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Nagaur patrika…गिनाणी तालाब में छोड़ा जा रहा नाले का गंदा पानी, और डाला जा रहा मलबा…VIDEO

नागौर. गिनाणी तालाब में नाले का गंदा पानी छोड़े जाने की वजह से इसका पानी पूरी तरह से काला हो चुका है। इसके साथ ही इसमें क्षेत्र की कई छोटी नालियों के मार्फत गंदा पानी सीधा इसमें जा रहा है। इसके चलते इसका पानी इतना ज्यादा जहरीला हो चुका है कि पशुओं तक को नहीं […]

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नागौर. गिनाणी तालाब में नाले का गंदा पानी छोड़े जाने की वजह से इसका पानी पूरी तरह से काला हो चुका है। इसके साथ ही इसमें क्षेत्र की कई छोटी नालियों के मार्फत गंदा पानी सीधा इसमें जा रहा है। इसके चलते इसका पानी इतना ज्यादा जहरीला हो चुका है कि पशुओं तक को नहीं पिलाया जा सकता है। इस वजह से इस तालाब की जैविक प्रकृति ही पूरी तरह से बदल चुकी है। इसके चलते तालाब के साथ ही इसके आसपास के करीब एक किलोमीटर के एरिया क्षेत्र के भूजल गुणवत्ता भी संकट में है। गंदे पानी की आवक के कारण जहां आसपास के लोगों का रहना मुश्किल होने लगा है, वहीं वहीं पर्यावरण जागरुकता का शोर मचाने वालों ने भी चुप्पी साध रखी है।
खत्म हो रहा गिनाणी तालाब
गंदगी के चलते यह परंपरागत जलस्रोत भी अब विषैले मच्छरों की फैक्ट्री बन गया है। बताते हैं कि इसके आसपास करीब साढ़े तीन हजार से ज्यादा घर हैं। इन घरों का गंदा पानी भी छद्म रूप से बनी नालियों के रास्ते सीधा गिनाणी तालाब में गिर रहा है। हजारों घरों के पानी के साथ ही नाले के आ रहे गंदे पानी के कारण अब यह पूरा तालाब लगभग खत्म हो चुका है। यह पूरी तरह से एक नाले के तौर पर बदल चुका है। स्थिति इतनी ज्यादा खराब हो गई है कि तालाब के किनारे दुर्गन्ध के चलते खड़ा तक होना मुश्किल हो गया है।
तालाब के पेटे में डाला जा रहा कचरा
गिनाणी तालाब के किनारों पर चारों ओर कचरे के ढेर लगे हुए हैं। तालाब के एक सिरे से लेकर इसके अंतिम सिरे तक विभिन्न प्रकार की गंदगी के ढेर लगे हैं। ियह कचरा पानी में रहने के कारण लगातार सड़ता रहता है। इसके सडक़ के कारण तालाब के आसपास खड़े रहना मुश्किल हो गया है। तालाब की साफ-सफाई होने की स्थिति में इसके किनारों पर बैठने के लिए लोगों को एक बेहतर जगह मिल सकती है।
पानी के लिए गंदगी व कचरा होता है खतरनाक
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण का मुख्य स्रोत गारबेज यानि की जो पानी में कूड़ा-करकट, गन्दगी मिला दी जाती है। इस गंदगी में भारी धातुएँ जैसे निकिल, क्रोमियम, कोबाल्ट, कैडमियम, लेड भी पाये जाते हैं। यह काफी हानिकारक हैं। इन धातुओं के कारण फाइटो टॉक्सीसिटी लेवल अधिक हो जाता है। इससे यह पेड़ों और मनुष्यों में रोग उत्पन्न करते हैं। गारबेज के सडऩे की स्थिति में विखण्डन होने पर गैसें निकलती हैं। वातावरण में खतरनाक प्रभाव छोडऩे के साथ ही जो दुर्गन्ध उत्पन्न कर, पर्यावरण को भी प्रदूषित करती हैं्र। गारबेज के जल में मिलने से जल पूरी तरह से प्रदूषित हो जाता है।
गंदे पानी की आवक को रोकना होगा
गिनाणी तालाब को फिर से इसके मूल स्वरूप में लाने के लिए काफी प्रयास किए गए हैं। पहला काम इसमें गंदे पानी की आवक को रोकना होगा। यह तालाब काफी बड़े एरिया में है। ऐसे में इसका पानी पूरी तरह से साफ हो गया तो फिर निश्चित रूप से आसपास का भूजल भी अच्छी स्थिति में हो जाएगा।
तालाब को फिर से स्वच्छ बनाएं
पहले गिनाणी तालाब का पानी बेहद मीठा था। दूर-दूर से लोग आते थे। यहां का पानी पीने के लिए लोग ले जाते थे। अब तालाब का ऐसा हो गया कि जानवर तक नहीं पी सकते।
बाबूलाल, गिनाणी तालाब
तालाब में गंदगी की वजह से पूरे माहौल में दुर्गन्ध बनी रहती है। आसपास भी गंदगी रहती है। इसकी वजह से रहना मुश्किल हो गया है।
जगदीश प्रसाद अग्रवाल, गिनाणी तालाब
गिनाणी तालाब को सीधा नाला का पानी जा रहा है। नाले के पानी में तमाम गंदगियांं होती है। इसकी वजह से इसका पूरा पानी खराब हो चुका है।
मो. इकबाल, गिनाणी तालाब
तालाब के किनारों पर मलबा डाला जा रहा है। गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। इनको रोकने वाला कोई नहीं है। यहां पर साफ-सफाई होनी चाहिए।
अनीसा, गिनाणी तालाब
पहले इस तालाब के किनारे मेला लगता था। यहां पर लोग भोजन भी तैयार करते थे। अब हालात बदल चुके हैं। इसके पानी की गंदगी से रहना मुंश्किल है।
रईसा, गिनाणी तालाब
तालाब में केवल गंदा पानी ही नहीं डाला जा रहा है, बल्कि अन्य कई सा्रेतों से भी इसमें गंदे पानी की आवक हो रही है। इसके चलते खतरनाक मच्छर हो चुके हैं।
उमर फारुक अंसारी, गिनाणी तालाब