सरकार की ओर से चलाई गई कई जनकल्याणकारी योजनाएं क्या जनता तक पहुंची, यदि पहुंची तो क्या लोगों ने उनके बदले वोट दिया। यह भी बड़ा सवाल है। सरकार ने महिलाओं को स्मार्ट फोन देने के साथ राशन सामग्री सहित कई योजनाओं में महिलाओं का विशेष ध्यान रखा। मतदान में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा है, ऐसे में यह बात भी विशेष महत्व रखती है कि महिलाओं ने किसे वोट किया?