
दिल्ली दरवाजा के बाहर गणपति मंदिर
रवीन्द्र मिश्रा
नागौर. पुराणों में उल्लेख व सनातन धर्म में सभी देवी -देवताओं में भगवान गणपति को प्रधान माना गया है। सभी कार्यों को सिद्ध करने वाले भगवान गणपति को गणाध्यक्ष नाम से भी जाना जाता है। नागौर शहर अपने दरवाजों पर स्थापित गणेश मंदिरों के लिए भी प्रदेश में अलग ही पहचान रखता है। यहां के मंदिरों में शहरवासी किसी काम से शहर से बाहर जाते समय सिर झुका कर प्रणाम करते हैं, ताकि कार्य में सफलता मिले। इसीलिए दरवाजे से बाहर निकलते ही इन मंदिरों को स्थापित किया गया है।
नागौर के इन छह दरवाजों पर स्थापित है गणपति
नकास दरवाजा, नया दरवाजा, माही दरवाजा, दिल्ली दरवाजा, अजमेरी दरवाजा, कुम्हारी दरवाजा के बाहर गणपति मंदिर है। यहां विराजमान भगवान गणेश को हाथ जोड़ने के बाद ही शहरवासी अपने कार्य के लिए शहर में या शहर से बाहर जाते हैं। नकास दरवाजा और नया दरवाजा के गणेश मंदिर पूर्व मुखी है। जबकि दिल्ली दरवाजा पूर्व मुखी, अजमेरी दरवाजा, कुम्हारी दरवाजा के गणपति उत्तरमुखी है।
पृथ्वीराज चौहान के समय बने ये दरवाजे और गणेश मंदिर
शहर के इतिहास के जानकार गोपाल अटल ने बताया कि सन् 1100 के करीब अजमेर के राजपृथ्वीराज चौहान ने शहर को बसाया। उस समय शहर परकोटे के अन्दर शहर बसा हुआ था। शहर के बाहर जाने के लिए दरवाजों का निर्माण कराया गया। उसी समय कारीगरों ने खाली समय में दरवाजों के पास गणपति मंदिरों का भी निर्माण किया। शहर का कोई व्यक्ति या राजा जब इन दरवाजों से बाहर निकलते तो सबसे पहले यहां विराजित गणपति को नमन कर आगे प्रस्थान करते थे। इससे उन्हें कार्य में सफलता मिलती थी। पहले मुगलकाल में राजधानी आगरा था इसलिए आगरा-दिल्ली जाने के लिए दिल्लीगेट व अजमेरी गेट से ही बाहर निकला जाता था तथा व्यापारीवर्ग दक्षिण दिशा में ज्यादा जाते थे। इसलिए दक्षिण दिशा में नकास दरवाजा बनाया यहां भी गणपति का मंदिर स्थापित है। अटल बताते है कि लोग समस की बारी को भी दरवाजा मानते है, लेकिन यह महिलाओं के लिए समस तालाब से पानी लाने के लिए रास्ता खोला गया था। स्टेट के समय सुरक्षा की दृष्टि से गांधी चौक में हाथीपोल, नाहरपोल व त्रिपोलिया का निर्माण करवाया गया। इनमें से आज लोगों की आवाजाही है।
माही दरवाजा पर नया बना है गणपति मंदिर
लौहारपुरा इलाके में स्थित माही दरवाजा से लोगों की ज्यादा आवाजाही नहीं थी। इसके बाहर थली क्षेत्र होने से मरूस्थलीय धोरे थे। मुलतान से आए लोगों को भी इधर ही बसाया गया था। स्टेट के समय यहां गणेश प्रतिमा स्थापित नहीं थी। कुछ वर्षों पहले ही यहां भगवान गणेश का मंदिर बनाकर पूजा-अर्चना शुरू की गई है।
दिल्ली दरवाजा के बाहर बाल गणपतिदिल्ली दरवाजा नागाैर का दिल्ली से संबंध बताता है। दरवाजे का नाम दिल्ली से घनिष्ठ संबंधों के चलते रखा गया था। दरवाजे के बाहर विराजित गणेश बाल गणपति है। मंदिर में शिवलिंग भी मौजूद है। बाल स्वरूप के साथ शिव की पूजा का फल मिलता है। यह रूप व्यक्ति को आगे बढाने की क्षमता दर्शाता है। यहां का मंदिर गोल घुमटींनुमा मंदिर है। गजानंद की सेवा यहां के व्यापारी वर्ग ही करते हैं। शिवलिंग होने के कारण परंपरागत पूरी फेरी नहीं लगाकर आधी ही लगती है। मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में आस्था है कि यहां मनोकामना पूरी हाेती है।
गणेशचतुर्थी पर भक्ति में लीन रहता है शहर
शहर के प्रत्येक गली मोहल्ले में भगवान गणेश और भैरूजी के मंदिर है। ये दोनों देव शहरवासियों की रक्षा के साथ ही सुखसमृद्धि है। गणेश चतुर्थी पर प्रत्येक दरवाजों पर स्थापित गणेश मंदिरों में अभिषेक, पूजा -अर्चना व भजन संध्याओं का आयोजन होता है।
Published on:
30 Aug 2022 11:40 pm
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