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डीडवाना. राजस्थान पत्रिका के अभियान 'चेंजमेकर्स-स्वच्छ करें राजनीति' के तहत राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और राजनीति को साफ-स्वच्छ करने को लेकर गुरुवार को बांगड़ महिला महाविद्यालय में महिलाओं की परिचर्चा का आयोजन हुआ। सुबह 10 बजे आयोजित हुई इस परिचर्चा में क्षेत्र के अनेक महिला संगठनों ने भाग लेकर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में शिक्षिका सीमा तिवारी ने कहा कि महिलाएं शासन प्रणाली की धुरी होती है।
आज की राजनीति को स्वच्छ करने में महिलाओं के प्रयास बेहद महत्वपूर्ण है। उन्हें पहल करते हुए अपनी सोच को सकारात्मक रखते हुए राजनीति में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना होगा। माहेश्वरी महिला मंडल की अध्यक्ष मंजू सिंगी ने कहा कि महिलाएं बहुत आगे जाना चाहती है, लेकिन पुरूषवादी सोच के चलते उन्हें आगे आने का मौका नहीं मिलता। क्योंकि राजनीति में जो महिलाएं आती है, उनके पति व रिश्तेदार उनके हक पर अधिकार जमा लेते हैं। महिलाओं को केवल रबर स्टाम्प बना देते हैं और सारा कार्य पुरूष स्वयं करने लगते हैं, जो उचित नहीं है।
राजनीतिक क्षेत्र में भी पुरूषवादी सोच हावी
प्राचार्य रेणु सिंह ने कहा कि महिलाएं किसी भी तरह से कम नहीं हैं। उन्हें अपनी झिझक और डर को बाहर निकालना होगा। उन्होंने रजिया सुल्तान, रानी लक्ष्मीबाई, सरोजनी नायडू, इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक महिलाएं शासन प्रणाली बेहतर ढंग से चलाती आई है। भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष माया माथुर ने कहा कि हर क्षेत्र की तरह राजनीतिक क्षेत्र में भी पुरूषवादी सोच हावी है, जो महिलाओं को आगे नहीं आने देती। राजनीति में सक्रिय महिलाओं का कार्य भी पुरुष करते हैं, जो ठीक नहीं है। शिक्षिका मनीषा राखेचा ने कहा कि अगर महिलाओं में क्षमता है और आगे बढऩे की कुव्वत है तो पुरूष कहीं बाधक नहीं बनते। उन्होंने उदाहरण दिया कि कई ऐसी महिलाएं हैं, जिन्हें उनके पति, भाई, पिता ने सहयोग किया, जिसके दम पर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। पूनम शर्मा ने कहा कि राजनीति में आने वाली महिलाओं के प्रति समाज के लोग अलग नजरिया रखते हैं। चन्द्रा सिंधी ने कहा कि औरत के लिए बाधक औरत ही होती है। जबकि उन्हें एक-दूसरे की सहायक बनकर अपनी क्षमता और काबिलियत से दुनिया को रूबरू करवाकर देश को मजबूती प्रदान करनी चाहिए। कमला मित्तल ने महिलाएं हर भूमिका निभाती है।
सबसे बड़ा दोष जातिगत आधार पर वोट देना
इस मौके पर कार्यक्रम समन्वयक के तौर पर शंकरलाल परसावत ने महिलाओं को मोहरा नहीं बनकर अपने हक का पूर्ण उपयोग करने की सलाह दी। स्क्रीनिंग कमेटी के वकील मुस्ताक खान छोटी छापरी ने कहा कि पत्रिका का यह अभियान बेहद महत्वपूर्ण है। राजनीति में सबसे बड़ा दोष जातिगत आधार पर वोट देना है। अगर महिलाएं जागृत होकर राजनीति के दोष दूर करने का प्रयास करेंगी तो निश्चित तौर पर वे काफी हद तक दूर होंगे।
इस मौके पर उपस्थित सभी महिलाओं ने राजनीति को साफ स्वच्छ करने की शपथ ली। कार्यक्रम में विनिता लदनिया, संतोष भाटी, त्रिवेणी शर्मा, राधा झंवर, मंजू नागौरी, कलावती नागौरी, अर्शी खान, सरिता भार्गव, मनीषा भार्गव, राधा दलाल, शोभा सोनी, निकिता कुम्पावत, मेहजबीन बानो, मुनीबा खा, मुस्कान खान सहित अनेक महिलाएं उपस्थित थीं।
Published on:
03 Jun 2018 12:43 pm
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