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खूब हुए ऐलान फिर भी पुलिस परेशान, बजट के अभाव में कैसे मिल पाए आराम

- जिले के अधिकांश थानों में पुलिसकर्मी व फरियादी के बैठने के लिए फर्नीचर तक नहीं -आठ-दस साल पहले जमीन मिली फिर भी नहीं बनी एक दर्जन चौकियां--किराए पर चल रही हैं अधिकांश चौकियां

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ऊंची दुकान-फीके पकवान

ऊंची दुकान-फीके पकवान, जिले के अधिकांश थानों पर यह कहावत पर सटीक बैठ रही है। नागौर (डीडवाना-कुचामन) जिले के कई थाने सुविधाओं को तरस रहे हैं। स्टाफ के बैठने के लिए कई थानों में तो कुर्सी तक नहीं है।

नागौर. ऊंची दुकान-फीके पकवान, जिले के अधिकांश थानों पर यह कहावत पर सटीक बैठ रही है। नागौर (डीडवाना-कुचामन) जिले के कई थाने सुविधाओं को तरस रहे हैं। स्टाफ के बैठने के लिए कई थानों में तो कुर्सी तक नहीं है। भामाशाह के भरोसे भले ही कुछ सीआई व थाना प्रभारी के कक्ष व्यवस्थित हो चुके पर बाकी थाने की भीतरी हालत कोई खास अच्छी नहीं है।

सूत्रों के अनुसार जिले के कोतवाली समेत कुछ थानों के सिवाय शेष थाने सुविधा की बाट जोह रहे हैं। कहीं फर्नीचर के साथ इनवर्टर की परेशानी है तो कहीं थाने के जवानों को रहने के लिए बैरक तक की सुविधा ढंग की नहीं है। कई थानों में क्वार्टर गिने-चुने हैं तो कहीं ये भी नहीं है। कोतवाली के अलावा शेष थानों के पास एक-एक गाड़ी है। अचानक वारदात होने पर कई बार पुलिस को बाइक पर भागना पड़ता है। कई थानों का माल-खाना मुसीबत बना हुआ है। जगह की कमी, यहां भी परेशान कर रही है।

थानों में स्टाफ की कमी तो पहले ही है, उस पर उनके बीस फीसदी को भी रहने की सुविधा नहीं मिल पा रही। गच्छीपुरा, मौलासर, खुनखुना सहित कई थानों में हालत और भी खराब है। पिछले दिनों थानों के बाहर बने स्वागत/आंगुतक कक्ष भी कारगर साबित नहीं हो पा रहे। यहां के लिए एक टेबल-कुर्सी मिले पर वे भी थाने में अन्य जगह काम में आ रहे हैं। थानों के विकास का बजट अटक कर रह गया है। भामाशाह के भरोसे वाटर-कूलर तो कहीं अन्य सुविधा का जुगाड़ किया जा रहा है। सदर के अलावा सभी थाने अपने भवन में संचालित हैं। सदर थाने के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया जारी है तो हाल ही में खुले साइबर थाने के लिए भी जमीन की तलाश की जा रही है।

धरी रह गई घोषणा, अब तक नहीं खुले थाने

करीब नौ महीने पहले बजट घोषणा में परबतसर एएसपी , डीडवाना-नावां में महिला थाना, निम्बीजोधा को क्रमोन्नत कर थाना बनाने की घोषणा हुई थी। इनमें से अब तक ठीक से कुछ नहीं खुला। कार्यालय व थाना खुल जाएंगे पर इनके भवन कब बनेंगे, कुछ नहीं कहा जा सकता। वो इसलिए कि आठ-नौ साल पहले के प्रस्ताव ही अभी तक सिर नहीं चढ़ पाए हैं।

प्रस्ताव तो बने पर....

