
Dirty water spread in the street from sewerage jam in Makrana
मकराना. ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2018’ में भाग ले रहा शहर स्वच्छता में नम्बर वन का मुकाम कैसे हासिल करेगा? शहर में बदहाल साफ-सफाई व्यवस्था के दुरूस्तीकरण को लेकर नगरपरिषद प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधि भी कुंभकरण की नींद सो रहे हैं। शहर में बदहाल सफाई व्यवस्था के दुरूस्तीकरण को लेकर नगरपरिषद के स्थाई लगभग 150 एवं ठेकेदार के लगभग 50 अर्थात कुल 200 सफाईकर्मियों के सालाना वेतन पर 5.25 करोड़ रुपए से अधिक के वेतन पर खर्च करने के बावजूद साफ-सफाई कार्य में नगरपरिषद प्रशासन सहित सभापति एवं पार्षदों के कथित लापरवाही बरतते हुए सफाई कार्य की प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं करने से कई कचरा संग्रहण पॉइंट पर सफाईकर्मियों के नहीं पहुंचने से वहां लगे कचरे के ढेर से उठ रही सड़ांध व वहां विचरण कर रहे आवारा पशुओं में दिन में कई बार होने वाली भिड़ंत लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। नगरपरिषद क्षेत्र के सभी 40 वार्डो के सभी गलियों एवं प्रमुख मार्गो में नियमित रूप से सफाईकर्मियों के नहीं पहुंचने से कहीं जाम सीवरेज, नाले एवं नालियों से मार्ग में कीचड़ एवं गंदगी फैले रहने तो कहीं यहां कचरे के ढेर का साम्राज्य फैला होना आम बात है।
जागरूकता को लेकर नारे लिखी दीवार को भी शहरवासियों ने पीक (थूक) कर गंदा कर दिया। इसी तरह कई बार देखने में आया है कि कचरा संग्रहण पॉइंट से सफाईकर्मियों के कचरा उठाने के पश्चात लोग वहां कचरा डाल देते हैं जिससे भी दिनभर वहां कचरा पड़ा रहता है। इसी तरह स्वच्छ अभियान 2018 के तहत शहरवासियों को साफ-सफाई को लेकर जागरूक करने के तहत नगरपरिषद प्रशासन की ओर से गत शनिवार को ही शहर के विभिन्न स्थानों पर दीवारों पर नारे लिखाए गए है, लेकिन इन दीवारों को भी लोगों ने पान मसाला की पीक (थूक) कर गंदा कर दिया है।
इनका कहना है
जहां भी सीवरेज में रुकावट है उसे दूर किया जाएगा वहीं पूरा शहर स्वच्छ एवं हरा भरा रहे इसके तहत जहां कहीं भी आवश्यकता है वहां नाली एवं सडक़ निर्माण करवाया जाएगा।
अनिल जाटव, आयुक्त नगरपरिषद
स्वच्छ अभियान 2018 में शहर पहली पायदान पर आए इसको लेकर प्रयासरत है।
शौकत अली गौड़, सभापति नगरपरिषद
Published on:
07 Jan 2018 06:05 pm
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