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किसानों पर ‘राम’ और ‘राज’ दोनों की मार, क्राॅप कटिंग के अभाव में नहीं मिलेगा फसल बीमा योजना का लाभ

बारिश के अभाव में पकने से पहले सूखी फसलें, अब गिरदावरी व फसल कटाई प्रयोग करने की बजाय हड़ताल पल गए राजस्व कर्मचारी- अगले दस दिन में नहीं हुई क्रॉप कटिंग तो कट जाएंगे मूंग- किसानों को नहीं मिल पाएगा बीमा योजना का लाभ

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अगले दस दिन में नहीं हुई क्रॉप कटिंग तो कट जाएंगे मूंग

अगले दस दिन में नहीं हुई क्रॉप कटिंग तो कट जाएंगे मूंग

नागौर. जिले के किसानों पर इस बार 'राम' और 'राज' दोनों की मार पड़ रही है। पिछले एक महीने से बारिश नहीं होने से खरीफ की फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है। बारिश के अभाव में उत्पादन कम होने से किसानों को नुकसान होगा। ऐसे में उन्हें हल्की राहत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से मिल सकती है, लेकिन जब गिरदावरी व फसल कटाई प्रयोग करने का समय आया है तो राजस्व कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। अब यदि सरकार ने जल्द ही राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल को तुड़वाने का सफल प्रयास नहीं किया तो समय पर गिरदावरी और फसल कटाई प्रयोग (क्रॉप कटिंग) नहीं हो पाएगी, जिसके अभाव में किसानों को बीमा क्लेम भी नहीं मिल पाएगा। सबसे ज्यादा नुकसान मूंग की बुआई करने वाले किसानों को होगा, क्योंकि बारिश के अभाव में समय से पहले मूंग फसल की कटाई शुरू हो चुकी है और आगामी दस दिन में मूंग की पूरी कटाई हो जाएगी, उसके बाद यदि पटवारी या कृषि पर्यवेक्षक खेतों में जाएंगे तो भी उन्हें खेत खाली मिलेंगे।

प्रशिक्षण से नदारद रहे राजस्वकर्मी
जिले में गत 21 अगस्त से सांख्यिकी विभाग की ओर से कृषि पर्यवेक्षक, सहायक कृषि अधिकारी, पटवारी व भू-अभिलेख निरीक्षकों को तहसीलवार फसल कटाई प्रयोग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले में करीब 8500 हजार फसल कटाई प्रयोग होने हैं, उसी के आधार पर किसानों को फसल बीमा क्लेम दिया जाएगा। लेकिन राजस्व कर्मचारी (पटवारी व आरआई) पहले दिन ही प्रशिक्षण में शामिल हुए, इसके बाद वे हड़ताल पर चले जाने के कारण शामिल नहीं हुए।

हड़ताल नहीं टूटी तो हो जाएगा संकट
पिछले करीब एक महीने से बारिश नहीं होने से खरीफ फसलें झुलसकर नष्ट हो रही हैं। ऐसे में किसान बहुत ज्यादा मायूस नजर आ रहे हैं। किसानों को एक उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से क्लेम मिल जाएगा, लेकिन वो उम्मीद भी अब धूमिल होती नजर आ रही है। क्योंकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्लेम का आकलन फसल कटाई प्रयोग के आधार पर होता है और गिरदावरी व फसल कटाई प्रयोग राजस्वकर्मियों के अभाव में संभव नहीं है। यदि एक-दो दिन में हड़ताल नहीं टूटी तो किसानों का करोड़ों रुपए का नुकसान हो जाएगा। गौरतलब है कि जिले में करीब पांच लाख से अधिक किसानों ने फसल बीमा करवा रखा है और 12 लाख हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खरीफ की बुआई हो रखी है।

यह हो सकता है समाधान
- यदि सरकार चाहे तो मुख्य फसलों की क्रॉप कटिंग बिना गिरदावरी के ही की जा सकती है।
जिले की मुख्य फसल मूंग का फसल कटाई प्रयोग कृषि पर्यवेक्षकों को एक सितम्बर से पहले आवंटन कर दिया जाए, ताकि समय पर क्रॉप कटिंग प्रयोग संपादित किया जा सके।
- कृषि पर्यवेक्षकों को निर्देशित किया जाए कि मुख्य फसलों के लिए गिरदावरी की आवश्यकता नहीं है। बिना गिरदावरी के ही रेंडम नंबरों के आधार पर प्लॉट का चयन कर मूंग का फसल कटाई प्रयोग जल्द से जल्द पूरा करें।
- बीमा कंपनी के जिला प्रबंधकों को भी पाबंद किया जाए कि समय पर अपने प्रतिनिधि फसल कटाई प्रयोग में साथ रखें, ताकि किसी भी प्रकार की विवादित स्थिति उत्पन्न नहीं हो और फसल कटाई प्रयोग वास्तविक हो।

किसानों की चिंता हमें भी है, लेकिन...
राज्य सरकार ने ऑनलाइन गिरदावरी करने के लिए जो एप दिया है, उसमें कई टेक्नीकल कमियां हैं, जिन्हें सुधार करने के लिए हमने कई बार मांग पत्र दिए हैं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस एप से गिरदावरी व क्रॉप कटिंग करने के लिए समय बहुत अधिक लगेगा और नेटवर्क की समस्या भी आएगी। हम भी चाहते हैं कि इस बार अगेती फसलें होने के कारण गिरदावरी व क्रॉप कटिंग समय पर करना जरूरी है, नहीं तो किसानों को बड़ा नुकसान होगा। इसको लेकर हमने जिला कलक्टर को पत्र सौंपकर आग्रह भी किया है। जहां तक प्रशिक्षण लेने की बात है तो हम पिछले काफी समय से क्रॉप कटिंग कर रहे हैं, इसलिए उसमें दिक्कत नहीं आएगी, लेकिन जब तक राजस्वकर्मियों का आंदोलन समाप्त नहीं होगा, तब तक क्रॉप कटिंग नहीं हो सकती।
- बुधाराम जाजड़ा, जिलाध्यक्ष, पटवार संघ, नागौर