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असमंजस : शिक्षा विभाग में एक तरफ मोबाइल पर बैन करने की तैयारी, दूसरी तरफ डिजिटल प्रवेशोत्सव का फरमान

प्रवेशोत्सव का प्रथम चरण 1& मई से हुआ शुरू, सत्र 2024-25 से डिजिटल प्रवेशोत्सव शुरू - शिक्षकों ने कहा - मोबाइल बैन के निर्णय का स्वागत, लेकिन गैर शैक्षणिक कार्यों से मिले मुक्ति

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नागौर. प्रदेश के शिक्षा मंत्री एक ओर स्कूलों में शिक्षकों के मोबाइल फोन बैन करने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग ने डिजिटल प्रवेशोत्सव का फरमान जारी किया है। डिजिटल प्रवेशोत्सव कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एंड्रॉइड मोबाइल में प्रवेशोत्सव एप्लीकेशन डाऊनलोड करके डोर टू डोर सर्वे करना होगा। इसके तहत प्रवेशोत्सव की जानकारी रजिस्टर की जगह अब डिजिटल एप्लीकेशन में दर्ज करनी होगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इससे शिक्षकों को दोहरा कार्य नहीं करना पड़ेगा। डिजिटल प्रवेशोतसव का प्रथम चरण 1& मई से शुरू हो चुका है।

इस प्रकार चलेगा प्रवेशोत्सव

शिक्षा विभाग ने सत्रारम्भ में चलाए जाने वाले प्रवेशोत्सव अभियान को लेकर एक पीपीटी जारी की है, जिसमें प्रथम प्रवेशोत्सव का प्रथम चरण में 1& मई से एक जुलाई तक चलाने के लिए कहा गया है, जिसमें हाउस होल्ड सर्वे/बच्चों का चिह्नीकरण/हार्ड केसेज की पहचान करनी है तथा इसके बाद 2 जुलाई से 17 जुलाई तक नामांकन अभियान चलेगा। वहीं प्रवेशोत्सव के द्वितीय चरण में 18 से 24 जुलाई तक शेष रहे बच्चों का चिह्नीकरण करने के लिए वापस हाउस होल्ड/हार्ड केसेज की पहचान का काम किया जाएगा तथा 25 से 16 अगस्त तक नामांकन अभियान का कार्य किया जाएगा।

गत वर्ष प्रदेश में गिरा था 9.59 फीसदी नामांकन

शिक्षा विभाग ने सत्र 2022-23 एवं 2023-24 में हुए नामांकन के आंकड़ों की सूची उपलब्ध करवाकर बताया कि पिछले साल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में नामांकन 9.59 प्रतिश गिर गया था। यानी वर्ष 2022-23 की तुलना में वर्ष 2023-24 में प्रदेश में 8 लाख, 20 हजार 652 विद्यार्थी कम हो गए थे। इसको ध्यान में रखते हुए इस बार नामांकन बढ़ाना है। नागौर जिले में पिछले साल 10.88 प्रतिशत नामांकन गिरने से 40 हजार से ज्यादा बच्चे कम हो गए थे। सबसे अधिक 14.03 प्रतिशत नामांकन दौसा जिले में गिरा था।

नामांकन कम होने का यह भी बड़ा कारण

शिक्षकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में नामांकन कम होने के पीछे बड़ा कारण शिक्षकों के पद रिक्त होना है। खासकर क्रमोन्नत विद्यालयों में 2 सत्र बाद भी पद स्वीकृत नहीं करने, डीपीसी व स्टाफिंग पैटर्न को समय पर पूरा नहीं करने व पद रिक्तता के बढ़ते ग्राफ के कारण सरकारी विद्यालयों के नामांकन में कमी आ रही है। सरकार की ओर से क्रमोन्नत विद्यालयों में व्याख्याता पद स्वीकृत किए जाकर सीधी भर्ती व पदोन्नति से भरे जाने चाहिए। पिछले 4 सत्र से बकाया चल रही डीपीसी व स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा की जाए तो पदरिक्तता की समस्या से भी निजात मिल सकती है।

मोबाइल बैन का निर्णय सराहनीय, लेकिन शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मिले मुक्ति

वर्तमान में शिक्षकों से अनेक प्रकार के गैर शैक्षणिक कार्य को करवाए जा रहे हैं, जिसके कारण शिक्षक अपने मूल कार्य अध्यापन से दूर हो रहे हैं। सरकार का शिक्षकों को विद्यालय समय में मोबाइल उपयोग पर प्रतिबन्ध लगाने का निर्णय सराहनीय है, लेकिन इसके साथ ही शिक्षकों से करवाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाना चाहिए। ताकि शिक्षक अपने मूल कार्य अध्यापन को पर्याप्त समय देकर बेहतर तरीके से कर सके। वर्तमान में शिक्षा विभाग ने डिजिटल प्रवेशोत्सव का फरमान जारी किया है, जो बिना मोबाइल के संभव नहीं हो सकेगा।
- बसन्त कुमार ’याणी, प्रदेश प्रवक्ता, राजस्थान वरिष्ठ शिक्षकसंघ, रेस्टा