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भागवत कथा में दिखे धर्म-संस्कृति और संस्कार के रंग

- आयोजन इसलिए ताकि व्यवसाय के साथ अध्यात्मिक कार्य भी अनवरत्त हो - इन दिनों डायमंड सिटी सूरत में मेड़ता-नागौर के प्रवासियों की भक्ति सिर चढ़कर बोल रही है

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भागवत कथा में दिखे धर्म-संस्कृति और संस्कार के रंग

मेड़ता सिटी. भागवत कथा में मौजूद श्रद्धालु।

मेड़ता सिटी.(नागौर). इन दिनों डायमंड सिटी सूरत में मेड़ता-नागौर के प्रवासियों की भक्ति सिर चढ़कर बोल रही है। राजस्थान से दूर रहते हुए यहां के लोग सूरत में पौष मलमास के दौरान भागवत कथा का आयोजन करवा रहे हैं। जिसमें धर्म-संस्कृति के साथ संस्कार के रंग देखने को मिल रहे हैं। मेड़ता और नागौर के प्रवासी यह आयोजन इसलिए करवा रहे हैं ताकि व्यवसाय के साथ अध्यात्मिक कार्य भी अनवरत्त चलता रहे।
मेड़ता हाल सूरत प्रवासी रामस्वरूप टाक ने बताया कि मेड़ता और नागौर क्षेत्र के प्रवासी कहीं पर भी हो वे अपने धर्म, संस्कृति तथा संस्कार नहीं भूलते। व्यापार इत्यादि के व्यवस्तम समय के बीच अध्यात्म, संस्कृति, संस्कार को बनाए रखने के लिए इन दिनों मेड़ता, नागौर सहित अन्य प्रवासियों के सहयोग से सूरत में सात दिवसीय भागवत कथा चल रही है। गुरुकृपा सेवा समिति के तत्वावधान में हो रही कथा में प्रखर राष्ट्रवादी राजस्थानी संत कृपाराम महाराज कथा का वाचन कर रहे हैं। जिसमें बड़ी संख्या में मेड़ता, नागौर सहित क्षेत्र के श्रद्धालु हिस्सा ले रहे हैं।
भाग्य के भरोसे ना रहे, पुरुषार्थ से सफल बनाए जीवन : संत

सूरत में कथा के तीसरे दिन बोलते हुए कथावाचक संत कृपाराम ने कहा कि केवल भाग्य के भरोसे नहीं बैठे रहे। मेहनत करें, सृजन करें। जिससे आपके भविष्य के साथ-साथ राष्ट्र का भी निर्माण हो सके। भाग्य को कोसने की बजाय पुरुषार्थ करके जीवन को सफल बनाए। संत कृपाराम महाराज ने कहा कि मारवाड़ी समाज के लोग कहीं पर भी हो, धन कमाने के साथ-साथ संस्कारों को भी जीवित रखते हैं।