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किसानों को फसल बीमा क्लेम देने में सरकार उदासीन, दो महीने से टाल रहे स्टेट कमेटी की बैठक

फसल बीमा को लेकर राज्य स्तरीय कमेटी की बैठक दो महीने बाद भी नहीं हो पाई, नागौर के सैकड़ों किसान दो-तीन साल से कर रहे विवादों का निपटारा होने का इंतजार, बीमा कम्पनी ने वाजिब प्रकरणों पर लगा दी आपत्ति

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फसल खराबा होने के बावजूद क्लेम नहीं

फसल खराबा होने के बावजूद क्लेम नहीं

नागौर. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों से प्रीमियम वसूलने में एक दिन की भी देरी नहीं करने वाली कम्पनियों क्लेम देने में महीने नहीं सालों का समय लगा रही हैं। जिले के कई किसानों को खरीफ 2023 का क्लेम नहीं मिला है तो कई किसान ऐसे भी हैं, जो 2021 व 2022 से बीमा क्लेम लेने के लिए चक्कर काट रहे हैं।

नागौर जिले में खरीफ 2023 की फसलों में हुए खराबे के बावजूद बीमा कम्पनी ने बीमित किसानों को क्लेम देने की बजाए आपत्तियां लगा दी, जिन्हें जिला स्तरीय शिकायत निवारण कमेटी ने खारिज करते हुए राज्य स्तर पर भिजवा दिया, लेकिन न तो बीमा क्लेम दिया जा रहा है और न ही राज्य स्तरीय कमेटी ऐसे प्रकरणों पर निर्णय लेने के लिए बैठक आयोजित कर रही है। जिला स्तरीय कमेटी की ओर से बीमा कम्पनी की आपत्तियों को खारिज करने के बाद जयपुर भेजने पर पहले 8 जनवरी को बैठक प्रस्तावित की गई, लेकिन फिर उसे स्थगित कर 16 जनवरी की गई। इसके बाद उसे भी स्थगित कर दिया और लगातार बैठक की तारीख घोषित करके उसे टाला जा रहा है, जबकि किसाना खरीफ 2024 के क्लेम का इंतजार करने लगे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरकार ने जल्द ही किसानों को क्लेम जारी नहीं किया तो किसान आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

पत्रिका ने उठाया था मुद्दा

फसल खराब होने के बावजूद क्लेम देने में आनाकानी करने वाली बीमा कम्पनियों की मनमानी को उजागर करते हुए राजस्थान पत्रिका ने गत 2 जनवरी को ‘किसानों के लिए जी का जंजाल बनी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया। समाचार प्रकाशित होने पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर राजस्थान पत्रिका की खबर को ट्वीट कर योजना पर सवाल उठाए थे। गहलोत ने कहा कि सरकार को ऐसी मनमानी करने वाली बीमा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर किसानों को उनका क्लेम दिलवाना चाहिए। वहीं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी पत्रिका की खबर सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा था कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों से प्रीमियम लेने के बावजूद फसल खराब होने पर क्लेम देने में बीमा कम्पनियों की ओर से आनाकानी की जाती है। आपत्तियों के नाम पर क्लेम को लंबित कर दिया जाता है।

किसानों के सब्र का इम्तिहान नहीं ले सरकार

खरीफ 2023 के कई प्रकरणों पर बीमा कम्पनी की ओर से बार-बार आपत्तियां लगाई जा रही हैं। जिला स्तरीय शिकायत निवारण कमेटी ने आपत्तियों को खारिज करके रिपोर्ट भेज दी। अब राज्य स्तरीय शिकायत निवारण कमेटी की बैठक में निर्णय लिया जाना है, लेकिन पिछले दो महीने से बैठक बार-बार टाली जा रही है। जयपुर में बैठे अधिकारियों ने जल्द ही बैठक करके किसानों को क्लेम नहीं दिया तो आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। सरकार को किसानों के सब्र का इम्तिहान नहीं लेना चाहिए।

- अर्जुनराम लोमरोड़, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन टिकैत, नागौर