सूत्रों का कहना है कि साधन-संसाधन बढ़ाने के लिहाज से प्रस्ताव तो खूब बने पर सिरे नहीं चढ़ पाए। जिले में आधे से अधिक चौकियां या तो किराए पर चल रही हैं या फिर किसी टूटे-फूटे सरकारी भवन में। अधिकारियों के आवास, वाहनों का गैरेज ही नहीं हथियारों के भण्डार का स्टोर भी अब तक धरातल पर नहीं उतर पाया है। प्रस्ताव मंजूर भी हुए, अधिकांश में जमीन भी है पर कई साल से बजट नहीं मिला।

तीन चौकी किराए पर तो 19 सरकारी भवन में

जिले की तीन पुलिस चौकी किराए के मकान में चल रही हैं तो 19 सरकारी भवन में। इसके अलावा 15 अन्य भवन में। करीब एक दर्जन के पास जमीन उपलब्ध है। भवन बनना है, लेकिन ये बने कैसे, बजट ही नहीं है। प्रस्ताव स्वीकृत होने के नौ-दस साल बाद भी पुलिस चौकी बेतरतीब तरीके से चलाई जा रही हैं।

गाडि़यां तक भगवान भरोसे

पुलिस की गाडिय़ों की हालत भी खास अच्छी नहीं है। अधिकांश थानों के पास एक-एक गाड़ी हैं वो भी बरसों पुरानी। चुनिंदा थानों के पास दो अच्छे वाहन हैं। इनके लिए भी कई बार प्रस्ताव बनाकर भेजे गए पर इक्का-दुक्का गाड़ी किसी साल में मिल जाए, इसे ही काफी मान लिया जाता है। अपराधियों की अत्याधुनिक गाडिय़ों का पीछा करने में पुलिस के वाहन हांफ रहे हैं।

दस-दस साल बाद भी...

थांवला थाने की हरसौर चौकी, सरकारी भवन में है। जमीन उपलब्ध है पर वर्ष 2014 में स्वीकृत प्रस्ताव अब तक रंग नहीं ला पाया। यही हाल पुलिस चौकी नावां, कुचेरा, निम्बी जोधा, लौहारपुरा, दिल्ली गेट (कोतवाली) रोल, बालिया (डीडवाना), सुद्रासन (मौलासर), कुचामन, मंगलाना (परबतसर), मेड़तासिटी का आलम यही है। भूमि उपलब्ध है, भवन बनना है पर यह कोशिश धरी है। किसी को आठ-नौ साल से इंतजार है तो किसी को पांच साल से। कोई नगरपालिका के भवन में चल रही है तो कोई किराए के मकान में। पांच चौकियों को अभी तक जमीन तक नहीं मिली है। हथियारों के भण्डार के लिए स्टोर व वाहनों की सुरक्षा व रखरखाव के लिए गैरेज बनाने का प्रस्ताव वर्ष 2015 में ही स्वीकृत हो चुका है। पुलिस लाइन में इसके लिए जमीन भी है, बावजूद इसके आठ साल बाद भी ये नहीं बन पाए हैं।

कार्यालय/आवास की जमीन पर कब बनेंगे भवन

मूण्डवा सीओ कार्यालय की बात हो या अजा/जजा प्रकोष्ठ उपाधीक्षक कार्यालय की, प्रस्ताव तो कब का स्वीकृत है, जमीन भी है पर बने कैसे? यही हाल एएसपी नागौर समेत कई वृत्ताधिकारियों के आवास, कुचामन एएसपी के प्रशासनिक भवन व आवास के नाम पर जमीन ही है। कुछ ऐसा ही हाल पुलिस लाइन नागौर में पुलिस कल्याण केन्द्र/कल्याण संकुल, सीओ कार्यालय लाडनूं का है।

इनका कहना

चौकियां बनाने सहित अन्य सुविधा के संदर्भ में फिर से मुख्यालय को लिखा जाएगा, छोटी-मोटी सुविधा की कमी इक्का-दुक्का थानों में हो सकती है।

-ओमप्रकाश गोदारा, सीओ नागौर।