
ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर झूठे मैसेज तो कॉल के जरिए ना-ना प्रकार का झांसा देकर साइबर ठगी का कारोबार फलता-फूलता जा रहा है। ऐसे मामलों की संख्या चौगुनी हो गई है, वो तो तब है जबकि करीब पचास फीसदी पीडि़त तो थाने तक ही नहीं पहुंचते
नागौर. ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर झूठे मैसेज तो कॉल के जरिए ना-ना प्रकार का झांसा देकर साइबर ठगी का कारोबार फलता-फूलता जा रहा है। ऐसे मामलों की संख्या चौगुनी हो गई है, वो तो तब है जबकि करीब पचास फीसदी पीडि़त तो थाने तक ही नहीं पहुंचते। इस साल के शुरुआती दस महीने में साइबर ठगी के 66 मामले दर्ज हुए। असल में जरा सी सावधानी नहीं बरतने पर लोग खुद ही आगे होकर अपनी रकम गंवा रहे हैं। चार साल में पचास साइबर ठग गिरफ्तार हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार जिले में रोजाना औसतन साइबर ठगी की दो वारदात होती हैं। ये तो वो हैं जिनमें रकम अधिक नहीं रही या फिर जो वारदात बाजार तक पहुंच गई। थानों तक पहुंचने वाली वारदात का औसत तो इससे काफी अलग है। दस महीने में हुए 66 साइबर क्राइम के मामलों का औसत ही निकालें तो चार-पांच दिन में एक ही मामला दर्ज हो रहा है। असल में साइबर ठगी/धोखाधड़ी तो इसके मुकाबले कई गुना अधिक हो रही है। पुलिस तक मामला पहुंचाने की झिझक कहें या फिर समाज में बदनामी के डर से ठगी के शिकार थानों तक पहुंचते ही नहीं हैं। बैंकिंग फ्रॉड के बाद सबसे ज्यादा ठगी के मामले ऑनलाइन शॉपिंग और सोशल मीडिया से संबंधित हैं। लालच देने के अनगिनत तरीके साइबर ठग आजमा रहे हैं, जो लालच में नहीं फंसते उन्हें डर दिखाकर ठगा जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2019 में साइबर क्राइम के 16 मामले दर्ज हुए थे, जबकि वर्ष 2020 में केवल 18 मामले थानों तक पहुंचे। वर्ष 2021 में ये 26 हो गए। यानी इन तीन सालों में थानों तक पहुंचने वाले मामलों की कुल संख्या साठ थी, जबकि इस साल के दस महीनों में ही ऐसे 66 मामले थानों तक पहुंचे। वर्ष 2019 के 16 मामलों में से नौ मामलों में चालान पेश हो पाया तो पांच में एफआर लग गई, जबकि दो अभी भी पेण्डिंग चल रहे हैं। वर्ष 2020 में नागौर जिले में 18 में से पांच मामले में चालान पेश हुआ, जबकि 10 में एफआर लगी और तीन अभी भी पेण्डिंग हैं। वर्ष 2021 में 26 मामले दर्ज हुए, इनमें सात में चालान पेश हुआ तो 19 मामलों में एफआर लगी। इस बरस में अक्टूबर तक 66 मामले दर्ज हुए, इनमें 15 में चालान पेश हुए तो चार में एफआर लगी है।
चार साल में पचास की गिरफ्तारी
सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2019 से अब तक साइबर ठगी के मामलों में पचास शातिर गिरफ्तार हो चुके हैं। वर्ष 2019 में 19, वर्ष 2020 व 2021 में सात-सात तो इस साल अक्टूबर तक 17 साइबर ठग गिरफ्तार किए गए हैं। असल में साइबर ठगी जामताड़ा समेत अन्य दूर बैठे-बैठे अपनी कारगुजारी करते हैं। साइबर क्राइम के नित नए गुर से उनको पकडऩा भी एक बड़ा काम हो गया है।
ठगी के तरीके बेशुमार
कहीं बैंक खातों में सेंध लगाई जा रही है तो कहीं एटीएम-वेबसाइट ही नहीं बैंक सर्वर को हैक कर चपत लगाने के अपराध बढ़ रहे हैं। सिम बंद करने की बात कहकर मोबाइल कंपनी के प्रतिनिधि या एकाउण्ट डिटेल की बात पर बैंककर्मी बनकर खाते संबंधी जानकारी लेकर लाखों की चपत लगाई जा रही है। इंटरनेट के माध्यम से पैसों के लेन-देन से जुड़े अपराध बढ़ रहे हैं। कभी मोबाइल पर सूचित किया जाता है कि आपके खिलाफ साइबर क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज हुई है, गिरफ्तारी से बचने के लिए फलां-फलां नंबर पर फोन करें तो कभी बिजली काट दी जाएगी या इंश्योरेंस पॉलिसी बंद कर दी जाएगी। यह डर दिखाकर ओटीपी कोड मांंगा जाता है और मोटी रकम की चपत लगा दी जाती है। कभी इनाम निकलने के नाम पर तो कभी सस्ता लोन देने के नाम पर यह ठगी बदस्तूर जारी है।
बदनामी की आड़ में भी
नए-नए ऐप आ रहे हैं, तरह-तरह के तरीकों से न्यूड युवती अथवा अन्य घालमेल के जरिए गलत पिक्चर को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी तो कभी बातों में तैयार अश्लील बातचीत का ऑडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर ठगी की जा रही है। ये जालसाज कभी किसी वेबसाइट के कर्मचारी बनकर और कभी डिलीवरी सर्विसेज का हिस्सा बनकर संपर्क करते हैं और लोग आम तौर पर इनके झांसे में आ जाते हैं। अपने लाखों का नुकसान कर बैठते हैं।
मानसिक नुकसान के तरीके भी
कभी फेसबुक हैक कर तो कभी दूसरे तौर-तरीकों से सोशल साइट के जरिए भी पैसे मांगे जाते हैं। और तो और सोशल साइट में गलत फोटो अथवा फेसबुक हैक कर उसके प्रोफाइल में अश्लील फोटो ही नहीं व्हाटसएप के जरिए गलत संदेश देकर भी लोगों को परेशान किया जा रहा है।
इनका कहना
साइबर क्राइम बढ़ रहा है। तरह-तरह के प्रलोभन देकर ठगी कर रहे हैं। सचेत रहने की जरुरत है, डर अथवा लालच के चलते ओटीपी बताने जैसी कुछ असावधानी बरतने से लोग शिकार होते हैं। पुलिस भी साइबर क्राइम से बचने के लिए लोगों को जागरूक कर रही है। जिले में साइबर थाना भी जल्द खुल रहा है।
-राममूर्ति जोशी, एसपी, नागौर।
Published on:
08 Nov 2022 08:38 pm
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