
नागौर. जिले में डिस्कॉम के ज्यादातर 33/11 केवी जीएसएस ठेके पर दिए हुए हैं, जिनके संचालन एवं रखरखाव में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। इसके चलते आए दिन करंट लगने से हादसे हो रहे हैं। पिछले 16 महीने में जिले में करंट लगने से 63 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक दर्जन घायल हुए हैं। वहीं करीब तीन दर्जन पशुओं की मौत हुई है।
ठेका पद्धति पर संचालित जिले के करीब 200 जीएसएस में सरकारी नियम-कायदे ताक पर रखे हुए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि निगम अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। गत दिनों नागौर दौरे पर आए ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने जब मूण्डवा क्षेत्र के जीएसएस का निरीक्षण किया तो उन्होंने भी भारी अनियमितता पकड़ी, जिस पर उन्होंने जिले के सभी जीएसएस की जांच करवाने के निर्देश दिए, लेकिन 50 दिन से अधिक समय बीतने के बावजूद अब तक न तो जांच हो पाई और न ही ठेकेदार व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई।
गौरतलब है कि सरकारी नियमानुसार ठेके पर संचालित प्रत्येक जीएसएस पर आईटीआई होल्डर कर्मचारी होने चाहिए और आठ-आठ घंटे की शिफ्ट के अनुसार प्रत्येक जीएसएस पर 3 कर्मचारी तथा दो जीएसएस के बीच एक और आईटीआई होल्डर नियुक्त करना अनिवार्य है। इसके बावजूद ज्यादातर जीएसएस पर एक-एक आदमी लगा रखा है और वो भी आईटीआई होल्डर नहीं है। जीएसएस के रखरखाव में भी भारी अनियमितता बरती जा रही है, जिसके कारण आए दिन हादसे होते हैं।
हर सात दिन में एक मौत
- वर्ष 2024-25 में करंट लगने से कुल 51 जनों की मौत हुई, जबकि 10 जने घायल हो गए। इसके साथ 26 पशुओं की मौत हो गई।
- इस वर्ष अप्रेल से जुलाई तक 12 लोगों की मौत करंट लगने से हो चुकी है तथा 2 घायल हुए हैं एवं 9 पशुओं की मौत हुई है।
अधिकारियों की कार्यशैली संदेह के घेरे में
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के निर्देश पर नागौर डिस्कॉम एसई अशोक चौधरी ने गत एक जुलाई को आदेश जारी कर एक्सईएन नेमीचंद, पीओ मनीष बेरवाल व एएओ हीरालाल सैनी की एक कमेटी गठित की। एसई चौधरी ने कमेटी के अधिकारियों को जिले में ठेके पर संचालित सभी 33/11 केवी जीएसएस का निरीक्षण कर संचालन व मरम्मत कार्य का भौतिक सत्यापन कर 15 दिन में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकारियों ने निर्देशों की पालना नहीं की। गत दिनों एसई ने कमेटी के अधिकारियों को दुबारा निर्देश जारी किए हैं।
ठेकेदार के जिम्मे हैं ये काम
ठेकेदार को प्रत्येक जीएसएस पर चार कार्मिक नियुक्त करने हैं। प्रति दिन तीन शिफ्ट में एक-एक कार्मिक और एक रिलीवर होना चाहिए। कार्मिकों का वेतन, जीएसएस का रखरखाव, कार्मिकों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाना, कार्मिकों का बीमा, पीएफ, ईएसआई में नाम दर्ज करना उसका दायित्व है, लेकिन ठेकेदार इन नियमों को ताक पर रखकर जीएसएस संचालित कर रहे हैं।
ग्रामीण व किसान हो रहे परेशान
ठेकेदार की ओर से जीएसएस लगाए गए कार्मिक अपनी मनमर्जी से काम करते हैं। एक जीएसएस पर एक ही आदमी होने से आधे समय जीएसएस सूना रहता है, जिसके चलते ज्यादातर समय बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। कभी-कभार तार टूट भी जाए तो घंटों तक बिजली नहीं काटी जाती। गर्मियों में मुंदियाड़ में हुआ हादसा इसका ताजा उदाहरण है।
कमेटी बनाकर रिपोर्ट मांगी है
ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर एक जुलाई को तीन अधिकारियों की कमेटी बनाकर ठेके पर संचालित 33/11 केवी जीएसएस एवं एफआरटी की जांच कर भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट मांगी थी। अधिकारियों ने अभी रिपोर्ट सबमिट नहीं की है, वापस रिमांइडर करवाया है।
- अशोक चौधरी, अधीक्षण अभियंता, डिस्कॉम, नागौर वृत्त
Updated on:
24 Aug 2025 12:14 pm
Published on:
24 Aug 2025 12:13 pm
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