
यूनाइटेड किंगडम (यूके) की राजधानी लंदन में शनिवार को राजस्थान के लोक नृत्य घूमर की धूम रही। प्रसिद्ध राजस्थानी लोक गायिका व मरू कोकिला सीमा मिश्रा की गायिकी ने प्रवासी राजस्थानियों को नाचने पर मजबूर कर दिया। राजस्थान चैरिटेबल ट्रस्ट यूके की ओर से आयोजित राजस्थानी लाइव कॉन्सर्ट ‘घूमर’ ने लंदन को राजस्थान के सांस्कृतिक रंगों से भर दिया। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल राजस्थानी संस्कृति और मूल्यों को प्रदर्शित करना था, बल्कि आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के सपनों को साकार करने के लिए फंड्स जुटाना भी था।
20 जुलाई को भारतीय समयानुसार शाम 7.30 शुरू हुआ घूमर कार्यक्रम तड़के तक चला । मशहूर गायिका सीमा मिश्रा ने अपनी टीम के साथ राग - रागिनी का ऐसा समां बांधा कि कार्यक्रम में भाग लेने वालों के पैर अनायास ही उठने लगे और सभी राजस्थानी रंगों में रंगे नजर आए। घूमर कार्यक्रम में संगीत, नृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियों का अद्भुत संगम देखने को मिला।
संस्था की मीडिया प्रभारी रचना ढाका और क्वीन अवार्ड विजेता श्याम बजाज ने बताया कि यह विदेशी धरती पर अब तक का सबसे बड़ा रचनात्मक और सांस्कृतिक राजस्थानी आयोजन रहा, जिसमें करीब एक हजार से अधिक लोगों ने शिरकत की। बच्चों के लिए विशेष मनोरंजन और अन्य गतिविधियां आयोजित की गईं। आयोजन को चार चांद लगाने का काम स्वादिष्ट भारतीय स्ट्रीट फूड और हेरिटेज स्टॉल्स ने किया। उन्होंने बताया कि आयोजन की सफलता का श्रेय अतिथि कलाकार और वालंटियर्स को है, जिनमें कलाकार सीमा मिश्रा, की बोर्ड प्लेयर हेमंत डांगी, गिटारवादक संजय माथुर के साथ नागौर के फरड़ोद निवासी व संस्था के सरंक्षक प्रहलाद फरड़ौदा, सलाहकार हनवंतसिंह राजपुरोहित, धीरेन्द्र डांगी व रामनरेश सोनी रहे। इसके साथ ट्रस्टी सुरेश कुमार, अनिल कुल्हार, चारुलता राजपुरोहित व सुरजीत सिंह ढाका एवं वालंटियर्स डॉ रामचंद्र घासल, अमित चौधरी, अतुल कुमार, नरेंद्र मंडीवाल रहे। सजावट दशरथ जोशी व पूजा जोशी ने की। प्रतियोगिताओं के निर्णयक में अंजू कुल्हर, मोनिका डोटासरा व सूर्या सोनी रहे। अन्य गतिविधियां एवं मोराल बूस्टर का काम हनवंत राजपुरोहित, मितेश राजपुरोहित, बिंदु चौधरी, सुमन कस्वां व बबिता चाहर ने किया।
राजस्थान चैरिटेबल ट्रस्ट यूके का मुख्य उद्देश्य भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को बेहतर शिक्षा और संसाधन उपलब्ध कराना है। इसके अलावा, ट्रस्ट यूके में राजस्थानी संस्कृति का प्रचार-प्रसार भी करता है, ताकि लोग हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से परिचित हो सकें। आयोजकों ने बताया कि भारत के ग्रामीण इलाकों में सही मार्गदर्शन और समर्थन के अभाव में कई होनहार छात्र अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाते। इस कार्यक्रम से जुटाए गए फंड्स का उपयोग इन्हीं छात्रों की शिक्षा और विकास के लिए किया जाएगा। भारत के ग्रामीण इलाकों में जीवन की कठिनाइयों को देखते हुए, यह ट्रस्ट वहां के बच्चों और सरकारी स्कूलों को तकनीकी संसाधन और एक्सपोजर प्रदान करता है, जिससे वे आधुनिक दुनिया से जुड़ सकें।
Published on:
22 Jul 2024 11:50 am
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