
Rabavi Bhadana will now also be seen in dress code
नागौर. जिले के राजकीय स्कूलों की सूरत बदलने की मुहिम में अब शहर के लोग भी जुडऩे लगे हंै। इस संबंध में शुक्रवार को शहरवासियों से बातचीत हुई तो उनका कहना था कि यह काम तो शासन को पहले ही कर देना चाहिए था। राजकीय विवेकानंद मॉडल स्कूल में भी सभी शिक्षक ड्रेस कोड में आते हैं तो फिर अन्य राजकीय विद्यालयों के संस्था प्रधान व शिक्षक क्यों नहीं ड्रेस कोड में रह सकते हैं। ऐसा हुआ तो फिर निश्चित रूप से राजकीय स्कूलों में भी बेहतर वातावरण का निर्माण होगा, और सूरत भी बदलेगी।
जनता कहिन...
राजकीय शिक्षण संस्थानों में ड्रेस कोड का प्रावधान अनिवार्य रूप से कर देना चाहिए। इससे न केवल विद्यार्थियों को भी सुखद एहसास होगा, बल्कि उनके मष्तिस्क पर भी बेहतर प्रभाव पड़ेगा। विद्यार्थियों में भी नैतिक रूप से अनुशासन की भावना उपजेगी। यही नहीं, इससे सरकारी एवं निजी के मध्य भेद भी खत्म होने लगेगा। शिक्षक एवं विद्यार्थियों में भी गुरु व शिष्य की आदर्श भावना अपने आप स्थापित होने लगेगी।
रघुनाथ शर्मा, लोहियो का चौक
शिक्षक स्कूल में पढ़ाने आते हैं तो फिर उन्हें केवल शैक्षिक हित का ध्यान ही रखना चाहिए। ड्रेस कोड पहनने से उनकी गरिमा भी बढ़ेगी। नए सत्र से तो शिक्षकों को इस पर अमल भी करना चाहिए। पूर्व में भी सरकार इस पर खुद मंथन कर चुकी है। इसको लागू होना था, लेकिन किन्हीं कारणों से इस पर अमल नहीं हो पाया। सरकार को अब इसे अनिवार्य कर देना चाहिए। पहले ही यह हो जाता तो आज राजकीय स्कूलों की स्थिति बेहतर होती।
संजय शर्मा, चेनार
ड्रेस कोड से स्वच्छ वातावरण
शैक्षिक विकास ही देश का आधार स्तंभ है। आज के विद्यार्थी ही आने वाले समय में देश की व्यवस्थाओं में विभिन्न भूमिका का निर्वहन करेंगे तो फिर देश के भविष्य हित में संस्था प्रधानों एवं शिक्षकों को ड्रेस कोड से परहेज नहीं करना चाहिए। शिक्षक व विद्यार्थी ड्रेस कोड में साथ नजर आएंगे तो फिर पढ़ाई के लिए भी बेहतर वातावरण का निर्माण होगा।
किरण, सोनीजी की वाड़ी
Published on:
19 May 2018 11:08 am
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