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यह कैसा खेल, आवेदन किया 89 बच्चों ने, 814 को दिया प्रवेश

शिक्षा विभाग का आरटीई पोर्टल दे रहा गलत जानकारी

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Education Departments RTE portal giving wrong information

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देवेन्द्र प्रताप सिंह/नागौर. कभी आपने ऐसा देखा या सुना है कि प्रवेश के लिए आवेदन करने वालों की संख्या कम हो और प्रवेश पाने वालों की संख्या कई गुना अधिक। शिक्षा विभाग का आरटीई पोर्टल इन दिनों कुछ ऐसी ही जानकारी दे रहा है। जिले में आरटीई के तहत रजिस्टर्ड निजी स्कूलों में प्रवेशित बच्चों की विभिन्न जानकारी देने वाला आरटीई पोर्टल इन दिनों जिम्मेदारों द्वारा अपडेट नहीं करने के कारण न सिर्फ लोगों को गलत जानकारी दे रहा है, बल्कि पोर्टल को अपडेट करने वाले जिम्मेदारों की लापरवाही को उजागर कर रहा है। उक्त पोर्टल पर जिले के निजी स्कूलों में आरटीई के तहत जरूरतमंद बच्चों द्वारा प्रवेश के लिए आवेदन करने, कितने स्कूलों ने नि:शुल्क प्रवेश दिया, किस ब्लॉक से कितने बच्चों ने प्रवेश के लिए आवेदन किया है व कितने बच्चों को प्रवेश मिला आदि की जानकारी दर्शाई जाती है। वर्तमान में यह पोर्टल बता रहा है कि जिले के तीन ब्लॉक के 15 स्कूलों में प्रवेश के लिए मात्र 89बच्चों ने आवेदन किया है, जबकि प्रवेशित बच्चों की संख्या 814 बताई जा रही है।

प्रवेश प्रक्रिया में उलझकर प्रवेश से वंचित रह गए

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश देने को लेकर सरकार ने नियमों में फेरबदल करके सैकड़ों जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा से दूर कर दिया है। नियमों में फेरबदल करने से सैकड़ों बच्चे प्रवेश से वंचित हो रहे थे, लेकिन इस बार से प्रवेश की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन करने पर यह आंकड़ा बढ़ गया है। यदि प्रदेश स्तर की बात करें तो हजारों ऐसे बच्चे हैं जो नियमों व ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में उलझकर प्रवेश से वंचित रह गए हैं। सरकार का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। आंकड़ों में वर्ष 2014-15 में प्रदेश में 174500 बच्चों को प्रवेश दिए जाना बताया जा रहा है, वहीं वर्ष 2016-17 में यह संख्या घटकर मात्र 80153 रह गई है।